Potato Cultivation: किसान आलू की बिजाई में लगे हैं. आलू प्रौद्योगिकी केंद्र ने किसानों को एक हफ्ते के अंदर ही आलू की बिजाई करने की सलाह दी है. ज्यादा देर होने पर पाला से किसानों को नुकसान हो सकता है. आलू की अगेती बुआई के लिए 15 से 31 अक्टूबर तक बिजाई की जाती है. जबकि पिछेती बिजाई नवंबर के पहले हफ्ते में भी किसान कर सकते हैं.
1/5ऐसे आलू की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान 4.8 से 5.4 के बीच होना चाहिए. बीजों के अंकुरण के लिए तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. बुवाई से पहले खेत की 3 से 4 बार अच्छी जुताई कर लें. फिर पाटा चलाकर खेत को समतल और मिट्टी को भुरभुरा बना लें.
2/5आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए कुफरी पुखराज बेहतरीन किस्म है. यह व्हाइट किस्म है, जो कम समय में अच्छा उत्पादन देती है. बता दें कि देश में आलू का 33 फीसदी उत्पादन कुफरी पुखराज से ही आता है. यह किस्म 100 दिन में तैयार हो जाती है.
3/5यह किस्म की खेती सर्द तापमान वाले इलाकों में की जा सकती है. इस किस्म की खेती यूपी, हरियाणा, पंजाब, बिहार, असम, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में की जाती है. इस किस्म से किसान 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आलू का उत्पादन पा सकते हैं.
4/5आलू चिप्सोना वैरायटी को सबसे कम शुगर वाला आलू माना जाता है. चिप्सोना-1, चिप्सोना-3 आलू की उन्नत किस्में हैं. प्रोसेस वैरायटी माने जाने वाले इस आलू में सीआईपीसी दवा का छिड़काव रामबाण साबित हो सकता है. इस दवा के छिड़काव के कारण आलू में कार्बोहाइड्रेट से स्टार्च में तब्दील होने की प्रक्रिया लगभग रुक जाती है. इस वजह से इस आलू को शुगर फ्री आलू की श्रेणी में रखा जाता है, इस वैरायटी के चिप्स सबसे अच्छे बनते हैं. यह वैरायटी 110 से 120 दिन में तैयार हो जाती है.
5/5कम लागत पर अधिक उपज के लिए खाद या उर्वरक का उपयोग करने के बजाए अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों से बुाई किसान कर सकते हैं. कुफरी पुखराज, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी अशोका, कुफरी जवाहर किस्में किसानों को काफी पंसद आती है. मध्यम अवधि की किस्मों में कुफरी बहार, कुफरी लालिमा, कुफरी सतलज, कुफरी सदाबहार, पुखराज, चिप्सोना-1 और चिप्सोना-2 की बिजाई कर अच्छी आमदनी ले सकते हैं. इसके अलावा किसान सनतना किस्म की भी बिजाई कर रहे हैं, यह नई किस्म है.