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Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मछुआरों की जिंदगी में नई रोशनी ला दी है. इस योजना का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है. पहले जहां मछुआरे सीमित साधनों के कारण सही दाम पर मछलियों की बिक्री नहीं कर पाते थे, वहीं अब आधुनिक सुविधाओं के साथ उनकी आय बढ़ रही है और जीवन स्तर में सुधार हो रहा है.
इस योजना के तहत मछुआरों को मछलियों को ढोने और बेचने के लिए बेहतर साधन दिए गए हैं. अब उन्हें मोटरसाइकिल विद आइस बॉक्स, तीन पहिया ऑटो और साइकिल विद आइस बॉक्स की सुविधा मिल रही है. खास बात यह है कि इन साधनों पर 40 से 60% तक की सब्सिडी भी दी जा रही है. इससे अब मछुआरे आसानी से अपनी पकड़ी हुई मछलियों को आइस बॉक्स में रखकर बाजार तक ले जा सकते हैं। मछलियां ताजा बनी रहती हैं और अच्छे दाम भी मिलते हैं.
जब मछली पकड़ने का सीजन बंद रहता है, उस समय मछुआरों की आमदनी रुक जाती है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘बचत सह राहत योजना’ (Savings cum Relief Scheme) शुरू की है. इसके तहत हर पात्र मछुआरे को 3,000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में दिए जाते हैं. इससे मछुआरों के घर खर्च चलाने में बड़ी मदद मिलती है और उन्हें कठिन समय से जूझने में सहारा मिलता है.
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जिला मत्स्य विभाग अधिकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत जिले के मछुआरा भाइयों को मत्स्य परिवहन के लिए योजना के तहत मोटरसाइकिल विद आइस बॉक्स और रिक्शा विद आइस बॉक्स दिया गया है, जिससे वह मछलियों को विक्रय करने के लिए आइस बॉक्स में रखकर अच्छे एवं उचित भाव में विक्रय कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते हैं. साथ ही इस बार जिले में दो पेन कैचर इकाई व चार नए केज कल्चर की स्थापना की गई है, जिससे मत्स्य उत्पादकता को बढ़ाया जा सके और मछुआरा समितियों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल सके.
मानपुरा गांव के जय जोगणिया मत्स्य सहकारी समिति के सचिव गोपाल दास ने कहा, नीमच से 60 किलोमीटर दूर नया पुराना तालाब में 10 वर्षों के लिए मत्स्य पालन और मत्स्याखेट (मछली पकड़ना) के लिए पट्टा मिला है. साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदायोजना के तहत 2 हेक्टेयर के लिए पेन कैचर इकाई के लिए 3,60,000 रुपए का अनुदान भी मिला और चार नए केज कल्चर की स्थापना भी हमारी समिति द्वारा की गई.
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ((PMMSY)) ने नीमच जिले के मछुआरों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. परिवहन साधनों पर सब्सिडी, क्लोज सीजन में आर्थिक मदद, पेन कैचर और केज कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है बल्कि मछुआरों को आर्थिक रूप से मजबूत भी किया है. मछुआरे अब सीधे बाजार से जुड़ रहे हैं और उनकी आय पहले से दोगुनी तक हो गई है.
सवाल: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) क्या है?
इसका उद्देश्य मछुआरों को आधुनिक सुविधाएं और आर्थिक सहायता देकर उनका जीवन स्तर सुधारना और मछली उत्पादन बढ़ाना है.
सवाल: नीमच जिले में इस योजना का क्या असर हुआ है?
मछुआरों को मछली परिवहन के साधन, आइस बॉक्स, पेन कैचर इकाइयां और केज कल्चर जैसी सुविधाएं मिली.
सवाल: मछलियों के परिवहन के लिए कौन-कौन से साधन दिए जा रहे हैं?
मोटरसाइकिल विद आइस बॉक्स, तीन पहिया रिक्शा विद आइस बॉक्स और साइकिल विद आइस बॉक्स दिए गए.
सवाल: क्लोज सीजन के दौरान मछुआरों को क्या मदद मिलती है?
‘बचत सह राहत योजना’ के तहत हर पात्र मछुआरे को 3,000 रुपये दिए जाते हैं.
सवाल: पेन कैचर और केज कल्चर क्या है?
इन तकनीकों से सीमित जगह में ज्यादा उत्पादन होता है और आय बढ़ती है.
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(इनपुट- IANS)