धान-गेहूं का मोह छोड़ा और बन गए 'रोज किंग'! पॉलीहाउस में गुलाब उगाकर हर महीने कमा रहे ₹3 लाख

Success Story: छत्तीसगढ़ के किसान ने ₹1.20 करोड़ के निवेश और सरकारी सब्सिडी से डच गुलाब की खेती शुरू की है, जिससे वे अब हर महीने ₹3 लाख तक की कमाई कर रहे हैं.
धान-गेहूं का मोह छोड़ा और बन गए 'रोज किंग'! पॉलीहाउस में गुलाब उगाकर हर महीने कमा रहे ₹3 लाख

खेती अब सिर्फ गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि लाखों कमाने का बिजनेस बन सकती है. (फोटो सोर्स: Freepik)

Success Story: आमतौर पर गुलाब (Rose) को प्यार और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ सूरजपुर जिले के एक किसान ने इसे अपनी सफलता का आधार बना दिया है. आमतौर पर किसान धान-गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन भोला प्रसाद ने जोखिम उठाते हुए आधुनिक गुलाब खेती (Rose farming) को चुना. आज वही खेती उनके लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुकी है.

किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर पॉलीहाउस और डच किस्म को अपनाया, जिससे सालभर उत्पादन और बेहतर दाम मिलना संभव हुआ.

5 प्वाइंट में समझें पूरी बात

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किसान: भोला प्रसाद अग्रवाल
खेती: डच किस्म के गुलाब
जमीन: 2 एकड़
निवेश: ₹1.20 करोड़
उत्पादन: 3-4 हजार गुलाब स्टिक प्रति दिन
कमाई: ₹2-3 लाख प्रति माह

क्या है पूरी कहानी?

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के मुताबिक, ग्राम डुमरिया के भोला प्रसाद अग्रवाल ने ₹1.20 करोड़ के निवेश और सरकारी अनुदान की मदद से आधुनिक पॉलीहाउस स्थापित किए हैं. आज वे न केवल प्रतिदिन 3,000 से 4,000 गुलाब के फूलों का उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि बनारस और ओडिशा जैसे बड़े बाजारों में अपनी धाक जमाकर हर महीने 2 से 3 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे हैं.

कैसे हुई शुरुआत?

  • वर्ष 2023 में किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर उन्नत तकनीक की ओर कदम बढ़ाया.
  • करीब 2 एकड़ भूमि में उन्होंने 2 अत्याधुनिक पॉलीहाउस लगाए.
  • इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1.20 करोड़ रुपये की लागत आई.

फंडिंग कैसे हुई?

यह मॉडल निजी पूंजी और सरकारी सहायता का एक बेहतरीन उदाहरण है

  • बैंक लोन- 90 लाख रुपये बैंक लोन लिया गया.
  • खुद की पूंजी- 30 लाख रुपये का खुद निवेश किया.
  • सरकारी मदद- राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) से 50% अनुदान मिला.

तकनीक जिसने बदली किस्मत

पॉलीहाउस के भीतर नियंत्रित तापमान और वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन के कारण अब खेती मौसम की मोहताज नहीं रही. यहां 'डच किस्म' के करीब 80 हजार गुलाब के पौधे लगाए गए हैं.

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के अनुसार, वर्तमान में इस फार्म से प्रतिदिन औसतन 3 से 4 हजार गुलाब स्टिक का उत्पादन हो रहा है.
तैयार फूलों की आपूर्ति बनारस, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग बाजारों में की जाती है.

डीटेल्स

मॉडल2 एकड़ में आधुनिक पॉलीहाउस तकनीक
कुल लागत₹1.20 करोड़ (50% सरकारी अनुदान सहित)
उत्पादन3,000-4,000 गुलाब प्रतिदिन
बाजारबनारस (UP), ओडिशा, छत्तीसगढ़
नेट इनकम₹2-3 लाख प्रति माह (सभी खर्च काटकर)

मुनाफे का नया गणित

  • इस आधुनिक खेती से भोला प्रसाद अग्रवाल को हर माह औसतन 2 से 3 लाख रुपये की आय हो रही है.
  • श्रमिकों के खर्च, खाद, उर्वरक और रखरखाव लागत निकालने के बाद भी यह खेती बेहद लाभकारी साबित हो रही है.
  • नियमित आमदनी का मजबूत जरिया बन चुकी है.

पारंपरिक खेती से कैसे अलग है यह मॉडल?

अग्रवाल बताते हैं कि पारंपरिक खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहती है, जिससे जोखिम अधिक होता है. वहीं पॉलीहाउस तकनीक ने इस जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है. नियंत्रित वातावरण में उगाए गए फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. यही बदलाव बना गेमचेंजर.

क्या यह मॉडल हर किसान अपना सकता है?

हां, किसान का कहना है कि अगर नई तकनीक अपनाई जाए और शासन की योजनाओं का फायदा लिया जाए, तो खेती को भी उद्योग की तरह सफल बनाया जा सकता है. आज उनकी पहल न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि आसपास के लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही है.

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कंक्लूजन

सूरजपुर में गुलाब की खेती का आधुनिक मॉडल यह साबित करता है कि सही योजना, आधुनिक तकनीक और मेहनत के साथ खेती भी लाभ का सशक्त माध्यम बन सकती है. गुलाब की खुशबू के साथ सफलता की यह कहानी अब पूरे क्षेत्र में प्रेरणा फैला रही है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. पॉलीहाउस खेती क्या है?
नियंत्रित वातावरण में की जाने वाली आधुनिक खेती.

Q2. इसमें कितना निवेश लगता है?
फसल और साइज के अनुसार लाखों से करोड़ तक.

Q3. क्या इसमें रिस्क कम है?
हां, मौसम का असर कम होने से रिस्क घटता है.

Q4. क्या सरकार से मदद मिलती है?
हां, सब्सिडी और अनुदान उपलब्ध हैं.

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