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भारत में कृषि क्षेत्र लगातार नए बदलाव और विकास की ओर बढ़ रहा है. इसी कड़ी में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) ने ऑर्गेनिक फार्मिंग को मुख्यधारा की खेती का हिस्सा बना दिया है.सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल कृषि प्रथाओं को अपनाने का अवसर मिल रहा है.इस वर्ष जनवरी तक पीकेवीवाई के तहत कुल 2,265.86 करोड़ रुपए किसानों और कृषि योजनाओं के लिए जारी किए गए हैं.फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत इस योजना के लिए 205.46 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं.
असल में आंकड़े बताते हैं कि अब तक लगभग 15 लाख हेक्टेयर भूमि पर ऑर्गेनिक फार्मिंग की जा रही है और 52,289 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं. इस योजना का लाभ अब तक 25.30 लाख किसानों को मिल चुका है. 2023-24 में 1.26 लाख हेक्टेयर भूमि पर काम जारी रहा, जबकि 2024-25 में 1.98 लाख हेक्टेयर नई भूमि को तीन साल की कन्वर्जन अवधि में शामिल किया गया है.
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 2023-24 में 50,279 हेक्टेयर और पश्चिम बंगाल में 4,000 हेक्टेयर भूमि को लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के तहत शामिल किया गया. इसके अलावा, कार निकोबार और नानकॉरी आइलैंड में 14,491 हेक्टेयर भूमि को एलएसी (लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन) के तहत ऑर्गेनिक सर्टिफाइड किया गया. लक्षद्वीप में 2,700 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि अब ऑर्गेनिक सर्टिफाइड है.
सिक्किम राज्य इस मामले में विशेष उदाहरण है. लगभग 60,000 हेक्टेयर भूमि को एलएसी के तहत 96.39 लाख रुपए की सहायता दी गई, जिससे सिक्किम दुनिया का पहला 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक राज्य बन गया है.
पीकेवीवाई के तहत किसानों को 20-20 हेक्टेयर के समूहों में क्लस्टर अप्रोच के माध्यम से संगठित किया जाता है.इस मॉडल से किसानों को संसाधन साझा करने का मौका मिलता है, लागत कम होती है और सभी किसान समान ऑर्गेनिक मानकों को अपनाते हैं. तीन साल की अवधि में ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 31,500 रुपए की वित्तीय सहायता भी दी जाती है. यह सहायता उन्हें पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीके अपनाने और सस्टेनेबल उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है.
सरकारी पोर्टल 'जैविक खेती' के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक 6.23 लाख किसान, 19,016 स्थानीय समूह, 89 इनपुट सप्लायर और 8,676 खरीदार रजिस्टर्ड हो चुके हैं. यह डेटा दिखाता है कि पीकेवीवाई ने किसानों को न केवल तकनीकी सहायता दी है बल्कि उन्हें एक संगठित और मजबूत मंच भी प्रदान किया है.पिछले एक दशक में पीकेवीवाई ने भारत के ऑर्गेनिक फार्मिंग मूवमेंट की नींव रखी है. इसने किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती करने, जैविक प्रमाणन प्राप्त करने और उन्हें ऐसे बाजारों से जोड़ने का अवसर दिया जो सस्टेनेबल प्रोडक्शन को पुरस्कृत करते हैं.
योजना से जुड़े किसानों का कहना है कि इससे खेती अधिक लाभकारी, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो गई है.इससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है और किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलने लगा है.कुल मिलाकर, पीकेवीवाई भारत में ऑर्गेनिक फार्मिंग को मुख्यधारा की खेती में बदलने में सफल रही है. इसने लाखों किसानों को सशक्त बनाया है और उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों के साथ आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर दिया है.
5 FAQs
Q1-पीकेवीवाई क्या है?
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत में ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने और किसानों को सशक्त बनाने वाली सरकारी योजना है.
Q2-कितने किसानों को लाभ मिला है?
फरवरी 2024 तक लगभग 25.30 लाख किसानों को इस योजना का लाभ मिला है.
Q3-ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए कितनी भूमि शामिल है?
योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 15 लाख हेक्टेयर भूमि पर ऑर्गेनिक खेती हो रही है.
Q4-किसानों को आर्थिक सहायता कितनी मिलती है?
ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाने वाले किसानों को तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर 31,500 रुपए की सहायता दी जाती है.
Q5-क्लस्टर अप्रोच का क्या लाभ है?
इसमें किसानों को 20-20 हेक्टेयर समूहों में संगठित किया जाता है, जिससे संसाधन साझा होते हैं, लागत कम होती है और समान मानक सुनिश्चित होते हैं.
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