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Representative Image (AI Generated)
देश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है. खरीफ की फसल की बुवाई शुरू होने से पहले ही सरकार ने खाद का पर्याप्त इंतजाम कर लिया है. सरकार ने साफ किया है कि बाजार में खाद की कोई कमी नहीं है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में किसानों को पुरानी दरों पर ही खाद मिलती रहेगी. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने बताया कि सरकार ने इस सीजन के लिए करीब 390.54 लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत का अनुमान लगाया है.
अपर्णा शर्मा के मुताबिक अच्छी बात यह है कि देश में अभी ही लगभग 190 लाख मीट्रिक टन (करीब 49%) स्टॉक मौजूद है. आमतौर पर इस समय तक केवल 33% स्टॉक रहता है, लेकिन इस बार सरकार की बेहतर प्लानिंग और पहले से की गई तैयारियों की वजह से स्टॉक बहुत मजबूत है. पिछले साल की तुलना में इस बार लगभग हर तरह की खाद का भंडार बढ़ा है:
जरूरत से ज्यादा उपलब्धता (1 से 26 अप्रैल 2026 तक)
| खाद का प्रकार | जरूरत (लाख मीट्रिक टन) | उपलब्धता (लाख मीट्रिक टन) |
| यूरिया | 20.54 | 71.4 |
| डीएपी (DAP) | 6.67 | 23.09 |
| एमओपी (MOP) | 1.96 | 8.38 |
| एनपीके (NPK) | 8.43 | 53.4 |
सरकार ने खाद की कीमतों (MRP) को स्थिर रखने का फैसला किया है. दुनिया भर में यूरिया की कीमत ₹4,000 प्रति बैग के पार पहुंच गई है, लेकिन भारतीय किसानों को यह केवल ₹266.5 में मिलता रहेगा. सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई का बोझ खुद उठाएगी ताकि किसानों पर असर न पड़े.
भारत ने खाद के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए अपना उत्पादन भी बढ़ाया है. संकट के बावजूद देश में 59.01 लाख मीट्रिक टन खाद का उत्पादन हुआ, जबकि 13.96 लाख मीट्रिक टन खाद विदेशों से मंगाई (आयात) गई है.
खाद की स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है. सरकार के बड़े अधिकारियों का समूह (EGoS) लगातार इसकी निगरानी कर रहा है. किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, खरीफ सीजन के लिए खाद की सप्लाई जरूरत से ज्यादा बनी रहेगी.