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Success Story: खेती में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान मिसाल पेश कर रहे हैं. 'जहां चाह, वहां राह' इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है, छत्तीसगढ़ के युवा किसान गोविन्द कोर्राम ने. उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया. आज वे गांव के अन्य किसानों के लिए एक आदर्श बन चुके हैं. छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल कोण्डागांव विकासखण्ड के ग्राम ठोटीमडानार के रहने वाले युवा किसान गोविन्द कोर्राम ने कम उम्र में ही परिवार और खेती की जिम्मेदारी संभाली और खेती को ही अपना भविष्य बनाने का फैसला लिया.
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के मुताबिक गोविन्द के पिता परंपरा के अनुसार लंबे समय से पारंपरिक तरीके से खेती करते आ रहे थे. पारंपरिक खेती में मेहनत और लागत ज्यादा लगती थी, जबकि उत्पादन कम होता था. इससे परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से हो पाता था. समय के साथ घर की जरूरतें बढ़ती जा रही थीं, लेकिन आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही थी. इसी स्थिति ने गोविन्द को सोचने पर मजबूर किया कि खेती को लाभ का व्यवसाय कैसे बनाया जाए. गोविन्द ने ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफे के लिए आधुनिक खेती को अपनाने का फैसला लिया.
उनके पिता केवल 5वीं तक शिक्षित हैं, लेकिन खेती-किसानी से जुड़े फैसलों में पिता और बेटे की सोच हमेशा एक जैसी रही. दोनों ने मिलकर यह तय किया कि अगर सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का फायदा लिया जाए, तो खेती से भी अच्छी आमदनी संभव है.
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शोभी राम के नाम पर कुल 3.5 एकड़ कृषि भूमि है. योजना का फायदा लेने से पहले इसी जमीन पर पारंपरिक तरीके से सब्जी की खेती की जाती थी. उत्पादन कम होने और लागत ज्यादा होने के कारण सालाना आय लगभग 1.50 लाख रुपये तक ही सीमित थी. इससे परिवार की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया था.
करीब 2 वर्ष पहले गोविन्द को राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के तहत संचालित नवीन तकनीक योजना की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने अपने पिता के नाम से योजना का फायदा लेने के लिए आवेदन किया. उद्यानिकी विभाग से संपर्क होने के बाद उनकी खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया. विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के आधार पर उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग प्रणाली अपनाकर सब्जी उत्पादन शुरू किया.
ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) और मल्चिंग (Mulching) तकनीक अपनाने से खेती में कई सकारात्मक बदलाव आए. पानी की बचत हुई, उर्वरकों का सही उपयोग संभव हुआ और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा और पैदावार में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इस समय परिवार अपनी लगभग 3 एकड़ भूमि में ड्रिप सिंचाई पद्धति से मिर्च, बैंगन, करेला और अदरक की बड़े पैमाने पर खेती कर रहा है. विशेष रूप से पहले में जहां मिर्च की खेती में प्रति एकड़ लगभग 100 क्विंटल उत्पादन मिल रहा था, वहीं योजना का फायदा लेने के बाद अब कुल 210 क्विंटल मिर्च का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 3.65 लाख रुपये तक पहुंच गई.
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आय में हुई इस बढ़ोतरी से परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. अब परिवार ने एक ट्रैक्टर खरीदा है, जिससे खेती के कार्य आसान हो गए हैं. आवागमन के लिए घर में तीन मोटरसाइकिलें हैं और परिवार ने पक्का मकान भी बना लिया है. बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रहन-सहन के स्तर में भी सुधार देखने को मिला है.
गोविन्द की इस सफलता को देखकर आसपास के किसान भी उनसे सलाह लेने आने लगे हैं.कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को नई पहचान मिल रही है. युवा किसान गोविन्द का कहना है कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है.
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