यूरोपीय देशों के मवेशियों में फैला ये संक्रामक रोग, आप भी पालते हैं गाय, भेड़, बकरी तो जान लें लक्षण और रोकथाम के उपाय

Foot and Mouth Disease: यह एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है, जो मवेशी, भेड़, सूअर, जंगली सूअर, हिरण, लामा और अल्पाका जैसे खुर वाले जानवरों को प्रभावित करता है.
यूरोपीय देशों के मवेशियों में फैला ये संक्रामक रोग, आप भी पालते हैं गाय, भेड़, बकरी तो जान लें लक्षण और रोकथाम के उपाय

Foot and Mouth Disease in Animal: यूनाइटेड किंगडम (UK) सरकार ने मांस और डेयरी उत्पादों के व्यक्तिगत आयात पर प्रतिबंध का विस्तार करते हुए यूरोपीय संघ (EU) के सभी देशों को इसमें शामिल कर लिया. क्योंकि खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) पूरे महाद्वीप में फैल रहा है. ब्रिटेन में प्रवेश करने वाले यात्रियों को व्यक्तिगत उपयोग के लिए यूरोपीय संघ के सभी देशों से मवेशी, भेड़, बकरी, सूअर का मांस और डेयरी उत्पाद लाने की अनुमति नहीं होगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसमें सैंडविच (Sandwiches), पनीर (Cheese), संसाधित मांस (Cured Meats), कच्चा मांस (Raw Meats) और दूध (Milk) जैसी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, चाहे उनकी पैकेजिंग कुछ भी हो या वे शुल्क मुक्त दुकानों से खरीदी गई हों.

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सरकार के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य ब्रिटिश पशुधन के स्वास्थ्य, किसानों की सुरक्षा, ब्रिटेन की खाद्य सुरक्षा की रक्षा करना है. इन वस्तुओं को ले जाते हुए पाए जाने वाले यात्रियों को सीमा पर उन्हें सौंपना होगा या उन्हें जब्त करके नष्ट कर दिया जाएगा. गंभीर मामलों में, उल्लंघनकर्ताओं पर इंग्लैंड में 5,000 पाउंड (6,550 अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इस साल की शुरुआत में, ब्रिटेन सरकार ने जर्मनी, हंगरी, स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया से मवेशियों, भेड़ों, अन्य जानवरों और सूअर के मांस के साथ-साथ डेयरी उत्पादों के व्यक्तिगत आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इन देशों में खुरपका-मुंहपका रोग के प्रकोप की पुष्टि हुई थी.

खुरपका-मुंहपका रोग क्या है?

खुरपका-मुंहपका रोग से मनुष्यों को कोई खतरा नहीं है. यह एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है, जो मवेशी, भेड़, सूअर, जंगली सूअर, हिरण, लामा और अल्पाका जैसे खुर वाले जानवरों को प्रभावित करता है. यह रोग फुट एंड माउथ डिजीज वायरस (FMDV) के कारण होता है. यह वायरस पिकॉर्नाविरिडी (Picornaviridae) परिवार के तहत आता है.

खुरपका-मुंहपका रोग के फैलने का कारण

  • संक्रमित पशु के संपर्क में आने से स्वस्थ पशु को यह रोग हो सकता है.
  • इस रोग के वायरस हवा के जरिए भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकते हैं.
  • दूषित चारा-पानी से भी यह रोग फैल सकता है.
  • पशुशाला, चरागाह, पानी के स्रोत और पशु चिकित्सा उपकरण अगर संक्रमित हों, तो वे भी रोग को फैलाने में मदद कर सकते हैं.

खुरपका-मुंहपका रोग के लक्षण क्या हैं?

  • संक्रमित पशु को तेज बुखार (104-106 डिग्री F) हो सकता है.
  • पशु कमजोर और सुस्त हो जाता है.
  • खाने-पीने में अरुचि होने लगती है.
  • अधिक मात्रा में लार टपकाना शुरू हो जाता है.

एडवांस स्टेज के लक्षण

  • जीभ, होंठ, मसूड़े और मुंह के अंदर छोटे-छोटे छाले पड़ जाते हैं, जो बाद में फटकर दर्दनाक घाव बना देते हैं.
  • खुरों के पास दरारें पड़ जाती है, जिससे चलने में कठिनाई होती है.
  • संक्रमित पशु ठीक से खड़ा नहीं हो पाता और अधिकत समय लेटा रहता है.
  • दूध देने वाली गाय और भैंसों को दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है.
  • यह रोग गर्भवती पशुओं में गर्भपात का कारण भी बन सकता है.

खुरपका-मुंहपका रोग की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय

इस रोग के बचाव के लिए हर 6 महीने में टीकाकरण करना जरूरी है. FMD वैक्सीन पशुओं को 4-6 महीने की उम्र में दी जाती है और हर 6 महीने में इसे दोहराना चाहिए. स्वस्थ पशुओं को संक्रमित पशु सेअलग रखना चाहिए. पशुशाला को नियमित रूप से साफ करना चाहिए. संक्रमित पशु को मुलायम चारा, गुड़-पानी और दलिया देना चाहिए ताकि वह आसानी से खा सके.

संक्रमित पशु के मुंह और खुर के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट या फिटकरी के पानी से धोना चाहिए. जरूर के अनुसार पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. रोग के दौरान पशु को पर्याप्त पोषण दिया जाना चाहिए ताकि उसका दूध उत्पादन कम न हो.

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