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मंहगाई को मात देने का सरकारी मास्टर प्लान. (Image Source-AI)
आम आदमी की रसोई और उसकी थाली का बजट सीधा दालों की कीमतों से जुड़ा होता है. जब भी दाल के दाम बढ़ते हैं, तो घर का पूरा बजट गड़बड़ा जाता है. इसी चिंता को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत ही बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है. सरकार ने पीली मटर (Yellow Peas) और उड़द दाल के इंपोर्ट यानी आयात की समय-सीमा को एक पूरे साल के लिए आगे बढ़ा दिया है.
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से जारी ताजा जानकारी के मुताबिक, अब व्यापारी 31 मार्च 2027 तक इन दालों को बिना किसी बड़ी रुकावट के भारत मंगा सकेंगे. सरकार का यह कदम साफ तौर पर खाने-पीने की चीजों की महंगाई यानी फूड इन्फ्लेशन को काबू में रखने की एक बड़ी कोशिश है. चलिए समझते हैं कि इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी क्या है और इससे आपकी थाली पर क्या असर पड़ने वाला है.
पीली मटर को लेकर सरकार ने इस बार काफी नरमी दिखाई है. सबसे बड़ी राहत यह है कि इसके इंपोर्ट पर लगने वाले मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (MIP) की शर्त को हटा दिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब व्यापारी ग्लोबल मार्केट से पीली मटर को कॉम्पिटिटिव यानी सस्ती कीमतों पर खरीद सकेंगे.
इतना ही नहीं, पोर्ट रिस्ट्रिक्शन यानी बंदरगाहों की पाबंदी को भी हटा दिया गया है. अब किसी भी पोर्ट के जरिए पीली मटर की खेप भारत लाई जा सकती है. यह छूट उन सभी खेपों पर लागू होगी जिनका 'बिल ऑफ लैडिंग' 31 मार्च 2027 को या उससे पहले जारी किया गया होगा. बस व्यापारियों को इंपोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इससे बाजार में पीली मटर की सप्लाई बढ़ेगी और घरेलू कीमतें कंट्रोल में रहेंगी.
पीली मटर के साथ-साथ सरकार ने उड़द दाल (Black Gram) के लिए भी अपनी 'फ्री इंपोर्ट' पॉलिसी को एक साल के लिए एक्सटेंड कर दिया है. पहले यह सुविधा मार्च 2026 तक के लिए थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है.
उड़द दाल भारतीय घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दालों में से एक है. चाहे रोज की दाल हो या इडली-डोसा जैसा नाश्ता, उड़द की जरूरत हर जगह पड़ती है. सरकार के इस फैसले से बाजार में उड़द की कमी नहीं होगी और इसकी कीमतों में अचानक आने वाले उछाल पर लगाम लगेगी.
सरकार का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब दुनिया भर में सप्लाई चेन की दिक्कतें और मांग-आपूर्ति के बीच का अंतर दालों की कीमतों पर दबाव बना रहा है. इस कदम के पीछे सरकार के तीन बड़े मकसद साफ नजर आ रहे हैं:
व्यापारियों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है क्योंकि उन्हें अब पॉलिसी की स्पष्टता मिल गई है. समय-सीमा बढ़ने से वे अब बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे. वहीं, रिटेल मार्केट में इसका असर कुछ समय बाद दिखने लगेगा. पीली मटर से MIP हटने का सीधा मतलब है कि विदेशों से आने वाला माल सस्ता होगा. जब सस्ता माल बाजार में आएगा, तो घरेलू उत्पादकों और जमाखोरों पर भी कीमतें कम करने का दबाव बनेगा.
Q. सरकार ने पीली मटर और उड़द के इंपोर्ट की समय-सीमा कब तक बढ़ाई है?
सरकार ने इन दोनों दालों के इंपोर्ट की समय-सीमा को एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया है.
Q. पीली मटर के इंपोर्ट में कौन सी बड़ी शर्तें हटाई गई हैं?
पीली मटर के लिए मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (MIP) की शर्त हटा दी गई है और इसके इंपोर्ट पर अब कोई पोर्ट रिस्ट्रिक्शन (बंदरगाह पाबंदी) नहीं रहेगी.
Q. इस फैसले का आम उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?
इससे घरेलू बाजार में दालों की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे दालों की खुदरा कीमतों में कमी आने की उम्मीद है और रसोई का बजट संतुलित रहेगा.
Q. क्या इंपोर्ट के लिए किसी रजिस्ट्रेशन की जरूरत होगी?
हां, व्यापारियों को इंपोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा.
Q. क्या उड़द दाल की पॉलिसी में भी बदलाव हुआ है?
हां, उड़द दाल के लिए 'फ्री इंपोर्ट' की सुविधा जो मार्च 2026 तक थी, उसे भी अब बढ़ाकर मार्च 2027 तक कर दिया गया है.