खरबूजा-तरबूज उगाने वाले किसानों के लिए अलर्ट! तुरंत करें ये काम, वरना फसल हो जाएगी चौपट

Farming Tips: फ्यूजेरियम विल्ट एक विनाशकारी रोग है जो देखते ही देखते पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. समय रहते सही उपचार न मिलने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
खरबूजा-तरबूज उगाने वाले किसानों के लिए अलर्ट! तुरंत करें ये काम, वरना फसल हो जाएगी चौपट

शुरुआत में पौधे की पत्तियां पीली पड़नी शुरू होती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूख जाता है.  (प्रतीकात्मक फोटो:AI/Chatgpt)

Farming Tips: उत्तर प्रदेश के तरबूज और खरबूजा उगाने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर है. तरबूज और ताइवानी खरबूजे की फसलों पर 'फ्यूजेरियम विल्ट' (Fusarium Wilt) नामक बीमारी का प्रकोप तेजी से फैल रहा है. यह रोग फसल के जाइलम भाग को प्रभावित कर पौधों को पूरी तरह सुखा देता है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसानों को बीज शोधन, भूमि उपचार और ड्रिंचिंग जैसे वैज्ञानिक बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है.

ताइवानी खरबूजे और तरबूज की खेती यूपी के किसानों की आय का मुख्य स्रोत है. फ्यूजेरियम विल्ट एक विनाशकारी रोग है जो देखते ही देखते पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. समय रहते सही उपचार न मिलने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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रोग के लक्षण और बचाव के तरीके

फ्यूजेरियम विल्ट रोग के मुख्य लक्षण क्या हैं?

  • इस रोग का प्रभाव पौधे के जाइलम भाग पर होता है. शुरुआत में पौधे की पत्तियां पीली पड़नी शुरू होती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूख जाता है, जिससे पूरी फसल नष्ट हो जाती है.

कृषि विभाग ने बीज और भूमि शोधन के लिए क्या सुझाव दिए हैं?

बीज शोधन: फसल लगाने से पहले बीजों को 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करें.

भूमि शोधन: ढाई किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल कर जमीन का उपचार करें.

अगर फसल में रोग लग जाए, तो तुरंत क्या कदम उठाएं?

  • रोग लगने की स्थिति में 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में ट्राइकोडर्मा का घोल बनाकर पौधों की जड़ों में 'ड्रिंचिंग'करनी चाहिए. इसके अलावा, बीमार पौधों को जड़ और मिट्टी सहित उखाड़कर खेत से दूर नष्ट कर देना चाहिए.

किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?

आपके खेत में नमी का प्रबंधन और संक्रमित पौधों की समय पर पहचान ही आपकी फसल को बचा सकती है. अगर आप सिंचाई अनियंत्रित रखते हैं, तो मिट्टी की नमी फंगस को पनपने में मदद करेगी. कृषि विभाग की यह सलाह आपके निवेश को सुरक्षित रखने के लिए एक 'सुरक्षा कवच' की तरह है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या संक्रमित पौधे को खेत में छोड़ना सुरक्षित है?

बिल्कुल नही. रोगी पौधों के अवशेष अगली फसल के लिए रोग वाहक का काम करते हैं. इन्हें तुरंत नष्ट करना अनिवार्य है.

Q2 सिंचाई के जल से यह रोग कैसे फैलता है?

अगर सिंचाई का पानी एक संक्रमित खेत से होकर स्वस्थ खेत में जाता है, तो पानी के साथ बीमारी के कीटाणु भी फैल जाते हैं. इसलिए जल प्रवाह के प्रबंधन पर खास ध्यान दें.

Q3 समस्या बढ़ने पर किससे संपर्क करें?

किसान अपने ब्लॉक के 'कृषि रक्षा इकाई' के प्रभारी से संपर्क करके विशेषज्ञ सलाह और सुझाव ले सकते हैं.

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