Farming Tips: गर्मी ने बढ़ाया सब्जी किसानों का संकट, फसल बचाने के लिए तुरंत करें ये 5 काम

Farming Tips: भीषण गर्मी के कारण सब्जियों की फसलें हीट-स्ट्रेस की चपेट में आ रही हैं. पौधे मुरझा रहे हैं और उत्पादन घट रहा है. ऐसे में यूपी कृषि विभाग ने सब्जी किसानों के लिए एडवाइजरी जारी कर बचाव के उपाय बताए हैं.
Farming Tips: गर्मी ने बढ़ाया सब्जी किसानों का संकट, फसल बचाने के लिए तुरंत करें ये 5 काम

जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती गर्मी अब खेती के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)

Farming Tips: देश के कई हिस्सों में पारा 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है. यह बढ़ता तापमान न केवल इंसानों के लिए, बल्कि खेतों में खड़ी सब्जियों के लिए भी 'हीट-स्ट्रेस' (Heat Stress) पैदा कर रहा है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें इस समय सबसे अधिक प्रभावित हैं. इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है और हीट स्ट्रेट से सब्जियों को बचाने के उपाय बताएं हैं.

क्या है Heat Stress?

जब तापमान सामान्य सीमा से बहुत अधिक बढ़ जाता है और पौधों को पर्याप्त नमी व पोषण नहीं मिल पाता, तब फसलें हीट स्ट्रेस का शिकार हो जाती हैं. इस स्थिति में पौधों की ग्रोथ रुकने लगती है, पत्तियां सूखने लगती हैं और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। लगातार तेज धूप और लू पौधों की कोशिकाओं पर दबाव बढ़ाती है, जिससे उत्पादन घटने लगता है.

किन कारणों से बढ़ रही है समस्या?

यूपी कृषि विभाग के अनुसार, सब्जियों में हीट स्ट्रेस के पीछे कई वजहें हैं-

  • 40 डिग्री सेल्सियल से ज्यादा तापमान
  • मिट्टी में नमी की कमी
  • असंतुलित पोषण
  • तेज धूप और लू
  • अनियमित सिंचाई

इन परिस्थितियों में पौधे पानी और पोषक तत्वों को सही तरीके से ग्रहण नहीं कर पाते. इसका असर सीधे फसल की गुणवत्ता पर पड़ता है.

कौन-कौन सी फसलें ज्यादा प्रभावित हैं?

इस समय सबसे ज्यादा असर इन सब्जियों पर देखा जा रहा है-

  • टमाटर
  • मिर्च
  • बैंगन
  • खीरा
  • करेला
  • अन्य पत्तेदार और बेल वाली सब्जियां

कई इलाकों में किसानों की शिकायत है कि फल समय से पहले गिर रहे हैं और पौधे पीले पड़ने लगे हैं.

heat stress vegetable

हीट-स्ट्रेस से बचाव के उपाय

कृषि विभाग का कहना है कि सही प्रबंधन अपनाकर हीट स्ट्रेस के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

1. सिंचाई सही समय पर करें

सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करें. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों पर तापमान का असर कम होता है. दोपहर में सिंचाई करने से बचना चाहिए.

2. मल्चिंग का इस्तेमाल

पराली, सूखी घास या प्लास्टिक मल्च का उपयोग मिट्टी की नमी बचाने में मदद करता है. इससे जमीन का तापमान नियंत्रित रहता है और पानी की जरूरत भी कम होती है.

3. शेड नेट लगाएं

25% से 50% शेड नेट का उपयोग तेज धूप से पौधों की रक्षा करता है. इससे पौधों पर सीधी गर्मी का असर कम पड़ता है और ग्रोथ बेहतर रहती है.

4. संतुलित पोषण बेहद जरूरी

NPK के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक, बोरॉन का छिड़काव करें, इससे पौधों की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और हीट स्ट्रेस कम होता है.
इसके अलावा, फोलियर स्प्रे करें. समुद्री शैवाल, अमीनो एसिड, पोटाश, 1% कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव करें.

5. माइकोराइजा का उपयोग

माइकोराइजा जैसे जैविक तत्व पौधों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें पानी व पोषण बेहतर तरीके से लेने में मदद करते हैं. इससे गर्मी सहन करने की क्षमता बढ़ती है.

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जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती गर्मी अब खेती के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. खासकर सब्जी उत्पादक किसानों के लिए यह दोहरी चुनौती है, क्योंकि उत्पादन घटने से बाजार में कीमतें बढ़ती हैं और किसानों की लागत भी बढ़ जाती है. ऐसे में आधुनिक तकनीकों, शेड नेट, माइक्रो सिंचाई और संतुलित पोषण प्रबंधन को अपनाना आने वाले समय में सब्जी खेती के लिए जरूरी होता जा रहा है.

निष्कर्ष

हीट-स्ट्रेस एक गंभीर चुनौती है, लेकिन सही समय पर निराई-गुड़ाई, संतुलित पोषण (NPK + सूक्ष्म तत्व) और सिंचाई प्रबंधन के जरिए सब्जियों की बर्बादी को रोका जा सकता है. किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे धूप के चरम घंटों में काम करने के बजाय तकनीकी उपायों पर अधिक ध्यान दें.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 हीट-स्ट्रेस क्या होता है?

जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पौधों को पर्याप्त नमी व पोषण नहीं मिल पाता, तब फसलें हीट-स्ट्रेस का शिकार हो जाती हैं.

Q2 कौन-कौन सी सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं?

टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, करेला और पत्तेदार सब्जियां तेज गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं.

Q3 फसल बचाने के लिए सिंचाई कब करनी चाहिए?

सुबह जल्दी या शाम के समय हल्की सिंचाई करना सबसे बेहतर माना जाता है.

Q4 मल्चिंग क्यों जरूरी है?

मल्चिंग मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करती है और जमीन का तापमान कम रखती है.

Q5 क्या हीट-स्ट्रेस से पैदावार पर असर पड़ता है?

हां, हीट-स्ट्रेस से उत्पादन कम हो सकता है और सब्जियों की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है.

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