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अब क्लेम प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है. (File Image)
PMFBY: देश के अन्नदाताओं को आर्थिक सुरक्षा देने और उनकी आय बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा किसान-हितैषी फैसला लिया है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब दिवंगत किसानों के लंबे समय से अटके हुए बीमा दावों का निपटारा मानवीय संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर बहुत तेजी से किया जाएगा. इसके लिए कृषि विभाग ने सभी अधिसूचित बीमा कंपनियों को कड़े और जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं.
इस सरलीकरण से अब देश के हजारों किसान परिवारों को समय पर क्लेम राशि मिल सकेगी और उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने भी इस अनूठी और संवेदनशील पहल की सराहना की है.
फसल बीमा की पुरानी गाइडलाइन के अनुसार, अगर किसी बीमित किसान की मृत्यु हो जाती थी, तो उसके कानूनी वारिसों को बीमा क्लेम की राशि प्राप्त करने के लिए अदालत से 'उत्तराधिकार प्रमाण पत्र' लाना अनिवार्य था.
चूंकि उत्तराधिकार प्रमाण पत्र हासिल करना एक बेहद लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए कई बार क्लेम की राशि कम होने पर किसान परिवार इसमें रुचि ही नहीं लेते थे. इसके चलते सालों से बड़ी संख्या में मृत किसानों के क्लेम बीमा कंपनियों के पास लंबित पड़े थे.
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कृषि विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब क्लेम प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है.
अगर बीमित किसान ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर फॉर्म भरते समय अपने परिवार के किसी सदस्य को नामांकित किया था, तो बीमा कंपनी बिना किसी देरी के सीधे उस नॉमिनी के खाते में पैसा ट्रांसफर करेगी.
अगर फॉर्म में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं है, तो भी घबराने की जरूरत नहीं है. अब कोर्ट के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के अलावा, तहसीलदार या पटवारी द्वारा जारी 'वारिसनामा' या पूरे परिवार की आपसी सहमति से अधिकृत किसी एक सदस्य को भुगतान किया जा सकेगा.
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जिन परिवारों में कोई आपसी विवाद नहीं है, वहां अब उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या वारिसनामा की भी कोई मजबूरी नहीं होगी. परिवार के सभी सदस्य मिलकर ₹50 के नोटरी स्टांप पेपर पर एक शपथ पत्र देकर किसी भी एक सदस्य को क्लेम राशि पाने के लिए अधिकृत कर सकते हैं. बीमा कंपनी सीधे उसी सदस्य के बैंक खाते में भुगतान कर देगी.
नए नियमों के तहत अब मृत किसान के परिजनों को केवल मृत्यु प्रमाण पत्र, पारिवारिक सहमति का शपथ पत्र, बैंक पासबुक की कॉपी या कैंसिल्ड चेक और आधार कार्ड की प्रति ही जमा करनी होगी. इन्हें क्लेम भुगतान के लिए पर्याप्त माना गया है.
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बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम कर रही है. यह योजना मुख्य रूप से इन परिस्थितियों में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करती है-
* प्राकृतिक आपदाएं- ओलावृष्टि, चक्रवाती वर्षा, बेमौसम भारी बारिश, सूखा, बाढ़ या कीड़ों के हमले से फसल बर्बाद होने पर आर्थिक सुरक्षा मिलती है.
* कटाई के बाद का नुकसान- फसल की कटाई होने के बाद, यदि फसल को खेत में सूखने के लिए रखा गया है और अगले 14 दिनों के भीतर वह किसी स्थानीय प्राकृतिक आपदा या बेमौसम बारिश के कारण खराब हो जाती है, तो भी किसान इस योजना के तहत मुआवजा पाने के हकदार होते हैं.
सरकार का उद्देश्य इस पारदर्शी और सुगम व्यवस्था के जरिए प्रभावित और पीड़ित किसान परिवारों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाना है ताकि संकट के समय उन्हें तुरंत आर्थिक संबल मिल सके.
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