धान की सीधी बिजाई करें किसान! सरकार देगी ₹4500 प्रति एकड़ अनुदान, जानिए इसके क्या हैं फायदे

Paddy DSR: धान की सीधी बिजाई अपनाने वाले किसानों को सरकारी सहायता का फायदा लेने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है. राज्य सरकार ने इसके लिए पोर्टल खोल दिया है.
धान की सीधी बिजाई करें किसान! सरकार देगी ₹4500 प्रति एकड़ अनुदान, जानिए इसके क्या हैं फायदे

 (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)

Paddy DSR: किसान जून महीने से खरीफ धान की बुवाई शुरू करेंगे. धान की खेती में पानी की खपत ज्यादा होती है. गिरते भूजल स्तर को थामने के लिए हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए 'धान की सीधी बिजाई योजना' (Direct Seeding of Rice - DSR) को महेंद्रगढ़ को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में लागू कर दिया है. राज्य सरकार इस तकनीक से धान की बुवाई करने वाले किसानों को सब्सिडी (Subsidy) दे रही है.

धान की सीधी बिजाई अपनाने वाले किसानों को सरकारी सहायता का फायदा लेने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है. राज्य सरकार ने इसके लिए पोर्टल खोल दिया है. 15 जून तक अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. रजिस्ट्रेशन के बाद विभाग की टीमें खेतों का फिजिकल वेरिफिकेशन करेगा.

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DSR (Direct Seeded Rice) तकनीक क्या है?

DSR यानी Direct Seeded Rice को धान की सीधी बिजाई कहा जाता है. इस तकनीक में धान की नर्सरी तैयार कर रोपाई करने के बजाय बीज को सीधे खेत में मशीन या ड्रिल के जरिए बोया जाता है.

पारंपरिक तरीके में धान की पौध तैयार करने, खेत में पानी भरने और मजदूरों से रोपाई कराने की जरूरत होती है, जबकि DSR में यह प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती. इसी वजह से यह तकनीक पानी, समय और लागत बचाने में मदद करती है.

DSR विधि के फायदे क्या है?

  • धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक अपनाने से किसानों को पर्यावरण और जेब दोनों के स्तर पर बड़े फायदे होते हैं.

भूजल और पानी की भारी बचत

  • पारंपरिक रोपाई में धान के खेतों को शुरुआती कई हफ्तों तक पानी से लबालब भरकर रखना पड़ता है, जिससे बहुत ज्यादा पानी बर्बाद होता है. डीएसआर विधि में कद्दू नहीं करना पड़ता, जिससे लगभग 15% से 20% तक पानी की बचत होती है. गिरते भूजल स्तर को सुधारने में यह तकनीक गेम-चेंजर है.

लागत में बड़ी कमी

  • नर्सरी उखाड़ने और फिर पूरे खेत में हाथ से रोपाई करने के लिए भारी संख्या में मजदूरों की जरूरत होती है. सीधी बिजाई मशीन से होने के कारण लेबर का खर्च न के बराबर हो जाता है.
  • इसके अलावा, खेत को बार-बार जोतने में लगने वाला डीजल और समय बच जाता है. साथ ही रेंट पर लिए गए ट्रैक्टर का खर्च भी बचता है.
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कम मेहनत और समय की बचत

  • इस विधि में किसान को नर्सरी तैयार करने और उसकी देखरेख की झंझट से मुक्ति मिल जाती है. मशीन से बुवाई होने के कारण पूरा खेत बहुत कम समय में तैयार हो जाता है.

मिट्टी की सेहत में सुधार

  • पारंपरिक विधि में कद्दू करने से मिट्टी की ऊपरी परत सख्त हो जाती है, जिससे अगली फसल की जड़ों के विकास पर बुरा असर पड़ता है. सीधी बिजाई करने से मिट्टी की बनावट खराब नहीं होती और अगली फसल की पैदावार भी अच्छी होती है.

कितनी मिलेगी सब्सिडी?

हरियाणा सरकार DSR तकनीक को अपनाने वाले किसानों को ₹4500 प्रति एकड़ का अनुदान दे रही है. इसके लिए 15 जून 2026 तक 'मेरी फसल, मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है.

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किसानों के लिए जरूरी सलाह

DSR विधि में खेत में शुरुआत में पानी जमा नहीं रहता, इसलिए खरपतवार उगने की संभावना ज्यादा होती है. इसके लिए बुवाई के तुरंत बाद उचित खरपतवार नाशक का स्प्रे जरूर करना चाहिए.

DSR अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • खेत समतल होना चाहिए
  • खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है
  • सही समय पर सिंचाई और पोषक तत्व प्रबंधन जरूरी है
  • प्रमाणित बीज और उचित मशीन का उपयोग करना चाहिए

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 पारंपरिक रोपाई के मुकाबले DSR विधि के क्या फायदे हैं?

इसमें 15% से 20% तक पानी की बचत होती है.

Q2 DSR तकनीक से पानी की बचत कैसे होती है?

इस तकनीक में खेत में लगातार पानी भरकर रखने की जरूरत कम पड़ती है, जिससे सिंचाई में कम पानी लगता है.

Q3 DSR तकनीक से किसानों को क्या फायदा होगा?

इससे पानी, समय और मजदूरी की बचत होती है. खेती की लागत कम होती है.

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