ये है मालामाल बनाने वाली खेती! सालभर बाजार में रहती है मांग, सरकार दे रही 45 हजार रुपये

Papaya Cultivation: सालभर बाजार में मांग बने रहने के चलते पपीता की खेती किसानों को ज्यादा मुनाफा दे सकती है.
ये है मालामाल बनाने वाली खेती! सालभर बाजार में रहती है मांग, सरकार दे रही 45 हजार रुपये

Papita ki Kheti.

Papaya Cultivation: किसान अब पारंपरिक फसलों की बजाय नकदी फसलों की खेती ओर रुख कर रहे हैं. पपीते भी एक नकदी फसल है. सालभर बाजार में मांग बने रहने के चलते पपीता की खेती किसानों को ज्यादा मुनाफा देती है. पपीते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे खरीफ और रबी दोनों सीजन में लगाया जा सकता है. यह पूरे साल फल देता है. यही वजह है कि पारंपरिक गेहूं या चने जैसी फसलों की बजाय पपीते की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है.

पपीता की खेती करने के इच्छुक किसानों के अच्छी खबर है. एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत पपीता के बाग का क्षेत्र विस्तार करने के लिए बिहार कृषि विभाग ने बिहार के 22 जिलों का चयन कर 335 हेक्टेयर में खेती कराने का लक्ष्य तय किया है.

पपीता खेती के फायदे

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  • पपीता सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फल है. इसमें विटामिन A, B, C, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
  • पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी पपीता उपयोगी है.
  • बाजार में पपीते की सालभर मांग रहती है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो सकती है.

कैसे करें पपीता की खेती?

भूमि चयन- पपीता की खेती के लिए बलुई दोमट या हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है.

खेत की तैयार- गहरी जुताई कर खेत को समतल करें और गोबर की खाद/कम्पोस्ट डालें.

पौधरोपण का समय- जुलाई या फरवरी-मार्च में पौधे लगाने का सही समय है.

दूरी- पौधों को 1.5 से 2 मीटर की दूरी पर लगाएं.

सिंचाई- गर्मियों में 7-10 दिन पर और सर्दियों में 12-15 दिन पर सिंचाई करें.

खाद एवं उर्वरक- प्रति पौधा 250 ग्राम नाइट्रोजन, 200 ग्राम फास्फोरस और 200 ग्राम पोटाश की खुराक दें.

फसल अवधि- पौधारोपण के 8-10 माह बाद से फल तुड़ाई शुरू हो जाती है.

उपज- एक हेक्टेयर में 4-50 टन तक उपज मिल सकती है.

कितना मिलेगा अनुदान

  • पपीता की खेती के लिए कृषि विभाग ने इकाई लागत 75,000 रुपये तय की है.
  • इसमें चयनित किसान को खेती के लिए 60% यानी 45,000 रुपये अनुदान मिलेगा.
  • अनुदान की राशि पहले वर्ष 27,000 रुपये और दूसरे वर्ष 18,000 रुपये मिलेगी.

रेड लेडी प्रजाति के मिलेंगे पौधे

योजना के तहत किसान रेड लेडी प्रजाति के पपीता की खेती करेंगे. उद्यान विभाग किसानों को पौधे और रोपण सामग्री उपलब्ध कराएगा.

किसानों के लिए आवेदन प्रक्रिया

इच्छुक किसानों को पोर्टल https://horticulture.bihar.gov.in/ पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन करने के बाद चयनित किसानों को अनुदान का फायदा मिलेगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)


Q1. पपीता क्यों लाभकारी फसल है?
पपीता एक नकदी फसल है जिसकी सालभर बाजार में मांग रहती है.

Q2. पपीता लगाने का सही समय कब है?
जुलाई या फरवरी-मार्च में पौधारोपण करना सबसे उपयुक्त है

Q3. किसानों को कितना अनुदान मिलेगा?
प्रति हेक्टेयर 75,000 रुपये लागत तय की गई है. इसमें 60% यानी 45,000 रुपये अनुदान मिलेगा.

Q4. किस प्रजाति के पपीते की खेती होगी?
'रेड लेडी' प्रजाति के पपीते के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे.

Q5. आवेदन कैसे करें?
इच्छुक किसान उद्यान निदेशालय के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

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