आपकी थाली, खेत और गाड़ी… सब विदेशों पर निर्भर? जानिए भारत कितना सुरक्षित है और क्यों बढ़ रही चिंता

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है. खाने का तेल हो, कच्चा तेल हो, गैस हो या फिर खाद का कच्चा माल- इन सबके लिए देश भारी मात्रा में इंपोर्ट पर निर्भर है. यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचने से भारत की चिंता भी बढ़ गई है. 
आपकी थाली, खेत और गाड़ी… सब विदेशों पर निर्भर? जानिए भारत कितना सुरक्षित है और क्यों बढ़ रही चिंता

विदेशों से आने वाले तेल, गैस और खाद से भारत का खर्च बढ़ रहा है? (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)

अगर आपको लगता है कि रसोई में इस्तेमाल होने वाला तेल, खेतों में डाली जाने वाली खाद या गाड़ी में भरने वाला पेट्रोल-डीजल सिर्फ बाजार की चीजें हैं, तो असल कहानी इससे कहीं बड़ी है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है. खाने का तेल हो, कच्चा तेल हो, गैस हो या फिर खाद का कच्चा माल- इन सबके लिए देश भारी मात्रा में इंपोर्ट पर निर्भर है. यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचने से भारत की चिंता भी बढ़ गई है.

सवाल यह है कि अगर सप्लाई रुक गई तो क्या होगा? क्या देश के पास पर्याप्त स्टॉक है? और आखिर सरकार लोगों से खाने का तेल, पेट्रोल-डीजल और खाद का कम इस्तेमाल करने की अपील क्यों कर रही है? आसान भाषा में समझिए आपकी रसोई, खेती और जेब से जुड़ी पूरी जानकारी.

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आखिर PM मोदी ने खाने का तेल कम इस्तेमाल करने की अपील क्यों की?

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लोगों से कहा कि अगर हर परिवार खाने के तेल का इस्तेमाल 10% कम कर दे, किसान खाद और लोग पेट्रोल-डीजल की खपत कम कर दें, तो यह देश की बड़ी सेवा होगी. यह सिर्फ सलाह नहीं थी. इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा गणित छिपा है.

क्यों?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है-

  • खाने का तेल
  • कच्चा तेल
  • गैस
  • खाद का कच्चा माल,

यानी जितना ज्यादा आयात करेंगे, उतना ज्यादा डॉलर बाहर जाएगा.

आपकी रसोई का तेल आखिर कहां से आता है?

भारत दुनिया के सबसे बड़े खाने के तेल के इम्पोर्टरों में शामिल है. भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है. भारत को सालाना 27 मिलियन टन खाद्य तेल की जरूरत होती है. देश में सिर्फ 11 मिलियन टन तेल ही बन पाता हैं, जबकि बाकी 16 मिलियन टन विदेशों से आयात करना पड़ता है.

कौन-कौन से तेल बाहर से आते हैं?

भारत, पाम ऑयल के लिए इंडोनेशिया और मलेशिया, सूरजमुखी तेल के लिए यूक्रेन व रूस और सोयाबीन तेल के लिए अर्जेंटीना व ब्राजील पर निर्भर हैं.

क्यों ये रखता है मायने?

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, भारत ने खाद्य तेल के आयात पर 19.5 अरब डॉलर खर्च किए. यह पैसा विदेशी मुद्रा पर दबाव डालता है, व्यापार घाटा बढ़ाता है और रुपये को कमजोर कर सकता है.

आपकी रसोई का तेल क्रूड ऑयल से कैसे जुड़ा है?

यह सबसे दिलचस्प कनेक्शन है. अमेरिका और इंडोनेशिया जैसे देश वनस्पति तेल से बायोडीजल बनाते हैं. जब कच्चा तेल महंगा होता है तो-

  • बायोडीजल की मांग बढ़ती है
  • वेजिटेबल ऑयल की कीमत बढ़ जाती है
  • भारत का इम्पोर्ट बिल और बढ़ जाता है

खाद के लिए भारत किन देशों पर निर्भर है?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता है और तीसरा बड़ा उत्पादक है. हालांकि यूरिया में देश 87% आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन अन्य खादों के लिए स्थिति अलग है. सरकार का कहना है कि देश में फिलहाल खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

भारत को कितनी खाद चाहिए?

खरीफ सीजन का अनुमान

  • कुल जरूरत- 3.9 करोड़ टन
  • मौजूदा स्टॉक- 1.8 करोड़ टन

आयात के मुद्दे पर सरकार ने बताया कि चीन से डीएपी के आयात की वर्षवार मात्रा 2023-24 में 22.28 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 8.47 लाख मीट्रिक टन रही.

इन व्यवस्थाओं के तहत सऊदी अरब से प्रतिवर्ष 31 लाख टन, रूस से 30.10 लाख टन और मोरक्को से 25 लाख टन उर्वरक आपूर्ति की व्यवस्था की गई है, जिससे 2025-26 के दौरान भारत की उर्वरक सप्लाई चेन और मजबूत होने की उम्मीद है.

भारत खुद कितना खाद बनाता है?

यूरिया में भारत मजबूत हो रहा है. लेकिन पोटाश की 100% जरूरत आयात से पूरी होती है. भारत अब रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, जॉर्डन, कनाडा और मिस्र जैसे देशों से खाद मंगा रहा है.

डीएपी (DAP) बनाने के लिए जरूरी रॉक फॉस्फेट मोरक्को और जॉर्डन से आता है, जबकि अमोनिया और गैस कतर व रूस से मंगाई जाती है.

वर्तमान स्थिति

  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 36 यूरिया, 20 DAP/NP/NPK और 100 SSP प्लांट हैं. यूरिया की कुल स्थापित क्षमता 31.3 लाख मीट्रिक टन, DAP/NP/NPK की 16.2 लाख मीट्रिक टन और SSP की 12.8 लाख मीट्रिक टन है.

खरीफ के आगामी सीजन में किसानों को फर्टीलाइजर संकट का सामना न करने पड़े, इसके लिए सरकार ने रिकॉर्ड 13.5 लाख टन डाईअमोनियम फॉस्‍फेट (DAP) का टेंडर जारी किया है.

खाद बनाने में गैस का क्या रोल है?

खाद बनाने में गैस का बड़ा योगदान है. DAP और Urea बनाने के लिए एलएनजी, अमोनिया और फॉस्फोरिक एसिड की जरूर पड़ती है. भारत अपनी करीब 50 फीसदी LNG जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी करता है. यानी अगर गैस महंगी होगी तो-

  • खाद महंगा,
  • खेती महंगी
  • और अनाज महंगा होगा

ऐसे में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि जरूरत से ज्यादा केमिकल फर्टिलाइजर खेत को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अब समय नेचुरल फार्मिंग, स्वदेशी खाद और सोलर आधारित खेती की ओर बढ़ने का है. इससे खाद का आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी.

क्या भारत के पास ऑयल इमर्जेंसी से निपटने का प्लान है?

हां, भारत में ऑयल इमर्जेंसी से निपटने के लिए स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व मौजूद हैं. भारत ने बड़े अंडरग्राउंड ऑयल स्टोरेज बनाए हैं. भारत के पास 5.3 मिलियन मीट्रिक टन स्ट्रैटेजिक ऑयल का स्टॉक है. ये स्ट्रैटिजक रिजर्व विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में स्थित हैं.

इन स्ट्रैटेजिक गुफाओं और ऑयल कंपनियों के स्टॉक को मिलाकर भारत के पास कुल 74 दिनों का कवरेज मौजूद है. इसके अलावा, भारत के पास 60 दिनों की नेचुरल गैस और 45 दिनों की LPG का रोलिंग स्टॉक सुरक्षित है.

भारत रोज कितना तेल इस्तेमाल करता है?

सरकारी आंकड़े के मुताबिक, भारत को हर दिन 5.5 से 6 मिलियन बैरल कच्चे तेल चाहिए और 88.7% जरूरत इम्पोर्ट से पूरी होती है.

भारत तेल कहां-कहां से खरीदता है?

पहले भारत मिडिल ईस्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर था. प्रमुख सप्लायर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत थे. लेकिन अब भारत 41 देशों से तेल आयात कर रहा है. इसमें रूस भी शामिल है

सेक्टरआयात पर निर्भर
कच्चा तेल89%
खाने का तेल60%
पोटाश100%
LNGबड़ा हिस्सा इम्पोर्ट

सरकार ने सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए क्या किया?

सरकार ने एनर्जी सोर्स डाइवर्सिफिकेशन किया, रूस से सस्ता तेल खरीदा, स्ट्रैटेजिक रिजर्व बढ़ाया, फर्टिलाइजर इम्पोर्ट डील साइड किया.

क्या अभी देश में तेल-गैस की कमी है?

सरकार का दावा है कि भारत के पास 60 दिन का क्रूड ऑयल स्टॉक, 60 दिन का नेचुरल गैस रिजर्व और 45 दिन की LPG मौजूद है.

₹100 खर्च करने पर क्या मिल रहा है?

जब आप बाजार में ₹100 खर्च करते हैं, तो वह पैसा सिर्फ सामान के लिए नहीं होता. उसका एक बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा को प्रभावित करता है.

  • खाने का तेल: आपकी रसोई के ₹100 के तेल में से लगभग ₹60 से ₹65 विदेशों को चले जाते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 60-65% तेल आयात करता है. पिछले साल भारत ने इस पर 19.5 अरब डॉलर खर्च किए.
  • पेट्रोल-डीजल: फ्यूल के ₹100 में से लगभग ₹88 का भुगतान कच्चे तेल के आयात के लिए डॉलर में किया जाता है. भारत अपनी जरूरत का 88.7% तेल विदेशों से मंगाता है.
  • फर्टिलाइज़र: खाद पर खर्च होने वाले हर ₹100 में सरकार की भारी सब्सिडी होती है. हालांकि यूरिया भारत खुद बना रहा है, लेकिन पोटाश और डीएपी के कच्चे माल के लिए आपके ₹100 का एक बड़ा हिस्सा मोरक्को, रूस और जॉर्डन जैसे देशों को जाता है.

निष्कर्ष

आंकड़े बताते हैं कि भारत आर्थिक और रणनीतिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित है. जहां दुनिया के कई देश आपातकालीन कदम उठा रहे हैं, वहीं भारत के पास पर्याप्त तेल, गैस और खाद का स्टॉक है. हालांकि, लंबी अवधि में आत्मनिर्भरता और जैविक खेती को बढ़ावा देना ही एकमात्र स्थायी समाधान है.

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