&format=webp&quality=medium)
जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती गर्मी अब खेती के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
Farming Tips: देश के कई हिस्सों में पारा 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है. यह बढ़ता तापमान न केवल इंसानों के लिए, बल्कि खेतों में खड़ी सब्जियों के लिए भी 'हीट-स्ट्रेस' (Heat Stress) पैदा कर रहा है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें इस समय सबसे अधिक प्रभावित हैं. इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है और हीट स्ट्रेट से सब्जियों को बचाने के उपाय बताएं हैं.
जब तापमान सामान्य सीमा से बहुत अधिक बढ़ जाता है और पौधों को पर्याप्त नमी व पोषण नहीं मिल पाता, तब फसलें हीट स्ट्रेस का शिकार हो जाती हैं. इस स्थिति में पौधों की ग्रोथ रुकने लगती है, पत्तियां सूखने लगती हैं और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। लगातार तेज धूप और लू पौधों की कोशिकाओं पर दबाव बढ़ाती है, जिससे उत्पादन घटने लगता है.
ये भी जरूर पढ़ें- परंपरा छोड़ी, तकनीक पकड़ी! अब गांव में खुद कमा रहे लाखों, आप भी बदल सकते हैं अपनी किस्मत
यूपी कृषि विभाग के अनुसार, सब्जियों में हीट स्ट्रेस के पीछे कई वजहें हैं-
इन परिस्थितियों में पौधे पानी और पोषक तत्वों को सही तरीके से ग्रहण नहीं कर पाते. इसका असर सीधे फसल की गुणवत्ता पर पड़ता है.
इस समय सबसे ज्यादा असर इन सब्जियों पर देखा जा रहा है-
कई इलाकों में किसानों की शिकायत है कि फल समय से पहले गिर रहे हैं और पौधे पीले पड़ने लगे हैं.
ये भी जरूर पढ़ें- नौकरी के साथ घर बैठे शुरू करें स्मार्ट खेती! 7 दिन में तैयार होने वाले इस 'सुपरफूड' की मार्केट में है भारी डिमांड

कृषि विभाग का कहना है कि सही प्रबंधन अपनाकर हीट स्ट्रेस के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
1. सिंचाई सही समय पर करें
सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करें. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों पर तापमान का असर कम होता है. दोपहर में सिंचाई करने से बचना चाहिए.
2. मल्चिंग का इस्तेमाल
पराली, सूखी घास या प्लास्टिक मल्च का उपयोग मिट्टी की नमी बचाने में मदद करता है. इससे जमीन का तापमान नियंत्रित रहता है और पानी की जरूरत भी कम होती है.
3. शेड नेट लगाएं
25% से 50% शेड नेट का उपयोग तेज धूप से पौधों की रक्षा करता है. इससे पौधों पर सीधी गर्मी का असर कम पड़ता है और ग्रोथ बेहतर रहती है.
4. संतुलित पोषण बेहद जरूरी
NPK के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक, बोरॉन का छिड़काव करें, इससे पौधों की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और हीट स्ट्रेस कम होता है.
इसके अलावा, फोलियर स्प्रे करें. समुद्री शैवाल, अमीनो एसिड, पोटाश, 1% कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव करें.
5. माइकोराइजा का उपयोग
माइकोराइजा जैसे जैविक तत्व पौधों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें पानी व पोषण बेहतर तरीके से लेने में मदद करते हैं. इससे गर्मी सहन करने की क्षमता बढ़ती है.
ये भी जरूर पढ़ें- शहरों में खेती का नया ट्रेंड! छत पर उगाएं जैविक सब्जियां, इन राज्यों में मिल रही है 75% तक सब्सिडी
Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती गर्मी अब खेती के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. खासकर सब्जी उत्पादक किसानों के लिए यह दोहरी चुनौती है, क्योंकि उत्पादन घटने से बाजार में कीमतें बढ़ती हैं और किसानों की लागत भी बढ़ जाती है. ऐसे में आधुनिक तकनीकों, शेड नेट, माइक्रो सिंचाई और संतुलित पोषण प्रबंधन को अपनाना आने वाले समय में सब्जी खेती के लिए जरूरी होता जा रहा है.
हीट-स्ट्रेस एक गंभीर चुनौती है, लेकिन सही समय पर निराई-गुड़ाई, संतुलित पोषण (NPK + सूक्ष्म तत्व) और सिंचाई प्रबंधन के जरिए सब्जियों की बर्बादी को रोका जा सकता है. किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे धूप के चरम घंटों में काम करने के बजाय तकनीकी उपायों पर अधिक ध्यान दें.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 हीट-स्ट्रेस क्या होता है?
जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पौधों को पर्याप्त नमी व पोषण नहीं मिल पाता, तब फसलें हीट-स्ट्रेस का शिकार हो जाती हैं.
Q2 कौन-कौन सी सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं?
टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, करेला और पत्तेदार सब्जियां तेज गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं.
Q3 फसल बचाने के लिए सिंचाई कब करनी चाहिए?
सुबह जल्दी या शाम के समय हल्की सिंचाई करना सबसे बेहतर माना जाता है.
Q4 मल्चिंग क्यों जरूरी है?
मल्चिंग मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करती है और जमीन का तापमान कम रखती है.
Q5 क्या हीट-स्ट्रेस से पैदावार पर असर पड़ता है?
हां, हीट-स्ट्रेस से उत्पादन कम हो सकता है और सब्जियों की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है.