दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, नीति आयोग ने तैयार किया रोडमैप, दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए हाइब्रिड किस्में जरूरी

Mission for Atmanirbharta in Pulses: रिपोर्ट में दलहन उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, और घरेलू आपूर्ति 2030 तक 30.59 मीट्रिक टन और 2047 तक 45.79 मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है.
दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, नीति आयोग ने तैयार किया रोडमैप, दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए हाइब्रिड किस्में जरूरी

Mission for Atmanirbharta in Pulses.

Mission for Atmanirbharta in Pulses: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक और उपभोक्ता है. इसलिए, खाद्य सुरक्षा, पोषण और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से दलहन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यही वजह है कि भारत 'दलहन में आत्‍मनिर्भरता के लिए मिशन' चला रहा है, जिसे हासिल करने के लिए नीतिगत स्‍तर पर तेजी से लगातार काम चल रहा है. इसी कड़ी में नीति आयोग (Niti Aayog) ने दलहन उत्‍पादन को लेकर रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट का नाम है- रिपोर्ट का नाम है - 'आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर दलहनों के विकास में तेजी लाने की रणनीतियां और मार्ग'.

80% उत्पादन वर्षा आधारित क्षेत्रों पर निर्भर

यह रिपोर्ट भारत के दलहन क्षेत्र के विकास और कायाकल्प में तेजी लाने के लिए विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करती है. दलहन क्षेत्र लगभग 80% उत्पादन वर्षा आधारित क्षेत्रों पर निर्भर है और 5 करोड़ से अधिक किसानों और उनके परिवारों की आजीविका को बनाए रखता है. यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है.

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दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन की घोषणा

2015-16 में उत्पादन में 16.35 मिलियन टन की गिरावट के बाद 6 मिलियन टन आयात की जररूत पड़ी. इसके बाद भारत सरकार के ठोस हस्तक्षेपों ने उल्लेखनीय प्रगति को प्रेरित किया. 2022-23 तक, उत्पादन 59.4% बढ़कर 26.06 मीट्रिक टन हो गया, साथ ही उत्पादकता में 38% की बढ़ोतरी हुई, जिससे आयात पर निर्भरता 29% से घटकर 10.4% रह गई. इस गति को आगे बढ़ाते हुए, केंद्रीय बजट 2025-26 में "दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन" (Mission for Atmanirbharta in Pulses) की घोषणा की गई है. यह मिशन इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को और मज़बूत करने के लिए अरहर (Pigeonpea), काला चना (Black gram) और मसूर (Lentil ) पर केंद्रित छह-वर्षीय पहल है.

आयात पर निर्भरता कम करने पर फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियां खरीफ, रबी और ग्रीष्म ऋतुओं में 12 दलहनी फसलों की खेती के लिए अनुकूल हैं. उत्पादन क्षेत्रीय रूप से केंद्रित है, जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान का योगदान लगभग 55% है, और शीर्ष दस राज्य राष्ट्रीय उत्पादन में 91% से अधिक का योगदान करते हैं. आयात पर निर्भरता कम करने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और दलहन में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए इन कमियों को दूर करना अत्यंत जरूरी है.

घरेलू आपूर्ति 2030 तक 30.59 मीट्रिक टन पहुंचने का अनुमान

यह रिपोर्ट देश के दलहन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और इसकी भविष्य की संभावनाओं का व्यापक रूप से पता लगाती है, जिसमें उपभोग पैटर्न का विस्तृत विश्लेषण भी शामिल है. रिपोर्ट में दलहन उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, और घरेलू आपूर्ति 2030 तक 30.59 मीट्रिक टन और 2047 तक 45.79 मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है.

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संकर किस्में और बेहतर बीज को लाना महत्वपूर्ण

कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार ने पिछले बजट में की गई घोषणा के अनुसार अगले चार वर्षों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अतिरिक्त दालों- विशेष रूप से अरहर, उड़द और मसूर की खरीद का आश्वासन दिया है, लेकिन उच्च उपज वाली किस्में विकसित करने के लिए शोध बढ़ाने की जरूरत है.

संकर किस्मों के विकास पर जोर

चतुर्वेदी ने कहा, दलहन एक ऐसी खाद्य फसल है जिसकी कोई संकर किस्में नहीं हैं. केवल खुले परागण वाली किस्में ही सरकार या स्वयं किसानों द्वारा उत्पादित की जाती हैं. संकर किस्मों के विकास पर आईसीएआर (ICAR) संगठनों और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा व्यापक शोध किया जा रहा है. अगर यह संभव हो जाता है, तो हमारी उत्पादकता बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ जाएगी.

सचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दलहनों में किस्म प्रतिस्थापन दर संतोषजनक तो है, लेकिन बीज प्रतिस्थापन दर अभी भी पीछे है. उन्होंने कहा, एक किस्म विकसित की गई है, लेकिन यह सुनिश्चित करने में एक कमी है कि यह किसानों तक पहुंचे. राज्यों की इसमें बड़ी भूमिका है और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.

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30-40% तक नुकसान पहुंचा रहे खरपतवार

आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट ने उत्पादकता स्तर बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि रबी दलहनों के लिए कोई खर-पतवारनाशी अणु उपलब्ध नहीं है जिसका उपयोग उगने के बाद किया जा सके. उन्होंने कहा, खरपतवार 30-40% तक नुकसान पहुंचा रहे हैं. हमें इस पर शोध केंद्रित करने की जरूरत है.

2 करोड़ 52.3 लाख टन दाल उत्पादन का अनुमान

नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम और सदस्य रमेश चंद ने भी आने वाले वर्षों में दलहनों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया. फसल वर्ष 2024-25 (जुलाई-जून) में भारत का दाल उत्पादन 2 करोड़ 52.3 लाख टन होना अनुमानित है.

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