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मार्च में बुवाई से किसानों की आय बढ़ाने का मौका. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
Shaljam ki Kheti: अगर आप कम समय और कम लागत में अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो कृषि विभाग, बिहार सरकार की यह नई एडवाइजरी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. विभाग ने एक ऐसी खास नकदी फसल की बुवाई की सलाह दी है जो मार्च में लगाने पर मात्र 60 दिनों के भीतर बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस खेती में अन्य सब्जियों के मुकाबले लागत बेहद कम है.
कृषि विभाग, बिहार सरकार के मुताबिक, शलजम (Turnip) की खेती मार्च महीने में किसानों के लिए 'गेमचेंजर' साबित हो सकती है. शलजम न केवल कम समय में तैयार होने वाली फसल है, बल्कि बाजार में इसकी निरंतर मांग इसे एक सुरक्षित निवेश बनाती है.
कम लागत
बाजार का रुझान
1. मिट्टी और जलवायु
2. खेत की तैयारी
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3. बुवाई का सही समय
मार्च के महीने में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, इसलिए बुवाई के समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-
4. सिंचाई और उर्वरक
शलजम एक जड़ वाली फसल है, इसलिए इसमें नमी का संतुलन बहुत जरूरी है.
सिंचाई
खाद और उर्वरक

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1. देरी से कटाई
शलजम को सही समय पर उखाड़ना जरूरी है. अगर कंद ज्यादा बड़े हो जाएं, तो वे रेशेदार और सख्त हो जाते हैं, जिससे बाजार भाव गिर जाता है.
2. ज्यादा पानी
जड़ बनते समय बहुत अधिक पानी देने से शलजम का स्वाद फीका पड़ सकता है
3. उन्नत किस्म का चुनाव
हमेशा अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार उन्नत किस्मों का ही चयन करें.
शलजम की खेती आज के समय में किसानों के लिए स्मार्ट और लाभकारी विकल्प बन रही है. सही समय पर बुवाई, संतुलित सिंचाई और बाजार की समझ के साथ किसान इस फसल से कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं.
Live TV
Q1. शलजम की बुवाई का सही समय क्या है?
फरवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है.
Q2. शलजम की फसल कितने दिन में तैयार होती है?
करीब 45 से 60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है.
Q3. किस तरह की मिट्टी सबसे अच्छी है?
हल्की दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी.
Q4. सिंचाई कितनी बार करनी चाहिए?
हर 10-15 दिन में हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है.
Q5. क्या यह छोटे किसानों के लिए फायदेमंद है?
हां, कम लागत और जल्दी उत्पादन के कारण यह छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प है.
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