Bihar Mango: आम उत्पादन में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में से एक है. आम की बात करें तो बिहार के आम बहुत खास हैं - न सिर्फ़ स्वाद में, बल्कि पहचान में भी! बिहार भारत में आम उत्पादन में तीसरे स्थान पर है. यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि स्वाद, सुगंध और परंपरा की कहानी है. भागलपुर का जर्दालु आम को GI टैग मिला है. आप बताएं आपके यहां कौन सा आम खास है?
1/12बिहार का भागलपुर जिला जर्दालू आम के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. इसकी सुनहरी पीली त्वचा, अनूठी खुशबू और रसीला स्वाद इसे खास बनाते हैं. जर्दालू आम को भौगोलिक संकेत (GI) टैग भी मिला है, जिससे इसकी पहचान और प्रतिष्ठा और बढ़ गई है.
2/12चंपारण, खासकर पश्चिम चंपारण और उससे सटे पूर्वी चंपारण के इलाकों में उगने वाला जर्दा आम अपनी अनोखी खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इसकी अनूठी खुशबू और स्वाद किसी अन्य आम में नहीं मिलता - यही इसकी खासियत है। यह कच्चा होने पर भी मीठा होता है. चंपारण की मिट्टी ही जर्दा आम को यह अनूठापन देती है, जिसे कहीं और उगाना मुश्किल है.
3/12भागलपुर और मिथिलांचल क्षेत्र का गुलाबखास आम अपनी गुलाबी आभा और मनमोहक खुशबू के लिए प्रसिद्ध है. इसका नाम ही इसकी खासियत बयान करता है - गुलाब जैसी महक और खास स्वाद. पूरी तरह पकने पर अत्यधिक मीठा होता है. इसका गूदा मुलायम, रेशारहित और स्वाद में अत्यंत मीठा होता है.
4/12बिहार के सीतामढ़ी, चंपारण और मिथिलांचल क्षेत्र की शान, बंबइया आम अपनी तीव्र सुगंध और रेशे रहित गूदे के लिए प्रसिद्ध है. यह जल्दी पकने वाली किस्म है, जिसकी खासियत है कि पकने पर भी इसका अधिकांश हिस्सा हरा रहता है पर डंठल के पास पीलापन लिए रहता है. मध्यम आकार और मध्यम मिठास वाला यह आम पूरे देश में लोकप्रिय है. इसे चंपारण में 'सब्जा' या 'सबुजा' भी कहते हैं.
5/12पटना के दीघा का दूधिया मालदा आमों का शहंशाह है. दूध सा मलाईदार स्वाद, पतला छिलका और भरपूर रसीला गूदा इसकी पहचान है. अपनी अनोखी मिठास और सुगंध के लिए बिहार की यह किस्म दुनिया भर में मशहूर है.
6/12बिहार का सिंदूरिया आम अपने नाम की तरह ही खूबसूरत लाल रंगत लिए होता है. भागलपुर, मिथिलांचल और आसपास के क्षेत्रों में उगने वाली यह किस्म अपनी मिठास और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है. यह दुर्लभ किस्म विलुप्ति के कगार पर है. हाल ही में एक किसान ने इसी आम से प्रेरित होकर 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) नाम की नई किस्म भी विकसित की है.
7/12इसका गूदा मुलायम, मीठा और कम रेशेदार होता है. यह किस्म मुख्यतः कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया , खगड़िया, वैशाली और समस्तीपुर जिलों में उगाई जाती है. पर अब विलुप्त होने के कगार पर है. बिहार सरकार और कृषि विश्वविद्यालय इसे बचाने के लिए प्रयासरत हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसका स्वाद ले सकें.
8/12सीपिया आम बिहार के समस्तीपुर और मिथिलांचल क्षेत्र की खास पहचान है. इसका आकार शंख (सीप) की तरह होता है और स्वाद में यह बेहद मीठा और रसीला है. अगस्त में, रक्षाबंधन के समय, जब बाकी आम खत्म हो जाते हैं, तब सीपिया अपनी प्राकृतिक मिठास और सुगंध से आम प्रेमियों का दिल जीत लेता है. दुर्भाग्य से यह किस्म विलुप्त होने के कगार पर है.
9/12बिहार के बक्सर जिले का चौसा आम इतिहास और स्वाद दोनों में अनूठा है. शेरशाह सूरी की विजय के बाद नामित यह आम जुलाई के अंत तक बाजार में आता है. इसका सुनहरा पीला रंग, रेशारहित गूदा और अतुलनीय मिठास इसे विशेष बनाते हैं. अन्य जिलों जैसे कि गोपालगंज में भी इसकी खेती बढ़ रही है.
10/12बिहार के पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जिलों में उगने वाला सुरजापुरी आम अपने अनूठे स्वाद और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है. इस क्षेत्र की विशेष मिट्टी और जलवायु इसे खास बनाती है. सुरजापुरी आम का नाम इसी भाषाई क्षेत्र से आया है जो पूर्णिया डिवीजन की पहचान है. छोटी गुठली और मध्यम आकार के इस आम की मिठास काफी पसंद की जाती है.
11/12उत्तरी बिहार के जिलों में उगने वाला कृष्णभोग आम अपने गोल आकार और मधुर स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इसे किशनभोग के नाम से भी जाना जाता है और यह गर्मियों के मध्य तक बाज़ार में उपलब्ध रहता है. इसका मीठा स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता इसे बिहार के खास आमों में शामिल करती है. इस आम की खासियत इसका रसीला गूदा और कम रेशा है.
12/12बिहार में आम्रपाली (अमरपाली) आम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कई जिलों के किसान इस किस्म की व्यावसायिक खेती से लाखों की कमाई कर रहे हैं. यह हाइब्रिड (संकर या मिश्रित) वैरायटी दशहरी और नीलम का मिश्रण है जिसमें बीटा कैरोटीन की मात्रा अन्य आमों से अधिक होती है. इसकी गुच्छेदार फलन और नियमित उत्पादन इसे विशेष बनाते हैं.