Published: 12:02 PM, Sep 15, 2024
|Updated: 12:31 PM, Sep 15, 2024
Mulching: खेती-किसानी में खरपतवार, किसानों का सबसे बड़ा सिरदर्द है. इससे फसल को बचाने के लिए किसान निराई-गुड़ाई कराते हैं लेकिन इस पर काफी खर्च होता है. ऐसे में 'मल्चिंग' (Mulching) किसानों के लिए काफी कारगर हो सकती है. इसके फायदों को देखते हुए बिहार सरकार किसानों को मल्चिंग तकनीक पर 50% सब्सिडी दे रही है.

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मल्चिंग मिट्टी को एक परत से ढकने की प्रक्रिया है, जो खुली मिट्टी को कटाव से बचाती है, नमी बनाए रखती है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार करती है. साथ ही मिट्टी के कटाव को भी रोकता है. इस विधि को अपनाकर खेतों में होने वाले खरपतवार पर नियंत्रण करते हुए पौधों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

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1. पौधों की जड़ों का विकास सुचारू रूप से होता है 2. खरपतवार रोकने में मदद मिलती है 3. इससे खेती में नमी की मात्रा बनी रहती है 4. तापमान नियंत्रण में रहता है 5. मल्चिंग द्वारा मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है.

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बिहार सरकार उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग के मुताबिक, बिहार सरकार राज्य में मल्चिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 50% सब्सिडी दे रही है. इसके तहत किसानों को मल्चिंग लगाने पर इकाई लागत का 50 फीसदी रकम दी जाएगी. ये राशि किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी.

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मल्चिंग विधि से खेती में ड्रिप सिंचाई का साधन उपयोग करना पड़ता है. क्यारियों में लगाये जाने वाले पौधों की जडों के बीच पाइप में छिद्र रहता है. छिद्र से होकर पानी पौधों की जड़ों तक पहुंचता है. इस विधि से भूमि को कठोर होने से बचाया जा सकता है.

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मल्चिंग बिछाने की वजह से किसानों की कमाई दोगुनी तक हो जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे एक तो किसानों को कम सिंचाई करनी पड़ती है. दूसरा इससे खरपतवार निकलवाने का खर्च बचता है. तीसरा इसकी वजह से कीटनाशक पर कम खर्च होता है. इन सब का नतीजा होता है अच्छी पैदावार और कम लागत, जिससे किसानों की कमाई दोगुनी तक हो जाती है.

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बिहार के किसान मल्चिंग का फायदा उठाना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. इस सब्सिडी के बारे में अधिक जानकारी के लिए किसान उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in पर विजिट कर सकते हैं. इसके अलावा किसान अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं.