कुसुम की खेती: कम पानी में अधिक मुनाफे का 'कांटेदार' मंत्र, ग्रीष्मकालीन धान का बना बेहतर विकल्प

Profitable Farming Ideas: अगर आपके क्षेत्र में पानी की कमी है और धान की खेती घाटे का सौदा बन रही है, तो कुसुम एक टिकाऊ और लाभदायक विकल्प है. इसमें लागत कम है और सुरक्षा अधिक, जिससे नेट मुनाफा बढ़ जाता है.
कुसुम की खेती: कम पानी में अधिक मुनाफे का 'कांटेदार' मंत्र, ग्रीष्मकालीन धान का बना बेहतर विकल्प

कुसुम का तेल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

Profitable Farming Ideas: गिरते भूजल स्तर के बीच छत्तीसगढ़ के किसान अब ग्रीष्मकालीन धान के बजाय कुसुम (Safflower) की खेती को अपना रहे हैं. बलौदाबाजार के प्रगतिशील किसान वामन टिकरिहा ने 10 एकड़ में कुसुम की फसल लगाकर इसे फायदे का सौदा साबित किया है. कम पानी, कम लागत और मवेशियों से प्राकृतिक सुरक्षा वाली यह फसल 150-180 दिनों में तैयार होकर किसानों को धान के मुकाबले बेहतर मुनाफा दे रही है.

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं.

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क्यों खास है कुसुम की खेती?

कुसुम एक तिलहन फसल है जो अपनी विशिष्टताओं के कारण किसानों की पहली पसंद बन रही है-

कम पानी की जरूरत: कुसुम की फसल उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहां भूजल स्तर गिर रहा है, क्योंकि इसे धान की तुलना में बेहद कम सिंचाई की जरूरत होती है.

प्राकृतिक सुरक्षा: इस पौधे में कांटे होते हैं, जिसकी वजह से छुट्टा मवेशी इसे नहीं खाते. इससे किसानों का फेंसिंग या रखवाली का अतिरिक्त खर्च बच जाता है.

तेल की उच्च मात्रा: कुसुम के बीजों में 25 से 45% तक तेल की मात्रा पाई जाती है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है.

पकने की अवधि: यह फसल 150 से 180 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है.

सफलता की कहानी

राज्य स्तरीय डॉ. खुबचंद बघेल कृषक रत्न से सम्मानितवामन टिकरिहा ने खेती में बदलाव का उदाहरण पेश किया है. पिछले वर्ष ग्रीष्मकालीन धान में पानी की कमी के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था.

प्राकृतिक खेती पर जोर: वे केवल फसल नहीं बदल रहे, बल्कि तकनीक भी सुधार रहे हैं. वे गोबर और गौमूत्र से बने जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत का उपयोग कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं.

विभाग की सलाह: कृषि विभाग की प्रेरणा से उन्होंने इस वर्ष 10 एकड़ में कुसुम की बुआई की है, जो धान का एक सफल विकल्प साबित हो रही है.

कुसुम की खेती के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

इसे रबी और ग्रीष्मकालीन मौसम में धान के विकल्प के रूप में उगाया जा सकता है, खासकर उन जगहों पर जहाँ पानी सीमित है.

क्या इसमें खाद और कीटनाशकों का अधिक खर्च होता है?

नहीं, इसे प्राकृतिक खाद (जीवामृत) के साथ कम लागत में उगाया जा सकता है। इसके कांटे कीटों और जानवरों से सुरक्षा प्रदान करते हैं.

कुसुम की फसल से क्या उत्पाद मिलते हैं?

मुख्य रूप से इसके बीजों से उच्च गुणवत्ता वाला खाने का तेल मिलता है. इसके अलावा इसके फूलों का उपयोग रंगों और औषधियों में भी किया जाता है.

निष्कर्ष

कुसुम की खेती आज के समय में सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि स्मार्ट और टिकाऊ खेती का भविष्य बनती जा रही है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

सवाल: क्या कुसुम हर जगह उगाई जा सकती है?
जवाब: ज्यादातर सूखे और कम पानी वाले क्षेत्रों में बेहतर.

सवाल: बाजार में इसकी मांग कैसी है?
जवाब: तेल के कारण अच्छी मांग रहती है.

सवाल: क्या यह धान का अच्छा विकल्प है?
जवाब: हां, खासकर गर्मी के मौसम में.

सवाल: कितना मुनाफा हो सकता है?
जवाब: लागत कम होने से नेट प्रॉफिट ज्यादा रहता है.

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