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Mobile Processing Unit: महाराष्ट्र के किसानों के लिए बड़ी खबर है. सार्वजनिक क्षेत्र का महाराष्ट्र कृषि उद्योग विकास निगम (MIDC) किसानों की कुछ फसलों के अतिरिक्त उत्पादन का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए मोबाइल प्रोसेसिंग यूनिट्स (Mobile Processing Unit) खरीदने की योजना बना रहा. इससे किसानों की इन फसलों एक से डेढ़ साल तक के अतिरिक्त समय तक खराब होने से बचाया जा सकेगा.
बाजार में अधिक आपूर्ति के कारण किसान अपनी उपज, विशेष रूप से जल्दी खराब होने वाली उपज, औने-पौने दामों पर बेचने या उन्हें फेंकने पर भी मजबूर हो जाते हैं. निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगेश गोंडावले ने कहा कि एमएआईडीसी की इस पहल का उद्देश्य उत्पादकों को अच्छा फायदा सुनिश्चित करना है.
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अधिकारी ने कहा कि वे दो मशीनें खरीदेंगे और उन्हें अगले मानसून सत्र तक पायलट आधार पर दो जिलों में तैनात करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रत्येक मशीन 16-18 उत्पादों का प्रसंस्करण कर सकती है और इसे क्षेत्र के आधार पर ढाला जा सकता है.
प्रोसेसिंग में धुलाई, छीलना, सुखाना, काटना, टुकड़े करना और द्रवीकरण शामिल है. उदाहरण के लिए, टमाटर को प्यूरी में बदला जा सकता है, जबकि प्याज को लंबे समय तक भंडारण के लिए सुखाया जा सकता है.
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अधिकारी ने कहा, कभी-कभी, किसी क्षेत्र में किसी फसल का कुल उत्पादन अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में किसानों को नुकसान न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हम दो पोर्टेबल प्रोसेसिंग यूनिट्स शुरू करेंगे.
उन्होंने कहा कि इन मशीनों को सीधे खेतों में ले जाया जा सकता है, जिससे किसानों का परिवहन खर्च बचेगा.
गोंडावले ने कहा, प्रत्येक इकाई प्रतिदिन 150-200 टन उपज का प्रोसेस्ड कर सकती है और विशेष पैकेजिंग के लिए सुसज्जित है जिससे फसल की ‘शेल्फ लाइफ’ 12-18 महीने तक बढ़ जाती है.
Q1. पोर्टेबल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है?
Ans: यह एक मोबाइल मशीन या वाहन है जो खेत या गांव के पास जाकर फसलों की प्रोसेसिंग (जैसे काटना, सुखाना, पैकेजिंग आदि) कर सकता है. इसे ट्रक, वैन, या ट्रेलर पर लगाया जाता है.
Q2. इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
Ans: किसानों की अतिरिक्त या जल्दी खराब होने वाली फसल का वैल्यू एडिशन कर के उसे बर्बाद होने से बचाना और बाजार के लिए तैयार करना.
Q3. किन फसलों की प्रोसेसिंग इसमें की जा सकती है?
Ans: फल-सब्ज़िया, अनाज, मसाले, और कई अन्य जल्दी खराब होने वाली उपज.
Q4. किसानों को क्या होगा फायदा?
Ans: खेत पर ही फसल का प्रोसेसिंग और पैकिंग संभव, बिचौलियों पर निर्भरता कम, मुनाफा बढ़ता है क्योंकि उत्पाद वैल्यू एडेड होकर बिकता है और प्रति यूनिट लागत कम होती है.