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(प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
Paddy DSR: किसान जून महीने से खरीफ धान की बुवाई शुरू करेंगे. धान की खेती में पानी की खपत ज्यादा होती है. गिरते भूजल स्तर को थामने के लिए हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए 'धान की सीधी बिजाई योजना' (Direct Seeding of Rice - DSR) को महेंद्रगढ़ को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में लागू कर दिया है. राज्य सरकार इस तकनीक से धान की बुवाई करने वाले किसानों को सब्सिडी (Subsidy) दे रही है.
धान की सीधी बिजाई अपनाने वाले किसानों को सरकारी सहायता का फायदा लेने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है. राज्य सरकार ने इसके लिए पोर्टल खोल दिया है. 15 जून तक अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. रजिस्ट्रेशन के बाद विभाग की टीमें खेतों का फिजिकल वेरिफिकेशन करेगा.
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DSR यानी Direct Seeded Rice को धान की सीधी बिजाई कहा जाता है. इस तकनीक में धान की नर्सरी तैयार कर रोपाई करने के बजाय बीज को सीधे खेत में मशीन या ड्रिल के जरिए बोया जाता है.
पारंपरिक तरीके में धान की पौध तैयार करने, खेत में पानी भरने और मजदूरों से रोपाई कराने की जरूरत होती है, जबकि DSR में यह प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती. इसी वजह से यह तकनीक पानी, समय और लागत बचाने में मदद करती है.
भूजल और पानी की भारी बचत
लागत में बड़ी कमी
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कम मेहनत और समय की बचत
मिट्टी की सेहत में सुधार
हरियाणा सरकार DSR तकनीक को अपनाने वाले किसानों को ₹4500 प्रति एकड़ का अनुदान दे रही है. इसके लिए 15 जून 2026 तक 'मेरी फसल, मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है.

DSR विधि में खेत में शुरुआत में पानी जमा नहीं रहता, इसलिए खरपतवार उगने की संभावना ज्यादा होती है. इसके लिए बुवाई के तुरंत बाद उचित खरपतवार नाशक का स्प्रे जरूर करना चाहिए.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 पारंपरिक रोपाई के मुकाबले DSR विधि के क्या फायदे हैं?
इसमें 15% से 20% तक पानी की बचत होती है.
Q2 DSR तकनीक से पानी की बचत कैसे होती है?
इस तकनीक में खेत में लगातार पानी भरकर रखने की जरूरत कम पड़ती है, जिससे सिंचाई में कम पानी लगता है.
Q3 DSR तकनीक से किसानों को क्या फायदा होगा?
इससे पानी, समय और मजदूरी की बचत होती है. खेती की लागत कम होती है.