खेती नहीं ये है मुनाफे की मशीन!स्ट्रॉबेरी बड़े, लाल और रसदार फलों के लिए अपनाएं ये 5 धांसू सीक्रेट टिप्स, मार्केट में मिलेगा बंपर मुनाफा

स्ट्रॉबेरी की खेती में बड़ा मुनाफा चाहिए तो सही वैराइटी, बैलेंस खाद, ड्रिप सिंचाई और स्मार्ट देखभाल जरूरी होती है.असल में ये आसान सीक्रेट टिप्स फॉलो करके किसान पा सकते हैं बड़े, लाल, रसदार फल और शानदार मार्केट रेट.
खेती नहीं ये है मुनाफे की मशीन!स्ट्रॉबेरी बड़े, लाल और रसदार फलों के लिए अपनाएं ये 5 धांसू सीक्रेट टिप्स, मार्केट में मिलेगा बंपर मुनाफा

स्ट्रॉबेरी की खेती आज के टाइम में किसानों के लिए कम टाइम में तेजी से ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल बनती जा रही है. असल में मार्केट में अब इसकी मांग लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है, लेकिन अच्छी कीमत तभी मिलती है जब फल बड़े, गहरे लाल रंग के और रसदार हों.ऐसा अक्सर होता है कि किसान मेहनत तो पूरी करते हैं, लेकिन सही तकनीक और नॉलेज ना फॉलो करने की वजह से फल छोटे रह जाते हैं या उनका रंग और स्वाद कमजोर सा होता है.

असल में स्ट्रॉबेरी की खेती में केवल पानी और धूप काफी नहीं होती, बल्कि हर छोटे पहलू पर ध्यान देना जरूरी होता है. तो अगर आप भी चाहते हैं आपकी स्ट्रॉबेरी की फसल में लाल और बढ़िया फल आएं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें.

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सही वैराइटी को चुनें

स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सबसे पहला और सबसे अहम कदम है सही वैराइटी को चुनना.वैसे तो हर इलाके की जलवायु अलग होती है और उसी के अनुसार ही वैराइटी को चुनना चाहिए. चैंडलर, कैमारोसा, स्वीट चार्ली और विंटर डॉन जैसी उन्नत किस्में बड़े आकार और बेहतर रंग के लिए काफी फेमस हैं.तो अगर वैराइटी सही होगी तो पौधा मजबूत बनेगा और फल का वजन भी अच्छा आएगा.तो इसलिए हमेशा नर्सरी से पौधे लेते समय उनकी क्वालिटी जरूर चेक करें.

मिट्टी की तैयारी करें

अच्छी फसल के लिए मिट्टी की तैयारी पर खास ध्यान सबसे जरूरी माना जाता है. असल में स्ट्रॉबेरी के लिए हल्की, भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पीएच 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए.हमेशा खेत की तैयारी करते समय सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती पोषण अच्छे से मिलता है. इससे जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधा तेजी से बढ़ता है.

खाद और पोषण

खाद और पोषण स्ट्रॉबेरी की खेती का सबसे बड़ा सीक्रेट माना जाता है. अच्छे फल के लिए 19:19:19 एनपीके घुलनशील खाद को 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर हर 10 से 15 दिन में ड्रिप या फोलियर स्प्रे के रूप में देना फायदेमंद रहता है.

स्ट्रॉबेरी के फूल आने से पहले पोटाश की मात्रा बढ़ाने से फल का आकार और वजन बहुत बेहतर होता है. इसके साथ ही कैल्शियम नाइट्रेट और बोरॉन का सही मात्रा में छिड़काव फल को चमकदार और एकसार बनाने में मदद करता है.

सिंचाई कैसे होगी

स्ट्रॉबेरी के लिए सिंचाई में बैलेंस बहुत जरूरी होता है.जी हां इसके पौधे को बहुत ज्यादा पानी देने से फल सड़ सकते हैं और कम पानी से फल छोटे रह जाते हैं.तो हमेशा फल बनने के टाइम पर रेगुलर और नियंत्रित सिंचाई करनी चाहिए.जी हां ड्रिप सिंचाई इस फसल के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे नमी बनी रहती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती है.

मल्चिंग भी जरूरी

अच्छे फल के लिए मल्चिंग भी एक जरूरी तकनीक है, पॉली मल्च या भूसे की मल्चिंग से मिट्टी का टेंपरेचर कंट्रोल रहता है, नमी लॉन्ग टाइम तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं.इसके साथ ही कीट और रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर फफूंदनाशक और कीटनाशक का संतुलित यूज करना चाहिए.

छोटे टिप्स हैं देंगे फल

वैसे अगर किसान ये छोली लेकिन जरूरी सभी बातें सही तरीके से फॉलो करते हैं, तो फिर स्ट्रॉबेरी के फल ना केवल देखने में आकर्षक होंगे बल्कि स्वाद और वजन में भी बेहतरीन निकल सकते हैं. ऐसे फलों की बाजार में मांग ज्यादा होती है और यही बंपर मुनाफे की असली कुंजी है.

खबर से जुड़े FAQs

1. स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए कौन-सी किस्म सबसे बेहतर है?
चैंडलर, कैमारोसा, स्वीट चार्ली और विंटर डॉन किस्में बड़े और आकर्षक फलों के लिए बेहतर मानी जाती हैं.

2. स्ट्रॉबेरी के लिए मिट्टी कैसी होनी चाहिए?
हल्की, भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी, जिसका पीएच 5.5 से 6.5 के बीच हो, सबसे उपयुक्त रहती है.

3. बड़े और भारी फल पाने के लिए कौन-सी खाद जरूरी है?
19:19:19 एनपीके के साथ पोटाश, कैल्शियम नाइट्रेट और बोरॉन का संतुलित इस्तेमाल फल का आकार और वजन बढ़ाता है.

4. स्ट्रॉबेरी में ड्रिप सिंचाई क्यों जरूरी है?
ड्रिप सिंचाई से मिट्टी में सही नमी बनी रहती है, फल सड़ने से बचते हैं और उत्पादन बेहतर होता है.

5. स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग का क्या फायदा है?
मल्चिंग से नमी बनी रहती है, खरपतवार कम होते हैं और पौधे स्वस्थ रहते हैं, जिससे क्वालिटी फल मिलते हैं.

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