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Phool Gobhi ki kheti.
सितंबर माह को फूलगोभी की बुआई के लिए उत्तम समय माना जाता है. इस दौरान यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें तो बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा पा सकते हैं. फूलगोभी ठंडी जलवायु की फसल है, लेकिन इसकी शुरुआती किस्में सितंबर-अक्टूबर में बुवाई के लिए बेहतर होती हैं. बता दें कि कुछ खास किस्में 75 से 90 दिनों के भीतर ही फलन देने लगती हैं जिससे किसान जल्दी बाजार तक फसल पहुंचाकर ज्यादा फायदा उठा सकते हैं.
फूलगोभी की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए. खेत की अच्छी तरह जुताई कर भुरभुरी बनाकर उसमें गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालना जरूरी है.

अगर समय पर बुआई और बेहतर प्रबंधन किया जाए तो प्रति हेक्टेयर 200 से 250 क्विंटल फूलगोभी का उत्पादन संभव है.
सितंबर में बोई गई फसल नवंबर-दिसंबर तक बाजार में आती है, जब इसकी कीमत अधिक मिलती है. इससे किसानों को दोगुना मुनाफा मिल सकता है.
कुल मिलाकर, सितंबर माह में फूलगोभी की बुआई करना किसानों के लिए लाभकारी सौदा साबित हो सकता है. सही किस्म, पौध प्रबंधन और रोग नियंत्रण अपनाकर किसान अपनी आमदनी में इजाफा कर सकते हैं.
सवाल: फूलगोभी की बुआई के लिए सितंबर महीना क्यों बेहतर है?
सितंबर में तापमान और नमी का संतुलन बना रहता है, जिससे जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की अच्छी बढ़ोतरी होती है.
सवाल: फूलगोभी की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी सबसे अच्छी होती है?
दोमट और बलुई दोमट मिट्टी, जिसका pH 6 से 7 के बीच हो.
सवाल: सितंबर माह में कौन-कौन सी किस्में बोनी चाहिए?
पूसा दीपिनी, पूसा कार्तिकी, पूसा हाइब्रिड-2 और महिको-43 जैसी जल्दी तैयार होने वाली किस्में इस समय सबसे अच्छी रहती हैं.
सवाल: पौधों की रोपाई करते समय कितनी दूरी रखनी चाहिए?
कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर होनी चाहिए.
सवाल: खाद और उर्वरक प्रबंधन कैसे करें?
प्रति हेक्टेयर 200-250 क्विंटल गोबर की खाद डालें.
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