नैनो फर्टिलाइजर पर सरकार का एक्शन बिना टेस्ट और रिसर्च के बाजार में नहीं आएंगे नए प्रोडक्ट,किसानों की सुरक्षा और फसल उत्पादकता बढ़ाने पर रहेगा फोकस

केंद्र सरकार ने नैनो उर्वरकों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं. अब कंपनियों को लॉन्च से पहले सुरक्षा परीक्षण, मल्टी-लोकेशन ट्रायल और NABL लैब रिपोर्ट जमा करनी होगी, ताकि किसानों की सुरक्षा और उर्वरकों की क्वालिटी सुनिश्चित की जा सके.
नैनो फर्टिलाइजर पर सरकार का एक्शन बिना टेस्ट और रिसर्च के बाजार में नहीं आएंगे नए प्रोडक्ट,किसानों की सुरक्षा और फसल उत्पादकता बढ़ाने पर रहेगा फोकस

केंद्र सरकार ने नैनो उर्वरकों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं. अब कंपनियों को लॉन्च से पहले सुरक्षा परीक्षण, मल्टी-लोकेशन ट्रायल और NABL लैब रिपोर्ट जमा करनी होगी, ताकि किसानों की सुरक्षा और उर्वरकों की क्वालिटी सुनिश्चित की जा सके.

केंद्र सरकार ने नैनो उर्वरकों (Nano Fertilisers) के उत्पादन, बिक्री और उपयोग को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है. अब इन उर्वरकों को मार्केट में लॉन्च करना पहले जितना आसान नहीं होगा.असल में सरकार ने नए रूल लागू करते हुए कहा है कि किसी भी नैनो उर्वरक को बेचने से पहले उसकी सुरक्षा, प्रभाव और क्वालिटी से जुड़ा पूरा डेटा देना जरूरी होगा.

दरअसल यह फैसला उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियंत्रण आदेश 1985 में संशोधन करके लिया गया है. नया संशोधन आदेश 2026 में लागू किया गया है और इसका मकसद किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कृषि में इस्तेमाल होने वाले नैनो उत्पादों की क्वालिटी को नियंत्रित करना है.

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नैनो उर्वरक लॉन्च करने से पहले अब कड़े परीक्षण

  • सरकार ने साफ किया है कि अब कोई भी कंपनी सीधे नैनो उर्वरक बाजार में नहीं उतार सकेगी.
  • निर्माताओं को पहले Bio-toxicity और सुरक्षा से जुड़ा डेटा जमा करना होगा.
  • यह डेटा GLP (Good Laboratory Practices) या NABL मान्यता प्राप्त लैब से प्रमाणित होना चाहिए.
  • इसका उद्देश्य यह तय करना है कि नैनो उर्वरक किसानों, मिट्टी और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों.agri

कैसे अनुमति की वैधता अब 3 साल नहीं, सिर्फ 2 साल

  • नए नियमों के तहत नैनो उर्वरकों को मिलने वाली शुरुआती अनुमति की अवधि घटा दी गई है.
  • पहले जहां यह अनुमति 3 साल तक वैध रहती थी, अब इसे घटाकर 2 साल कर दिया गया है.
  • इन दो साल के अंदर कंपनियों को अपने उत्पाद के प्रभाव और परिणामों का डिटेल्ड डेटा जमा करना होगा.
  • गर ऐसा नहीं किया गया, तो अनुमति स्वतः समाप्त हो सकती है.

मल्टी-लोकेशन ट्रायल अब अनिवार्य

  • सरकार ने यह भी तय किया है कि किसी भी नैनो उर्वरक को मंजूरी देने से पहले multi-location trials किए जाएंगे.
  • रूल्स के अनुसार कम से कम 10 फसलों पर परीक्षण
  • दो अलग-अलग मौसमों में परीक्षण
  • तीन अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में परीक्षण
  • ये परीक्षण ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) या राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की निगरानी में किए जाएंगे.

2 साल बाद फिर करनी होगी नई मंजूरी के लिए अप्लाई

  • नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंपनी नैनो उर्वरक बाजार में बनाए रखना चाहती है तो उसे 2 साल के भीतर 5 साल की आगे की अधिसूचना के लिए आवेदन करना होगा.
  • अगर कंपनी ऐसा नहीं करती, तो उस उत्पाद की परमीशन समाप्त मानी जाएगी और उसे बाजार में बेचने की अनुमति नहीं रहेगी.

हर बैच की जांच होगी NABL लैब से

  • सरकार ने क्वालिटी को लेकर भी सख्त नियम लागू किए हैं.
  • अब नैनो उर्वरक का हर बैच NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में टेस्ट किया जाएगा.
  • कंपनियों को यह टेस्ट रिपोर्ट सरकार को जमा करनी होगी, तभी उस बैच को मार्केट में भेजा जा सकेगा.

पैकेट पर चेतावनी और उपयोग गाइड जरूरी

नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने उत्पाद के पैकेट पर सुरक्षा से जुड़ी चेतावनियां भी छापनी होंगी.
इसके साथ एक अलग Package of Practice भी देना होगा, जिसमें किसानों को बताया जाएगा कि नैनो उर्वरक का सही इस्तेमाल कैसे करना है. इसमें यह भी बताया जाएगा कि 75% सामान्य उर्वरक,25% नैनो उर्वरक का संतुलित उपयोग फसल के हिसाब से कैसे किया जाए.

किसानों को ट्रेनिंग देना भी जरूरी

  • सरकार ने यह भी कहा है कि नैनो उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को किसानों को सुरक्षित उपयोग की ट्रेनिंग देना जरूरी होगा.
  • इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान इन उर्वरकों का सही मात्रा और सही तरीके से उपयोग कर सकें.

अधिसूचना कंपनी नहीं, उत्पाद के आधार पर

नए नियमों की एक और खास बात यह है कि अब अधिसूचना कंपनी के आधार पर नहीं बल्कि उत्पाद के आधार पर जारी होगी. यानी कि किसी कंपनी के दूसरे उत्पाद को मंजूरी तभी मिलेगी जब वह अलग से सभी परीक्षण और प्रक्रियाएं पूरी कर सकेगा.

ICAR की रिसर्च के आधार पर आगे का फैसला

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों को आगे मंजूरी देने का फैसला ICAR की रिसर्च और वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा. अगर शोध में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो ही उत्पाद को लंबे समय तक बाजार में रहने की अनुमति दी जाएगी.

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क्यों जरूरी हुए ये नए नियम

  • विशेषज्ञों का मानना है कि नैनो तकनीक कृषि में नई संभावनाएं खोल रही है.
  • नैनो उर्वरक कम मात्रा में भी ज्यादा असर दिखा सकते हैं और इससे उर्वरक की लागत कम हो सकती है
  • मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और उत्पादन बढ़ सकता है
  • लेकिन बिना पर्याप्त परीक्षण के इनका इस्तेमाल जोखिम भरा भी हो सकता है, इसलिए सरकार ने सख्त नियम लागू किए हैं.

कम शब्दों में समझें पूरी खबर

केंद्र सरकार ने नैनो उर्वरकों को लेकर बड़े और सख्त रूल लागू किए हैं.तो अब बिना वैज्ञानिक परीक्षण, सुरक्षा डेटा और मल्टी-लोकेशन ट्रायल के कोई भी नैनो उर्वरक बाजार में नहीं आ सकेगा. इसका मकसद किसानों की सुरक्षा और कृषि उत्पादन को बेहतर बनाना है.

FAQs

1. नैनो उर्वरकों पर नए नियम क्यों लागू किए गए हैं?
सरकार ने किसानों की सुरक्षा, उर्वरकों की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए नैनो उर्वरकों के उत्पादन और बिक्री पर सख्त नियम लागू किए हैं

2. नैनो उर्वरक लॉन्च करने से पहले कंपनियों को क्या करना होगा?
कंपनियों को GLP या NABL मान्यता प्राप्त लैब से bio-toxicity और सुरक्षा डेटा जमा करना होगा और मल्टी-लोकेशन ट्रायल रिपोर्ट देनी होगी

3. शुरुआती अनुमति की वैधता कितनी होगी?
पहले यह 3 साल थी, लेकिन नए नियमों के तहत अब शुरुआती अनुमति सिर्फ 2 साल के लिए मान्य होगी

4. नैनो उर्वरकों के लिए कौन-कौन से परीक्षण जरूरी होंगे?
कम से कम 10 फसलों पर, 2 मौसमों में और 3 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में ICAR या राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की निगरानी में परीक्षण करना होगा

5. क्या किसानों को भी प्रशिक्षण देना होगा?
हाँ, कंपनियों को किसानों को नैनो उर्वरकों के सुरक्षित और सही उपयोग के लिए प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा

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