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Subsidy: पुआल/खुंटी कूड़ा नहीं, खेती का गहना है. इसे मिट्टी में मिलाना है, कभी नहीं जलाना है. यह अवशेष नहीं, विशेष है. देश के ज्यादातर किसान फसल की कटाई के बाद फसल अवशेष यानी पुआल या पराली को जला देते हैं. इसके जलने से न सिर्फ प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उत्पादक क्षमता भी प्रभावित होती है. बंफसल अवशेष के प्रधन के लिए बिहार सरकार (Bihar Government) ने बड़ी पहल की है. राज्य सरकार किसानों को फसल अवशेष के सही प्रबंधन के लिए स्ट्रॉ रीपर (Straw Reaper) और स्ट्रॉ बेलर (Straw Baler) मशीनों की खरीद पर 50 फीसदी तक दे रही है.
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बिहार सरकार, कृषि विभाग के मुताबिक, स्ट्रॉ रीपर के लिए किसानों को इस योजना के तहत 40 फीसदी यानी अधिकतम 1,20,000 रुपये का अनुदान मिलेगा. वहीं अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को 50 फीसदी या अधिकतम 1,50,000 रुपये तक का अनुदान मिलेगा.
बिहार सरकार कृषि विभाग द्वारा स्ट्रॉ बेलर-रैक सहित पर सामान्य श्रेणी के किसानों को 75 फीसदी या अधिकतम 2,25,00 रुपये तक अनुदान मिलेगा. जबकि अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को 80 फीसदी या अधिकतम 2,50,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी. वहीं, स्क्वॉयर बेलर/रेक्टेंगुलर बेलर पर 40 फीसदी या अधिकतम 5,28,000 रुपये और अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को 50 फीसदी या अधिकतम 6,60,000 रुपये का अनुदान मिलेगा.
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इस यंत्र को किसान ऑनलाइन आवेदन कर अनुदानित दर खरीद सकते हैं. साथ ही स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर के तहत खरीद किए जाने वाले फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्रों की सूची में भी यह यंत्र शामिल है.

ऑनलाइन आवेदन कृषि विभाग की वेबसाइट http://farmech.bihar.gov.in पर किए जा सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन के संबंध में विशेष जानकारी के लिए अपने प्रखंड कृषि पदाधिकारी / सहायक निदेशक (कृषि अभियंत्र) / जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है.