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(Image- AI)
Basmati Rice Export: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से भारतीय राइस एक्सपोर्ट्स की मुसीबत बढ़ गई है. ईरान संकट की वजह से भारतीय बासमती चावल निर्यातकों को भारी लॉजिस्टिक्स और भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जहाज कैंसिल हो रहे हैं, कंटेनर की कमी है और मालभाड़ा व बीमा की लागत बढ़ गई है. इस संकट से निपटने के लिए चावल निर्यातकों ने सरकार से तुरंत राहत के उपाय की मांग की है. इसमें बंदरगाह से जुड़े प्रभार में छूट और भुगतान समायोजन की मांग भी शामिल है.
चावल निर्यातकों ने बंदरगाह से जुड़े चार्जेज (स्टोरेज/डेमरेज और दूसरे शुल्क) में छूट मांगी है, जहां जहाज रद्द होने की वजह से कार्गो वापस हो जाता है. ऐसे में ट्रांजिट में कार्गो को वापस करने, राह बदलने करने की सुविधा के साथ दस्तावेजीकरण और भुगतान समायोजन के लिए सीमा शुल्क और रिजर्व बैंक (RBI) की मदद की मांग की गई है.
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इसके अलावा, उन्होंने सरकार से एक सरकारी परामर्श जारी करने का आग्रह किया है जिसमें इस रुकावट को एक अपरिहार्य स्थिति की घटना के रूप में मान्यता दी जाए ताकि गलत तरीके से जुर्माने को रोका जा सके और कोविड-19 की राहत की तरह ही अस्थायी वर्किंग कैपिटल लिमिट और लोन विस्तार के जरिए तात्कालिक बैंकिंग मदद दी जाए.
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ ने कहा कि ये कदम जरूरी हैं क्योंकि ईरान संकट और खास समुद्री रास्तों पर बढ़ती अस्थिरता के बाद निर्यातकों को खेप और लॉजिस्टिक्स में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इसने कहा कि निर्यातकों को कंटेनर की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और वे पश्चिम एशिया के लिए जहाजों के आने-जाने पर रोक/रद्द होने और लागत में तेज़ बढ़ोतरी की शिकायत कर रहे हैं.
| Country | Qty (MT) | Amt (Rs Cr) | Avg Rate (INR/MT) | USD (M) | Avg Rate (USD/MT) |
|---|---|---|---|---|---|
| Saudi Arabia | 7,66,382.00 | 5,992.30 | 78,189.45 | 687.26 | 896.75 |
| Iran | 6,81,436.00 | 4,639.17 | 68,079.38 | 533.51 | 782.92 |
| Iraq | 5,69,374.00 | 4,147.92 | 72,850.62 | 476.15 | 836.26 |
| UAE | 3,18,655.00 | 2,406.34 | 75,515.37 | 274.85 | 862.52 |
| Yemen | 3,00,032.00 | 2,153.46 | 71,774.28 | 245.43 | 818.00 |
अंतरराष्ट्रीय मालवहन में लगभग 15-20% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि खाड़ी देशों के लिए युद्ध जोखिम प्रभार और बीमा प्रीमियम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. बंकर फ्यूल की कीमतें भी बढ़ी हैं. समुद्री जहाज ईंधन तेल लगभग 520 डॉलर से बढ़कर लगभग 700 डॉलर हो गया है, जिससे कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाली प्राप्तियों पर और असर पड़ा है.
पश्चिम एशिया के लिए कंटेनर नहीं मिल रहे हैं, और दूसरी जगहों के लिए भी कमी है.
सवाल: मिडिल ईस्ट के तनाव से भारतीय चावल निर्यातकों को क्या नुकसान हो रहा है?
जवाब: लागत में बढ़ोतरी, लॉजिस्टिक्स की कमी और कीमतों में गिरावट.
सवाल: शिपिंग लागत में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
जवाब: शिपिंग कॉस्ट में 15-20% की बढ़ोतरी हुई है.
सवाल: क्या इस संकट का असर भारत में चावल की कीमतों पर पड़ेगा?
जवाब: हां. निर्यात में रुकावट आने के कारण घरेलू मंडियों में चावल का स्टॉक बढ़ रहा है, जिससे पिछले 72 घंटों में बासमती की कीमतों में 7-10% की कमी आई है.
सवाल: निर्यातक बैंकिंग क्षेत्र से क्या उम्मीद कर रहे हैं?
जवाब: निर्यातक चाहते हैं कि सरकार कोविड-19 के दौरान दी गई पैकेज की तरह राहत मिले.
सवाल: ईरान भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
जवाब: ईरान भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है.
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