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kirshi Yantrikaran Yojana: छोटे किसानों के पास कृषि यंत्र नहीं होने के कारण उन्हें खेती में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. हर किसान के लिए कृषि यंत्र खरीदना एक बड़ी चुनौती है. ऐसे में बिहार सरकार ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए राज्य में वर्ष 2025-26 में 267 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना करेगी.
खेती-बाड़ी में किसानों को कृषि मशीनों यंत्रों का फायदा दिलाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना कई गई है. इसके लिए किसानों को खेती में काम आने वाली जरूरी मशीनें जैसे ट्रेक्टर-ट्रॉली, रेटावेटर, कल्टीवेटर, सीडड्रिल, ट्रेक्टर स्प्रेपम्प और थ्रेसर जैसे कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं. किसान इनका उपयोग कर वापिस जमा कर सकते हैं.
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फसल अवशेष प्रबंधन के लिए फ्लेक्सी फंड से ₹1454.50 लाख की लागत से 15 जिलों में स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएं. 120 स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जाएंगे. सभी SCHC में फसल प्रबंधन के लिए कम से कम 3 मशीनें लगाना अनिवार्य होगा
इसके तहत बिहार के 15 जिलों में शामिल हैं-


Q1. कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) क्या होता है?
Ans: कस्टम हायरिंग सेंटर एक ऐसा केंद्र होता है जहां किसानों को खेती के लिए जरूरी आधुनिक कृषि यंत्र जैसे ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, थ्रेशर, स्प्रे पंप आदि किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं.
Q2. बिहार सरकार इस योजना के तहत क्या कर रही है?
Ans: बिहार सरकार वर्ष 2025-26 में 267 कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना करेगी। इस पर कुल 1078.750 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर मिल सकेंगे.
Q3. कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
Ans: प्रत्येक 10 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर 40% (अधिकतम ₹4 लाख) तक का अनुदान मिलेगा.
Q4. स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर (SCHC) क्या है?
Ans: स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर (SCHC) का उद्देश्य फसल अवशेष प्रबंधन है. इसके तहत बिहार के 15 जिलों में 120 SCHC बनाए जाएंगे, जिसमें कम से कम 3 फसल प्रबंधन मशीनें होनी जरूरी होंगी.
Q5. SCHC किन जिलों में खोले जाएंगे?
Ans: ये 15 जिले हैं- रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, नालंदा, पटना, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, लखीसराय, शेखपुरा, अररिया, गया, नवादा, जहानाबाद.