सरकार का बड़ा फैसला: 2025-26 में 1.5 मिलियन टन चीनी निर्यात की मंजूरी, मोलासिस पर ड्यूटी को भी किया खत्म

भारत सरकार ने 2025-26 शुगर सीजन (Sugar Season) के लिए 1.5 मिलियन टन (MT) चीनी निर्यात (Sugar Export) की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही मोलासिस (Molasses) पर लगने वाला 50% एक्सपोर्ट ड्यूटी (Export Duty) भी हटा दी गई है. सरकार का यह फैसला चीनी मिलों (Sugar Mills) को राहत देगा और गन्ना किसानों (Sugarcane Farmers) की आय बढ़ाने में मदद करेगा.
सरकार का बड़ा फैसला: 2025-26 में 1.5 मिलियन टन चीनी निर्यात की मंजूरी, मोलासिस पर ड्यूटी को भी किया खत्म

भारत सरकार ने देश के गन्ना किसानों और शुगर इंडस्ट्री के हित में एक अहम कदम उठाया है. केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने घोषणा की है कि सरकार ने 2025-26 शुगर सीजन के लिए 1.5 मिलियन टन (15 लाख टन) चीनी के निर्यात की अनुमति दे दी है.

इसके साथ ही सरकार ने मोलासिस (Molasses) पर लगाई गई 50% एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया है. यह फैसला चीनी क्षेत्र में जमा हो रहे अधिशेष स्टॉक को कम करने और किसानों के भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है.

कितना होगा चीनी का निर्यात?

केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को भेजे एक पत्र में दी. उन्होंने बताया कि इस बार सरकार ने 1.5 मिलियन टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है. हालांकि, शुगर इंडस्ट्री (Sugar Industry) ने सरकार से 2 मिलियन टन (20 लाख टन) तक निर्यात की मांग की थी, लेकिन सरकार ने फिलहाल 1.5 मिलियन टन पर मंजूरी दी है.

क्यों लिया गया यह फैसला?

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा (Sanjeev Chopra) ने बताया कि सरकार को यह फैसला अधिशेष स्टॉक (Surplus Stocks) को देखते हुए लेना पड़ा. उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में एथेनॉल उत्पादन (Ethanol Production) के लिए चीनी का अपेक्षित डाइवर्जन नहीं हुआ.

जहां सरकार ने 4.5 मिलियन टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन में उपयोग करने का लक्ष्य रखा था, वहीं सिर्फ 3.4 मिलियन टन का ही डाइवर्जन हो पाया. इसके चलते स्टॉक बढ़ गया और अब निर्यात की जरूरत पड़ी.

मिलों को मिलेगी राहत

देश की करीब 500 से अधिक शुगर मिलें (Sugar Mills) इस फैसले से राहत महसूस करेंगी. बढ़ते स्टॉक और घटती कीमतों के बीच मिलों के पास किसानों का बकाया भुगतान करने की क्षमता घट रही थी. सरकार का यह फैसला इन मिलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market) में बिक्री का मौका देगा. इससे उन्हें नकद प्रवाह मिलेगा और किसानों को समय पर भुगतान भी हो सकेगा.

किसानों के लिए बड़ी राहत

फूड मिनिस्ट्री का कहना है कि सरकार का यह कदम गन्ना किसानों के हित में है. चीनी मिलों को जैसे ही निर्यात से पैसा मिलेगा, वैसे ही वे किसानों के लंबित बकाया का भुगतान करने में सक्षम होंगी.

केंद्रीय मंत्री जोशी ने अपने पत्र में लिखा, “केंद्र सरकार हमेशा किसानों के हित में काम करती रही है. इस बार भी हमने सुनिश्चित किया है कि कोई भी किसान बकाया भुगतान के इंतजार में न रहे.”

मोलासिस ड्यूटी हटाने का असर

मोलासिस (Molasses), जो कि एथेनॉल उत्पादन (Ethanol Manufacturing) का प्रमुख घटक है, उस पर पहले 50% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई थी. अब सरकार ने इसे हटा दिया है, जिससे एथेनॉल इंडस्ट्री (Ethanol Industry) को भी फायदा मिलेगा. इससे न सिर्फ शुगर मिलों को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, बल्कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (Ethanol Blending Program) को भी गति मिलेगी.

Conclusion

सरकार का यह कदम गन्ना किसानों की आय बढ़ाने, स्टॉक कम करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने की दिशा में अहम है. मोलासिस ड्यूटी हटाने और नियंत्रित निर्यात नीति से शुगर सेक्टर में संतुलन बनेगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. सरकार ने कितनी चीनी के निर्यात की अनुमति दी है?

1.5 मिलियन टन यानी 15 लाख टन.

2. यह फैसला कब से लागू होगा?

2025-26 शुगर सीजन (अक्टूबर 2025 से).

3. मोलासिस पर कितनी ड्यूटी हटाई गई है?

50% एक्सपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह से खत्म की गई है.

4. यह निर्णय किस मंत्रालय ने लिया है?

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय (Union Food Ministry).

5. भारत का चीनी उत्पादन कितना है?

करीब 34 मिलियन टन.

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