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मछली पालन गांवों में कमाई का बढ़िया जरिया है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Gemini)
Fish Farming: खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच अब ग्रामीण भारत में मछली पालन युवाओं के लिए नया 'ब्लू बिजनेस मॉडल' बनकर उभर रहा है. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक युवा ने सिर्फ 80 डिसमिल जमीन पर आधुनिक तकनीक से ऐसा एक्वा हब तैयार किया, जिसने न केवल उनकी जिंदगी बदल दी बल्कि गांव के 10 लोगों को भी रोजगार दे दिया. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बायोफ्लॉक (Biofloc) तकनीक के दम पर यह मॉडल अब छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बनता जा रहा है.
भारत में तेजी से बढ़ती प्रोटीन डिमांड, कम जमीन में ज्यादा उत्पादन और सरकारी सब्सिडी ने मछली पालन को गांवों का नया 'ब्लू बिजनेस' बना दिया है. पहले जहां खेती सिर्फ मौसम पर निर्भर थी, वहीं अब बायोफ्लॉक, RAS और केज कल्चर जैसी तकनीकों ने कम जगह में ज्यादा कमाई का रास्ता खोल दिया है.
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के केकराखोली गांव के पुरुषोत्तम राम मरकाम इसका बड़ा उदाहरण हैं. उन्होंने पारंपरिक तरीके छोड़कर वैज्ञानिक प्रशिक्षण लिया और आज 80 डिसमिल जमीन पर आधुनिक फिश फार्मिंग (Fish Farming) यूनिट चलाकर खुद भी आत्मनिर्भर बने और गांव के कई लोगों को रोजगार भी दिया.
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पुरुषोत्तम राम मरकाम ने शुरुआत पारंपरिक मछली पालन से की थी. लेकिन कम मुनाफे के कारण उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण लेने का फैसला किया. उन्होंने बड़ौदा आरसेटी से ट्रेनिंग ली, जहां उन्होंने सीखा-
इसके बाद उन्होंने पंगेसियस और रूपचंदा जैसी प्रजातियों का पालन शुरू किया और उत्पादन तेजी से बढ़ा.
| डीटेल | |
| जमीन | डिसमिल |
| सरकारी सहायता | ₹17 लाख |
| निजी निवेश | ₹8 लाख |
| उत्पादन | करीब 10 टन |
| बिक्री | 2 क्विंटल |
| आय | ₹40,000 |
| रोजगार | 8-10 ग्रामीण |
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) भारत सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य है-
इस योजना के तहत सरकार बायोफ्लॉक, RAS (Recirculatory Aquaculture System), केज कल्चर और फिश प्रोसेसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर सब्सिडी देती है.
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बायोफ्लॉक तकनीक
यह ऐसी तकनीक है जिसमें कम पानी में ज्यादा मछली उत्पादन किया जाता है.
फायदे:
RAS तकनीक
इस सिस्टम में पानी को फिल्टर कर दोबारा उपयोग किया जाता है.
फायदे:
अगर आपके पास कम जमीन है तो भी बड़ा बिजनेस शुरू हो सकता है.
मछली पालन शुरू करने के लिए-
कमाई कई बातों पर निर्भर करती है- तकनीक, प्रजाति, बाजार और फीड कॉस्ट. लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करने पर पारंपरिक खेती से कई गुना ज्यादा मुनाफा संभव है.
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अब पुरुषोत्तम सिर्फ मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहते. उनका अगला लक्ष्य- फिश फीड यूनिट लगाना, स्थानीय स्तर पर दाना उत्पादन, लागत कम करना और ज्यादा रोजगार पैदा करना है. यानी अब वह सिर्फ किसान नहीं, बल्कि ग्रामीण एग्री-बिजनेस मॉडल तैयार कर रहे हैं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या कम जमीन में मछली पालन संभव है?
हां, बायोफ्लॉक और RAS जैसी तकनीकों से कम जगह में भी उत्पादन संभव है.
Q2 क्या सरकार सब्सिडी देती है?
हां, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सब्सिडी और वित्तीय सहायता मिलती है.
Q3 शुरुआत में कितना निवेश चाहिए?
यह तकनीक पर निर्भर करता है.छोटे स्तर पर कुछ लाख रुपये से शुरुआत संभव है.
Q4 क्या ट्रेनिंग जरूरी है?
हां, वैज्ञानिक प्रशिक्षण लेने से सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है.