जूट किसानों की बल्ले-बल्ले! मोदी सरकार ने MSP में की ₹275 की भारी बढ़ोतरी, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट पर सख्त आदेश

केंद्र सरकार ने कच्चे जूट पर सख्त स्टॉक लिमिट लागू करते हुए MSP में 275 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है.अब नया MSP 5,925 रुपये तय किया गया है.तो इस फैसले से जमाखोरी पर रोक लगेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है.
जूट किसानों की बल्ले-बल्ले! मोदी सरकार ने MSP में की ₹275 की भारी बढ़ोतरी, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट पर सख्त आदेश

कच्चे जूट के बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने एक साथ दो बड़े फैसले लेकर जूट सेक्टर को सख्त संदेश भी दिया है और किसानों को राहत भी.असल में एक ओर जहां कच्चे जूट पर स्टॉक लिमिट घटाकर जमाखोरी पर लगाम कसने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी ओर विपणन सत्र 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 275 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर किसानों की इनकम बढ़ाने का कदम उठाया गया है.

सवाल: कितना रखेंगे कच्चा जूट और क्या होगी सीमा?

  • सबसे पहले स्टॉक लिमिट की बात करें तो अब पंजीकृत बेलर अधिकतम 600 क्विंटल तक ही कच्चा जूट रख सकेंगे.
  • वैसे बाकी स्टॉकिस्ट के लिए यह सीमा सिर्फ 5 क्विंटल तय की गई है.
  • जूट मिलों को उनकी 45 दिन की खपत के बराबर ही स्टॉक रखने की परमीशन होगी.
  • तय लिमिट से ज्यादा जूट रखने वालों को 10 दिन के भीतर एक्स्ट्रा स्टॉक बेचने का निर्देश दिया गया है.
  • यह बिक्री 21 मार्च 2026 तक डिलीवर करनी होगी.
  • इतना ही नहीं, एक्स्ट्रा स्टॉक रखने वालों पर नई खरीद पर भी रोक रहेगी.
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आपको बता दें कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित इकाइयों को जूट स्मार्ट पोर्टल पर हर 15 दिन में स्टॉक की रिपोर्ट देना जरूरी कर दिया गया है.वैसे माना तो ये जा रहा है कि इससे कृत्रिम कमी बनाकर कीमत बढ़ाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल पाएंगे.

सवाल: किसान के लिए क्या होगी MPS?

किसानों के लिए राहत भरी खबर यह है कि सरकार ने टीडी-3 ग्रेड के कच्चे जूट का MSP बढ़ाकर 5,925 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में लिया गया है. आपको बता दें कि पिछले सीजन के मुकाबले यह 275 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी है.

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वैसे सरकार के मुताबिक, नया MSP औसत उत्पादन लागत से करीब 61.8 प्रतिशत अधिक है, यानी किसानों को लागत से काफी ऊपर लाभ सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है.असल में यह डिसीजन उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत MSP को उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना रखने का टारगेट तय किया गया था.

क्या कहते हैं पहले के आंकड़े?

अगर पिछले एक दशक का आंकड़ा देखें तो 2014-15 में कच्चे जूट का MSP 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 5,925 रुपये हो गया है.साफ है कि लगभग ढाई गुना से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है. इस दौरान जूट किसानों को MSP के जरिए बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया है, जिससे उनकी आय में स्थिरता लाने की कोशिश की गई.

भारत है दुनिया का कच्चा जूट उत्पादक देश

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा जूट उत्पादक देश है.
  • पश्चिम बंगाल, बिहार और असम प्रमुख उत्पादक राज्य हैं.
  • dनमें पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है.
  • मूल्य समर्थन अभियान को लागू करने की जिम्मेदारी भारतीय जूट निगम (JCI) निभाएगा.
  • अगर खरीद प्रक्रिया में कोई घाटा होता है तो उसकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी.

कम शब्दों में समझें पूरी बात

विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त स्टॉक नियंत्रण और बढ़े हुए MSP का यह संयुक्त कदम बाजार को संतुलित करने में मदद करेगा.
जहां कंपनियों को अब पारदर्शिता और सीमित स्टॉक के साथ काम करना होगा, वहीं किसानों को बेहतर कीमत और आय सुरक्षा मिलने की उम्मीद है.तो कुल मिलाकर, यह फैसला जूट सेक्टर में स्थिरता और विश्वास बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

FAQs

1. नया MSP कितना तय हुआ है?
टीडी-3 ग्रेड जूट का MSP 5,925 रुपये प्रति क्विंटल

2. MSP में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
पिछले सीजन से 275 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा

3. स्टॉक लिमिट क्या तय की गई है?
बेलर-600 क्विंटल, अन्य स्टॉकिस्ट-5 क्विंटल, मिलें-45 दिन की खपत

4. अतिरिक्त स्टॉक पर क्या नियम है?
10 दिन में बेचना अनिवार्य, नई खरीद पर रोक

5. MSP लागू कौन करेगा?
भारतीय जूट निगम (JCI) खरीद प्रक्रिया संभालेगा

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