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देश के किसानों के लिए राहत लेकर आई है आलू की नई उन्नत किस्म 'कुफरी गंगा' (Kufri Ganga). भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) के तहत विकसित की गई यह किस्म न केवल कम समय में तैयार होती है बल्कि पारंपरिक किस्मों की तुलना में ज्यादा उत्पादन देती है.
'कुफरी गंगा' किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी फसल अवधि केवल 75 से 80 दिन है. यानी किसान इसे जल्दी तैयार करके दूसरी फसलों की बुवाई के लिए खेत खाली कर सकते हैं. यह खासियत इसे अंतरफसली खेती और तीन फसल प्रणाली के लिए बेहतर बनाती है.
इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जो कि पारंपरिक किस्मों की तुलना में 15–20% ज्यादा है. इसकी कंद गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है- आकार समान, छिलका चिकना और रंग आकर्षक होता है, जो इसे बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में सहायक है.
'कुफरी गंगा' विशेष रूप से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए उपयुक्त मानी गई है. उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के किसान इसे आसानी से अपना सकते हैं. इस किस्म को हल्की दोमट से लेकर मध्यम दोमट मिट्टी में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है.
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कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह किस्म सामान्य रोगों जैसे झुलसा और स्कैब के प्रति ज्यादा सहनशील है. इसके अलावा इसे अन्य किस्मों की तुलना में कम सिंचाई की जरूरत होती है, जिससे जल की बचत होती है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 'कुफरी गंगा' जैसी किस्में किसानों के लिए कम लागत, अधिक मुनाफे का रास्ता खोल सकती हैं. कम अवधि और ज्यादा पैदावार के कारण यह किस्म विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभकारी है जो सीमित भूमि या सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन चाहते हैं.
यह किस्म कम समय में अधिक पैदावार देने वाली है
प्रति हेक्टेयर उत्पादन- 250 से 300 क्विंटल
फसल अवधि- 75 से 80 दिन
खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्र- उत्तर भारत के मैदानी इलाके
| फसल अवधि | मात्र 75 से 80 दिन |
| प्रति हेक्टेयर उत्पादन | 250 से 300 क्विंटल |
| उपयुक्त क्षेत्र | उत्तर भारत के मैदानी इलाके |
| फायदे | कम समय में अधिक उपज, जिससे किसानों को खेत जल्दी खाली कर अगली फसल लेने का मौका मिलता है |
Q1. 'कुफरी गंगा' आलू की किस्म की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
इसकी सबसे बड़ी खासियत कम समय में ज्यादा पैदावार देना है. यह मात्र 75 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है.
Q2. 'कुफरी गंगा' से प्रति हेक्टेयर कितना उत्पादन मिल सकता है?
इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक का बंपर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
Q3. यह किस्म कितने दिनों में पककर तैयार हो जाती है?
'कुफरी गंगा' की फसल की अवधि काफी कम है, यह सिर्फ 75 से 80 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है.
Q4. यह आलू की किस्म भारत के किन क्षेत्रों में खेती के लिए सबसे उपयुक्त है?
यह मुख्य रूप से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में खेती के लिए उपयुक्त है.
Q5. किसानों को इस किस्म की खेती से क्या लाभ होगा?
कम अवधि में तैयार होने के कारण, किसानों को आलू की कटाई के बाद अगली फसल की बुआई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है.
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