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PMFME योजना से गांव में कमाई का रास्ता खुला. (फोटो सोर्स: PMFME)
PMFME Scheme: अगर गांव में रहकर खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पैसों और मशीनों की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है, तो बिहार के शेखपुरा जिले की यह कहानी आपके लिए प्रेरणा बन सकती है. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) की मदद से एक साधारण परिवार ने न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि गांव में रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी कायम की. यह कहानी बताती है कि सही सरकारी योजना, थोड़ी जानकारी और मेहनत मिल जाए तो छोटा बिजनेस भी बड़ा बदलाव ला सकता है.
PMFME यानी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना. इसे केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया था.
इस योजना का मकसद है-
यह योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए अहम है जो-
जैसे बिजनेस शुरू करना चाहते हैं.
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बिहार के शेखपुरा जिले के घाटकुसुंबा प्रखंड के पानापुर गांव में रहने वाले मनमेंद्र कुमार और रविता कुमारी पहले छोटी आटा चक्की से परिवार चलाते थे. कमाई इतनी सीमित थी कि-
फिर उन्हें उद्योग विभाग के जरिए PMFME योजना की जानकारी मिली. यहीं से उनकी जिंदगी बदलनी शुरू हुई.
दंपति को योजना के तहत आटा चक्की मशीन, तेल पिराई मशीन, वित्तीय सहायता और बिजनेस विस्तार का मौका मिला.
नई मशीनों से उत्पादन बढ़ा, ग्राहकों की संख्या बढ़ी, आसपास के गांवों से लोग आने लगे और आमदनी में सुधार हुआ. आज उनका छोटा कारोबार गांव में पहचान बना चुका है.
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अगर आप भी रविता और मनमेंद्र की तरह अपना छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या मौजूदा काम को बढ़ाना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए महत्वपूर्ण है-
आर्थिक मजबूती: पुरानी मशीनों की जगह आधुनिक मशीनें लगाने के लिए सरकारी मदद मिलती है.
बाजार तक पहुंच: उत्पाद की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में भी सहायता दी जाती है ताकि आपका सामान सिर्फ गांव तक सीमित न रहे.
प्रशिक्षण: सरकार आपको बिजनेस चलाने और खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) के पालन के लिए तकनीकी ट्रेनिंग भी देती है.
अगर आप इस योजना का फायदा उठाकर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें.
1. आवेदन कहां करें?
ऑनलाइन पोर्टल: आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmfme.mofpi.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
जिला उद्योग केंद्र (DIC): आप अपने जिले के जिला उद्योग केंद्र जाकर 'जिला संसाधन व्यक्ति' (District Resource Person - DRP) से मिल सकते हैं वे आपको आवेदन भरने में मदद करेंगे.
2. जरूरी दस्तावेज
3. चयन प्रक्रिया
आवेदन करने के बाद आपके प्रोजेक्ट की जांच की जाती है. जिला स्तरीय समिति की मंजूरी के बाद आपका लोन बैंक को भेज दिया जाता है. बैंक से मंजूरी मिलते ही सब्सिडी और लोन की राशि आपके काम के लिए उपलब्ध हो जाती है.
| डीटेल | |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना |
| उद्देश्य | छोटे फूड कारोबार को मजबूत बनाना |
| कुल बजट | 10,000 करोड़ रुपये |
| लोन सीमा | 10 लाख रुपये |
| सब्सिडी | 35% तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी |
हां, लेकिन कुछ जरूरी शर्तें होती हैं.
अगर आप गांव या छोटे शहर में रहते हैं तो यह योजना बड़ा मौका बन सकती है-
अगर आपके पास कोई खाद्य उत्पाद बनाने का अनुभव है, तो PMFME योजना आपके बिजनेस की शुरुआत का मजबूत आधार बन सकती है.
नहीं. यह योजना खासतौर पर छोटे कारोबारियों के लिए बनाई गई है. गांव की छोटी चक्की, घरेलू अचार यूनिट या मसाला प्रोसेसिंग जैसे काम भी इसमें शामिल हो सकते हैं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 PMFME योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
छोटे फूड प्रोसेसिंग कारोबारियों को आर्थिक और तकनीकी सहायता देना.
Q2 क्या महिलाओं को भी योजना का फायदा मिलता है?
हां, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है.
Q3 क्या मशीन खरीदने के लिए सहायता मिलती है?
हां, मशीन और कारोबार विस्तार के लिए सहायता उपलब्ध है.
Q4 क्या गांव में रहने वाले लोग आवेदन कर सकते हैं?
हां, यह योजना ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ही बनाई गई है.