प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मत्स्य पालन को नई ताकत, आर्थिक मजबूती और किसानों की इनकम में होगी जबरदस्त ग्रोथ,जानिए कैसे

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन, रोजगार और महिलाओं के सशक्तिकरण को नई दिशा दी है.195 लाख टन उत्पादन और 58 लाख रोजगार सृजन के साथ यह योजना भारत की "नीली क्रांति" की आधारशिला बनी है.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मत्स्य पालन को नई ताकत, आर्थिक मजबूती और किसानों की इनकम में होगी जबरदस्त ग्रोथ,जानिए कैसे

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ने पिछले पांच वर्षों में मत्स्य पालन क्षेत्र को नई दिशा देने का काम किया है। यह योजना मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग द्वारा चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और सामाजिक रूप से समावेशी बनाना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और पोषण सुरक्षा को मजबूत आधार मिल सके।

इस योजना की शुरुआत 10 सितंबर 2020 को हुई थी। शुरुआत में इसे 20,050 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ स्वीकृति दी गई है. इसमें केंद्र सरकार का योगदान 9,407 करोड़ रुपये, राज्य सरकारों का योगदान 4,880 करोड़ रुपये और लाभार्थियों की ओर से 5,763 करोड़ रुपये का निवेश शामिल था. यह राशि मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार को मजबूत करने के लिए तय की गई थी.

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

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आपको बता दें कि सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 22 जुलाई 2025 तक योजना के तहत 21,274.16 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है. इसे साफ है कि पीएमएमएसवाई ने न केवल योजनाबद्ध ढंग से काम किया बल्कि अपेक्षाओं से अधिक परिणाम दिए.इस योजना का मुख्य मकसद उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, नई तकनीकों को अपनाना और मत्स्य क्षेत्र में वैल्यू चेन को मजबूत करना रहा है.

मत्स्य उत्पादन में बना रिकॉर्ड

भारत मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने 195 लाख टन मत्स्य उत्पादन का रिकॉर्ड हासिल किया. इससे भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश बन गया. फरवरी 2025 तक मत्स्यपालन की उत्पादकता राष्ट्रीय औसत के अनुसार 3 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 4.7 टन प्रति हेक्टेयर हो गई. रोजगार सृजन के मामले में भी योजना ने उम्मीदों से अधिक उपलब्धियां दीं. दिसंबर 2024 तक 55 लाख रोजगार अवसरों के लक्ष्य के मुकाबले 58 लाख रोजगार सृजित किए जा चुके थे.

पीएमएमएसवाई ने मत्स्य पालन क्षेत्र को सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा बल्कि सामाजिक समावेशन और महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया. आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत 99,018 महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया गया है. महिलाओं को मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों में प्रशिक्षित और सक्षम बनाकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की गई है.

क्या है इस स्कीम की खासियत

इस योजना की एक और खासियत यह रही कि इसमें जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया. समुद्री तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को जलवायु संकट से निपटने के लिए साधन और अवसर प्रदान किए गए. साथ ही, बाजार और लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करके उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा गया. इससे न केवल उत्पादकों की आय बढ़ी बल्कि ग्राहकों तक गुणवत्तापूर्ण मछली उत्पाद भी पहुंचे.

योजना ने क्लस्टर-बेस्ड विकास मॉडल को भी अपनाया, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज हुईं. यह मॉडल छोटे मत्स्यपालकों और उद्यमियों को एक साथ लाकर उन्हें साझा संसाधन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है. वैसे तो आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो इस योजना ने मत्स्य पालन क्षेत्र को लाभदायक और टिकाऊ बनाया है.असल में उत्पादन और निर्यात में तेजी आने से विदेशी मुद्रा अर्जन भी बढ़ा है. वहीं, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक की वजह से गुणवत्ता मानकों में सुधार हुआ है.

पीएमएमएसवाई ने कितने टाइम में किया कमाल

वैसे पीएमएमएसवाई ने सिर्फ पांच वर्षों में मत्स्य पालन क्षेत्र में जिस तरह की क्रांतिकारी उपलब्धियां हासिल की हैं, वह भारत को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाती हैं. 195 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन, 58 लाख रोजगार के अवसर और लाखों महिलाओं का सशक्तिकरण इसकी बड़ी उपलब्धियां हैं. इसके अलावा जलवायु के अनुकूल और टिकाऊ वैल्यू चेन का निर्माण भी इस योजना की विशेष पहचान है.

यानी कि कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने "नीली क्रांति" को एक नई दिशा दी है. यह योजना आने वाले वर्षों में भी मत्स्य पालन क्षेत्र को और मजबूत करेगी और देश को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.


5 FAQs

Q1. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना कब शुरू हुई थी?
यह योजना 10 सितंबर 2020 को शुरू हुई थी.

Q2. पीएमएमएसवाई का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मकसद मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और समावेशी बनाकर उत्पादन, रोजगार और निर्यात बढ़ाना है.

Q3. योजना के तहत अब तक कितना निवेश हुआ है?
22 जुलाई 2025 तक 21,274.16 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है.

Q4. पीएमएमएसवाई से कितने रोजगार सृजित हुए हैं?
दिसंबर 2024 तक 58 लाख रोजगार अवसर सृजित किए जा चुके हैं.

Q5. महिलाओं को इस योजना से क्या लाभ मिला है?
योजना के तहत 99,018 महिलाओं को मत्स्य पालन गतिविधियों में प्रशिक्षित कर सशक्त बनाया गया है.

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