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Success Story: छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई हैं. जिसका फायदा किसान मालती मोहन उठा रहे हैं. पहले ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने वाले किसान मालती ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन से इस बार 2 एकड़ की भूमि में मक्का फसल (Maize Crop) की खेती की. जिससे उनको 88,200 रुपये की आमदनी हुई. जो कि धान फसल की तुलना में दोगुनी थी.
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के मुताबिक, किसान मालती मोहन विभाग से संपर्क कर मक्का फसल लेकर खेतों में लगाया और उत्पादन पर कुल 11,800 रुपये का खर्च आया, जिसमें खाद, बीज और अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं. मक्का की बिक्री से 1 लाख रुपये की आमदनी हुई, जिससे उन्हें 88,200 रुपये का मुनाफा मिला. इसके विपरीत गर्मी के मौसम में धान की खेती में ज्यादा लागत और पानी भी ज्यादा लगता है जिसकी तुलना में मुनाफा भी कम होता है.
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किसान मालती मोहन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन की सराहना करते हुए धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती के लिए प्रेरित हुए हैं, जिसका फायदा उन्हे मिला. साथ ही इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जल सरंक्षण से पर्यावरण सरंक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.
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खरीफ फसलों में धान के बाद मक्का प्रदेश की मुख्य फसल है. इसकी खेती, दाने /भुट्टे एवं हरे चारे के लिए की जाती है. मक्का की अच्छी उपज के लिए जरूरी है कि समय से बुवाई, निकाई-गुड़ाई खरपतवार नियंत्रण, उर्वरकों की संतुलित प्रयोग, समय से सिंचाई एवं कृषि रक्षा साधनों को अपनाया जाए. संकर/संकुल प्रजातियों की उपज सरलता से 35-40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ली जा सकती है.
मक्का की खेती के लिए उत्तम जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि अच्छी होती है. पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा अन्य दो या तीन जुताइयां देसी हल या कल्टीवेटर या रोटावेटर द्वारा करनी चाहिए. अच्छी उपज प्राप्त करने हेतु उन्नतिशील प्रजातियों का शुद्ध बीज ही बोना चाहिए. बुवाई के समय एवं क्षेत्र अनुकूलता के अनुसार प्रजाति का चयन करें.
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देर से पकने वाली मक्का की बुवाई मध्य मई से मध्य जून तक पलेवा करके करनी चाहिए. जिससे वर्षा शुरू होने से पहले ही खेत में पौधे भली भांति स्थापित हो जाएं और बुवाई के 15 दिन बाद एक निराई भी हो जाए. जल्द पकने वाली मक्का की बुवाई जून के अन्त तक कर ली जाए और वर्षा के समय वाली 10 जुलाई तक बुवाई कर ली जाए. बीज बोने से पूर्व यदि शोधित न किया गया हो तो 1 किग्रा बीज के थीरम 2.5 ग्राम या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम से बोने से पहले शोधित कर लें
बुवाई हल के पीछे कूंडों में 3.5 सेमी. की गहराई पर करें. लाइन से लाइन की दूरी अगेती किस्मों में 45 सेमी. और मध्यम व देर से पकने वाली प्रजातियों में 60 सेमी. होनी चाहिए. इसी प्रकार अगेती किस्मों में पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी. और मध्यम एवं देर से पकने वाली प्रजातियों में 25 सेमी. होनी चाहिए.