धान-गेहूं से आगे बढ़िए, ड्रैगन फ्रूट उगाइए! सरकार देगी ₹2.70 लाख की मदद, कमाई भी होगी दमदार

Subsidy: पारंपरिक फसलों में हर सीजन में बुवाई, जुताई और महंगे खादों की जरूरत होती है. साथ ही, बाढ़ या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं में पूरी फसल बर्बाद होने का जोखिम रहता है, जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती. इसकी तुलना में ड्रैगन फ्रूट की खेती एक गेम-चेंजर साबित हो रही है.
धान-गेहूं से आगे बढ़िए, ड्रैगन फ्रूट उगाइए! सरकार देगी ₹2.70 लाख की मदद, कमाई भी होगी दमदार

किसानों को प्रति हेक्टेयर 2.70 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा. (प्रतीकामक फोटो: AI/Gemini)

Mukhyamantri Bagwani Mission: अगर आप खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं या खेती को एक प्रॉफिटेबल बिजनेस के रूप में अपनाना चाहते हैं, तो ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) की खेती आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. बिहार सरकार किसानों और युवाओं को इस आधुनिक बागवानी फसल की ओर आकर्षित करने के लिए ड्रैगन फ्रूट विकास योजना चला रही है, जिसके तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 2.70 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है.

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) आमस, गया के कृषि वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान) डॉ. पंकज तिवारी के अनुसार, वर्तमान समय में नकदी फसलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. ड्रैगन फ्रूट ऐसी ही एक उच्च-मूल्य वाली फसल है, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक मुनाफा देने की क्षमता रखती है.

क्या है मुख्यमंत्री बागवानी मिशन?

'मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना' बिहार में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्नत किस्म के फलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही है. यह योजना मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़ना है.

क्यों है यह कमाई का बेहतर जरिया?

पारंपरिक फसलों (जैसे गेहूं, धान या मक्का) में हर सीजन में बुवाई, जुताई और महंगे खादों की जरूरत होती है. साथ ही, बाढ़ या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं में पूरी फसल बर्बाद होने का जोखिम रहता है, जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती. इसकी तुलना में ड्रैगन फ्रूट की खेती एक गेम-चेंजर साबित हो रही है.

एक बार निवेश, वर्षों तक कमाई

ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है. इसे एक बार लगाने के बाद यह कई सालों तक फल देता है, जिससे बार-बार बुवाई की लागत बचती है.

कम पानी और बंजर जमीन में भी मुफीद

इस पौधे को बहुत अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती. यह कम पानी और सामान्य से कम उपजाऊ जमीन पर भी आसानी से फल-फूल सकता है.

बाजार में भारी डिमांड और ऊंची कीमत

सुपरफूड माने जाने वाले ड्रैगन फ्रूट की मांग भारतीय बाजारों और बड़े शहरों में बहुत तेजी से बढ़ी है. यह फल काफी महंगे दामों पर बिकता है, जिससे प्रति एकड़ होने वाला मुनाफा पारंपरिक फसलों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है.

प्रोसेसिंग और निर्यात की संभावना

ड्रैगन फ्रूट की मांग देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ रही है, जिससे किसानों को अतिरिक्त अवसर मिलते हैं.

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कितनी हो सकती है कमाई?

डॉ. तिवारी ने बताया कि किसान एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती से सालाना ₹8 लाख से ₹20 लाख तक की कमाई कर सकते हैं. बाजार भाव और उत्पादन के आधार पर मुनाफा ₹5 लाख से ₹15 लाख प्रति एकड़ तक पहुंच सकता है.

ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ी प्रमुख जानकारी

  • पौधों की संख्या: 1,600-1,800 पौधे प्रति एकड़
  • प्रति एकड़ अनुमानित लागत: ₹4-6 लाख
  • गोबर की खाद: 8-10 टन प्रति एकड़ प्रतिवर्ष
  • रासायनिक उर्वरक: लगभग 80-100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40-50 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40-50 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ प्रतिवर्ष (पौधों की उम्र के अनुसार)
  • पानी की जरूरत: ड्रिप सिंचाई के माध्यम से सामान्यतः 2-5 लीटर प्रति पौधा प्रतिदिन, मौसम और पौधे की अवस्था के अनुसार
  • पूर्ण उत्पादन पर उपज: 8-12 टन प्रति एकड़
  • अनुमानित आय: ₹8-20 लाख प्रति एकड़ (बाजार मूल्य पर निर्भर)
  • अनुमानित नेट मुनाफा: ₹5-15 लाख प्रति एकड़
  • उत्पादन अवधि: एक बार लगाने के बाद 15-20 वर्षों तक फल उत्पादन संभव
  • फल तुड़ाई: वर्ष में कई बार फल मिलते हैं, जिससे किसानों को नियमित आय होती है.

डॉ. तिवारी के मुताबिक, उचित प्रबंधन, ड्रिप सिंचाई और बाजार तक बेहतर पहुंच के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए लॉन्ग-टर्म और प्रॉफिटेबल बिजनेस साबित हो सकती है.

कितना मिलेगा अनुदान?

ड्रैगन विकास योजना बिहार सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री बागवानी मिशन' के तहत चलाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य बागवानी फसलों की कमर्शियल खेती को रफ्तार देना है. इस योजना का फायदा उठाने के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.25 एकड़ और अधिकतम 5 एकड़ तक की कृषि भूमि होनी चाहिए.

प्रति हेक्टेयर ₹2.70 लाख की कुल अनुदान राशि को सरकार दो किस्तों में जारी करेगी-

  • पहले वर्ष- शुरुआती पौधे लगाने और तैयारी के लिए ₹1.62 लाख दिए जाएंगे.
  • दूसरे वर्ष- फसल के रखरखाव के लिए ₹1.08 लाख की दूसरी किस्त दी जाएगी.

बिहार के इन 23 जिलों के किसानों को मिलेगा मौका

इस योजना के क्रियान्वयन के लिए बिहार सरकार ने राज्य के 23 जिलों का चयन किया है. इन जिलों के किसान आधिकारिक तौर पर आवेदन कर सकते हैं-

अररिया, अरवल, औरंगाबाद, बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा और सीवान.

आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

योजना का फायदा लेने के लिए इच्छुक किसानों को मैन्युअल दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. वे सीधे ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. किसानों को उद्यानिकी विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरना होगा.

जरूरी दस्तावेज

आवेदन करते समय आपके पास नीचे दिए गए कागजात होने अनिवार्य हैं.

  • आवेदक का बैंक अकाउंट डीटेल
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • फार्मर आईडी
  • जमीन के वैध दस्तावेज (LPC/रसीद)

मदद के लिए कहां संपर्क करें?

अगर आपको आवेदन करने में कोई समस्या आ रही है या योजना से जुड़ी अधिक जानकारी चाहिए, तो आप बिहार सरकार के आधिकारिक किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1551 पर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं.

किसानों के लिए बड़ा मौका

खेती में बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से सीमित आय के बीच ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए कमाई का नया मॉडल बनकर उभर रही है. सरकार की सब्सिडी मिलने से शुरुआती निवेश का बोझ भी काफी कम हो जाता है. ऐसे में जो किसान बागवानी फसलों की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना एक शानदार अवसर साबित हो सकती है.

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