Agri Business Idea: बरसात के मौसम में सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं. बरसात में अधिकतर भू-भाग जलमन्न रहता है. ऐसे में खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए जलीय सब्जियां ही एक अच्छा विकल्प होती हैं. इसमें पानी पालकर यानी कलमी शाक (Water Spinach) प्रमुख है. लागत न के बराबर और मुनाफा इतना की किसानों की आय दोगुनी करने में पानी पालक कारगर साबित होगी.
1/7पानी पालक के पौधे के सभी भाग खाने योग्य होते हैं. यह आमतौर पर जलभराव वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है. हालांकि, इस तरह की खेती के लिए पौधों की सुरक्षा के उपायों और कटाई के लिए जटिल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है. यह मानव स्वास्थ्य के लिए, हानिकारक जल प्रदूषकों को भी आमंत्रित करता है.
2/7इसलिए, ICAR-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा जल पालक की उच्च भूमि में वैज्ञानिक खेती के लिए प्रयास किया गया और उसके आशाजनक परिणाम मिले हैं. हालांकि, तकनीक आसान है और इसकी साल भर खेती की जा सकती है जो उत्पादक के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए वरदान साबित हो सकती है.
3/7पानी पालक, आमतौर पर एक खाद्य फसल के रूप में उपयोग किया जाता है. पानी पालक की पत्तियां खनिज, विटामिन का एक अच्छा स्रोत है और इसे खाद्य प्रोटीन का भी संभावित स्रोत माना जाता है. इसमें कई औषधीय गुण भी होते हैं.
4/7पानी पालक फाइबर से भरपूर होता है और पाचन में सहायक होता है. आयरन से भरपूर होने के कारण, यह एनीमिया से पीड़ित लोगों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है, जिन्हें अपने आहार में आयरन की जरूरत होती है.
5/7उच्च जल पालक के कई कलम हैं, जिससे इसे पूरे साल उगाए जा सकते हैं, इसे ऊपरी क्षेत्र में उगाया जाता है, अब इसके उत्पादन के लिए जलीय स्थिति की जरूरी नहीं है. यह उत्पाद जल प्रदूषकों से मुक्त होता है, प्रौद्योगिकी "सुरक्षित बायोमास" का वादा करती है, इसे बीज और वनस्पति दोनों तरीकों से उगाया जा सकता है. इस प्रकार, पानी पालक 'काशी मनु' की खेती को उत्पादकों के बीच लोकप्रिय बनाना उनके सामाजिक आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है.
6/7ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के कई किसानों ने व्यावसायिक आधार पर इस पानी पालक फसल की खेती की है, और इसमें पत्तेदार बायोमास 90-100 टन / हेक्टेयर की खेती की औसत लागत ₹1,40,000 से ₹1,50,000 हेक्टेयर है. इस पत्तेदार बायोमास का औसत बाजार मूल्य 15-20 रुपये प्रति किग्रा के बीच होता है और आय 12,00,000 से लेकर 15,00,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक होती है.
7/7इसके अलावा, यह फसल हरे चारे और भोजन के लिए भी उपयुक्त है, साथ ही जैविक प्रति प्राकृतिक खेती के लिए एक संभावित खाद्य फसल भी है.