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भारत में हर साल लाखों टन फल, सब्जियां और बागवानी उत्पाद खराब हो जाते हैं, क्योंकि किसानों के पास इन्हें सुरक्षित रखने की अच्छी और सही जगह नहीं होती है. तो इसका सीधा असर किसानों की इनकम पर भी पड़ता है. असल में इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. किसानों, इंटरप्रेन्योर और इन्वस्टर्स को बढ़ावा देने के लिए नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने एक खास योजना शुरू की है — Capital Investment Subsidy Scheme for Construction/Expansion/Modernization of Cold Storages.
असल में इस योजना का सबसे अहम कारण किसानों को आधुनिक, ऊर्जा-संरक्षण तकनीक से लैस कोल्ड स्टोरेज सुविधा मौजूद करावाना है, जिससे कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-Harvest Loss) को कम किया जा सके और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके.
सरकार इस स्कीम के जरिए किसानों और निवेशकों को 35% से लेकर 50% तक की पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) प्रदान करती है.
सिर्फ यही नहीं, सरकार कुछ स्पेशल टेक्निकल इक्विपमेंट पर भी एक्स्ट्रा फाइनेंशियल हेल्प देने का कर रही है-
Controlled Atmosphere Generator के लिए ₹1.25 करोड़ प्रति यूनिट तक.
Specialized CA Doors के लिए ₹2.5 लाख प्रति डोर तक.
साथ ही PLC उपकरणों और आधुनिक इन्सुलेशन तकनीक पर भी फाइनेंशियल हेल्प दी जाती है.
यह स्कीम केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि कंपनियों, सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और प्राइवेट इन्वस्टर्स के लिए भी खुली है. कोई भी व्यक्ति या संस्था जो नया कोल्ड स्टोरेज बनाना चाहती है, पुराना स्टोरेज मॉडर्नाइज करना चाहती है या Controlled Atmosphere (CA) तकनीक वाला स्टोरेज लगाना चाहती है, इस योजना के लिए आवेदन कर सकती है.
यह एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (Credit Linked Subsidy Scheme) है, यानी कि पहले आवेदक को किसी बैंक से लोन लेना होता है और प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा करना होता है. जब कोल्ड स्टोरेज यूनिट पूरी तरह चालू हो जाती है, तब NHB निरीक्षण और सत्यापन करता है. जांच में प्रोजेक्ट पात्र पाया जाने पर बैक-एंडेड सब्सिडी (यानी बाद में मिलने वाली सहायता) जारी की जाती है.
1. प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें: कोल्ड स्टोरेज की डिजाइन, क्षमता, लागत और तकनीकी विवरण शामिल करें.
2. NHB को आवेदन जमा करें: आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज और DPR (Detailed Project Report) लगाएं.
3. तकनीकी जांच: NHB की अधिकृत एजेंसी (Empanelled Technical Appraisal Agency) प्रोजेक्ट की जांच करती है.
4. लोन अप्रूव और निर्माण: बैंक लोन मंजूर करता है और कार्य शुरू होता है.
5. वेरिफिकेशन और सब्सिडी डिस्ट्रीब्यूशन: प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद NHB निरीक्षण करता है और पात्रता के अनुसार सब्सिडी जारी करता है.
यह स्कीम पूरे भारत में लागू है, लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और अनुसूचित इलाकों को खास प्राथमिकता दी जाती है.स्पेशली सेब, नाशपाती, चेरी, प्लम जैसे टेम्परेट फलों वाले इलाकों में इसका अधिक लाभ उठाया जा सकता है.
सरकार अब इस योजना को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है. जी हां आने वाले समय में इसमें सोलर-पावर्ड कोल्ड स्टोरेज, ऊर्जा-कुशल मशीनरी और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को भी शामिल किया जाएगा. इससे किसानों को बिजली की लागत में बचत होगी और उनका लाभ बढ़ेगा.
यह योजना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जहां पहले फलों और सब्जियों का बड़ा हिस्सा खराब हो जाता था, वहीं अब किसान न सिर्फ अपनी उपज को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि बेहतर दाम पर बेच भी सकते हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और देश की कृषि आय में भी बड़ा इजाफा होगा.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की वेबसाइट पर जाएं)
5 FAQs
Q1. नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना क्या है?
यह सरकार की योजना है जिसके तहत फलों, सब्जियों और बागवानी उत्पादों के लिए आधुनिक कोल्ड स्टोरेज यूनिट बनाने पर 35% से 50% तक सब्सिडी दी जाती है.
Q2. इस योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को कटाई के बाद फसल के नुकसान से बचाना और उन्हें उचित मूल्य दिलाना है.
Q3. कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना का लाभ कौन ले सकता है?
किसान, कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), सहकारी समितियां और निजी निवेशक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.
Q4. इस योजना के तहत कितनी अधिकतम सब्सिडी मिल सकती है?
अधिकतम सब्सिडी सीमा ₹7.50 करोड़ तय की गई है, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में यह 50% तक हो सकती है.
Q5. योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदक को NHB की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होता है. तकनीकी जांच और सत्यापन के बाद सब्सिडी दी जाती है.
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