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(फोटो सोर्स: Chhattisgarh Govt)
Success Story: खेती अब सिर्फ मेहनत का काम नहीं, स्मार्ट प्लानिंग का बिजनेस बन चुकी है. ग्राफ्टेड बैंगन इसका सबसे ताजा उदाहरण है. जहां टेक्नोलॉजी, योजना और मेहनत से तगड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है. छत्तीसगढ़ में खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार की योजनाएं अब जमीन पर असर दिखाने लगी हैं. मुंगेली जिले के ग्राम खुटेरा के किसान बसदेव राजपूत ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर सीमित भूमि में अच्छी कमाई कर एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है.
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग किसान बसदेव राजपूत ने परंपरागत धान-गेहूं के चक्र को तोड़कर ग्राफ्टेड बैंगन (Grafted Brinjal) और आधुनिक सिंचाई तकनीक को अपनाया. नतीजा? महज 62 हजार रुपये के निवेश पर उन्होंने 1.33 लाख रुपये का नेट मुनाफा कमाया. यह कहानी केवल एक किसान की नहीं, बल्कि बदलती भारतीय कृषि की तस्वीर है.
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जवाब: साधारण बैंगन की तुलना में ग्राफ्टेड बैंगन की जड़ें अधिक मजबूत होती हैं. इसमें जंगली बैंगन के पौधे पर उन्नत किस्म की ग्राफ्टिंग की जाती है, जिससे फसल में रोगों (खासकर मिट्टी से होने वाली बीमारियों) से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है और उत्पादन लंबा चलता है.
ग्राफ्टेड बैंगन एक ऐसी तकनीक है जिसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक मजबूत और ज्यादा उत्पादक पौधा तैयार किया जाता है.
इसका फायदा:
बसदेव ने ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत की और प्लास्टिक मल्चिंग से खरपतवार (Weeds) को बढ़ने से रोका. इससे खाद सीधे जड़ों तक पहुंची और पौधों को कीटों का डर कम रहा.
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (2025-26) के तहत उन्हें न केवल तकनीकी ज्ञान मिला, बल्कि ₹30,000 की सब्सिडी भी मिली, जिससे शुरुआती निवेश का बोझ कम हो गया.
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जी हां, बसदेव के अनुसार फसल अभी भी खेत में है. आने वाले समय में 30 से 40 क्विंटल अतिरिक्त पैदावार की उम्मीद है, जिससे कुल मुनाफा ₹1.75 लाख के पार जा सकता है.
| डीटेल | |
| कुल जमीन | 1.70 हेक्टेयर |
| उपयोग जमीन | 1 एकड़ |
| उत्पादन | 130 क्विंटल |
| कीमत | ₹15-20/kg |
| कुल आय | ₹1.95 लाख |
| लागत | ₹62,000 |
| नेट मुनाफा | ₹1.33 लाख |
| सब्सिडी | ₹30,000 |
पारंपरिक फसलों के बजाय उद्यानिकी और ग्राफ्टिंग तकनीक को अपनाकर आप कम जमीन से भी साल भर की आय सुनिश्चित कर सकते हैं. सरकार की RKVY जैसी योजनाओं का लाभ उठाकर आप अपनी लागत को 40-50% तक कम कर सकते हैं.
मुंगेली के इस सफल प्रयोग के बाद आसपास के गांवों में 'डेमोंस्ट्रेशन इफेक्ट' दिख रहा है. दूसरे किसान भी ड्रिप इरिगेशन अपना रहे है. ग्राफ्टेड पौधों की मांग बढ़ी और खेती में निवेश का नजरिया बदल रहा है.
जवाब: हां, लेकिन कुछ शर्तों के साथ
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भारत में छोटी जोत वाले किसानों के लिए खेती को टिकाऊ बनाना सबसे बड़ी चुनौती है. बसदेव राजपूत का उदाहरण दिखाता है कि लागत कम करके और तकनीक का इस्तेमाल करके खेती को घाटे के सौदे से बाहर निकाला जा सकता है.
Q1. ग्राफ्टेड बैंगन की लागत कितनी आती है?
सामान्य से थोड़ी ज्यादा, लेकिन मुनाफा भी ज्यादा.
Q2. क्या यह खेती छोटे किसान कर सकते हैं?
बिल्कुल, यह छोटे किसानों के लिए ही ज्यादा फायदेमंद है.
Q3. उत्पादन कितना बढ़ता है?
औसतन 25-40% तक ज्यादा.
Q4. क्या इसमें जोखिम कम है?
हां, रोग और कीट का खतरा कम होता है.
Q5. क्या मल्चिंग पेपर महंगा होता है?
शुरुआती खर्च होता है, लेकिन यह लेबर और खरपतवार नाशक का पैसा बचाकर फसल की पैदावार बढ़ा देता है.
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