4 नहीं अब रोज 40 लीटर दूध मिलेगा! दोगुनी नहीं.. कई गुना बढ़ेगी किसानों की कमाई, किया जा रहा गिर गायों का एम्ब्रियो ट्रांसफर

भारत के डेयरी उद्योग में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है. बरेली की कंपनी लीड्स जेनेटिक्स (बीएल एग्रो की सहायक कंपनी) ने देश में पहली बार बड़े पैमाने पर गिर गायों का एम्ब्रियो ट्रांसफर (भ्रूण स्थानांतरण) सफलतापूर्वक किया है. इस तकनीक की मदद से गायों की दूध देने की क्षमता को कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है. खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में ब्राजील के वैज्ञानिकों का भी साथ मिला है और पहले चरण में ही कंपनी को 70% की जबरदस्त सफलता मिली है.
4 नहीं अब रोज 40 लीटर दूध मिलेगा! दोगुनी नहीं.. कई गुना बढ़ेगी किसानों की कमाई, किया जा रहा गिर गायों का एम्ब्रियो ट्रांसफर

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तरह इंसानों में आईवीएफ (IVF) तकनीक से बच्चे होते हैं, वही तकनीक हमारी देसी गायों की किस्मत बदल सकती है? बरेली की कंपनी लीड्स जेनेटिक्स ने भारत में पहली बार बहुत बड़े लेवल पर 'गिर गाय' के भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer) का सफल परीक्षण किया है.

यह काम किसी सरकारी संस्था ने नहीं, बल्कि एक निजी कंपनी ने कर दिखाया है. आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे हमारे किसान भाइयों को क्या फायदा होगा.

क्या है यह पूरी तकनीक?

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इस तकनीक को 'भ्रूण स्थानांतरण' या एम्ब्रियो ट्रांसफर कहते हैं. इसमें सबसे अच्छी नस्ल की गाय (जैसे गिर या साहीवाल) के एग्स यानी अंडों को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और फिर उन भ्रूणों को दूसरी सामान्य गायों में डाल दिया जाता है. इससे एक बेहतरीन नस्ल वाली गाय, जो साल में एक ही बछड़ा दे सकती थी, अब इस तकनीक के जरिए कई बछड़ों की "जैविक मां" बन सकती है. इससे अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती है.

ivf

70% सफलता: एक बड़ा रिकॉर्ड

प्रोजेक्ट के पहले चरण में, जो दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था, लीड्स जेनेटिक्स ने 116 गायों में आईवीएफ किया. उन्हें 70% की सफलता दर मिली, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. अब दूसरे चरण में 160 गायों (गिर, साहीवाल और एचएफ क्रॉस) में भ्रूण ट्रांसफर किया गया है. कंपनी के अनुसार भारत में आज तक इतने बड़े पैमाने पर निजी स्तर पर ऐसा प्रयास नहीं हुआ था.

दूध उत्पादन में करीब 10 गुना उछाल

बीएल एग्रो के एमडी आशीष खंडेलवाल का कहना है कि यह भारतीय डेयरी के लिए एक "निर्णायक मोड़" है. इस तकनीक से पैदा होने वाली गाय रोजाना करीब 40 लीटर तक दूध देंगी. बता दें कि अभी एक औसत गाय दिन में करीब 4 लीटर ही दूध दे पाती है. यानी दूध में सीधे 10 गुना का उछाल देखने को मिल सकता है.

ashish khandelwal

जब गाय ज्यादा दूध देगी, तो किसान की आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. इससे किसानों की आय सिर्फ दोगुनी नहीं होगी, बल्कि कई गुना तक बढ़ेगी. ये गायें न केवल ज्यादा दूध देंगी, बल्कि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) भी बहुत ज्यादा होगी.

भारत और ब्राजील का अनोखा साथ

इस पूरे कमाल के पीछे केवल भारतीय वैज्ञानिक नहीं, बल्कि ब्राजील का भी बड़ा हाथ है.

त्रिपक्षीय समझौता: लीड्स जेनेटिक्स ने ब्राजील की सरकारी संस्था 'एम्ब्रापा' (Embrapa) और फजेन्डा फ्लोरेस्टा के साथ हाथ मिलाया है.

खास बात: यह पहली बार है जब ब्राजील की एम्ब्रापा ने भारत की किसी प्राइवेट कंपनी के साथ ऐसा समझौता (MOU) किया है. ब्राजील के वैज्ञानिक खुद बरेली आकर इस तकनीक में मदद कर रहे हैं.

बीएल एग्रो और लीड्स जेनेटिक्स के बारे में

शायद आप 'बैल कोल्हू' तेल या 'नरिश' (Nourish) ब्रांड के बारे में जानते होंगे, ये बीएल एग्रो के ही ब्रांड हैं.

लीड्स जेनेटिक्स: यह बीएल एग्रो की ही एक विंग है जिसका काम है- ऐसी नस्लें तैयार करना जो जलवायु परिवर्तन को सह सकें और जिनमें बीमारियां न हों.

लीड्स कनेक्ट: यह डेटा और रिस्क मैनेजमेंट का काम देखती है, ताकि खेती-किसानी को स्मार्ट बनाया जा सके.

Conclusion

बरेली में शुरू हुआ यह प्रयोग आने वाले समय में पूरे भारत की तस्वीर बदल सकता है. जब हमारे पास ऐसी 'देसी सुपर गायें' होंगी जो भारी मात्रा में दूध देंगी, तो भारत दुनिया का नंबर-1 डेयरी लीडर बनकर उभरेगा. यह तकनीक न केवल विज्ञान की जीत है, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है.

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