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Urad ki Kheti: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार नई पहल कर रही है. इसी दिशा में शुरू की गई ‘किसान पाठशाला’ योजना के तहत किसानों को मूंग, उड़द और बाजरा जैसी फसलों की उन्नत खेती, उनमें लगने वाली बीमारियों और कीटों से बचाव की जानकारी दी जा रही है. इस क्रम में यूपी कृषि विभाग ने अब किसानों को उड़द (Black Gram) की खेती से जुड़ी विशेष और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे किसान बेहतर उत्पादन के साथ ज्यादा मुनाफा कमा सकें.
उड़द (Black Gram) एक दलहनी फसल है. यह एक अल्प अवधि की फसल है जो लगभग 60-65 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. उड़द को कमाई बढ़ाने वाली फसल भी कहा जाता है. इसके दाने में लगभग 60% कार्बोहाइड्रेट, 24% प्रोटीन और 1.3% वसा पायी जाती है.
उड़द का उपयोग प्रमुख रूप से दाल के रूप मे किया जाता है. उड़द से स्वादिष्ट व्यंजन जैसे कचौड़ी, पापड़, बड़ी, बड़े, हलवा, इमरती, पूरी, इडली, डोसा आदि भी तैयार किये जाते है.
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इसकी दाल की भूसी पशु आहार के रूप मे उपयोग की जाती है. उड़द के हरे एवं सूखे पौधो को पशु बहुत चाव से खाते है. उड़द दलहनीय फसल होने के कारण वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके भूमि की उर्वरा शक्ति मे बढ़ोतरी करती है. इसके अतिरिक्त उड़द की फली तुड़ाई के उपरान्त फसलों की पत्तियां एवं जड़ों के अवशेष मृदा में रह जाने के कारण भूमि मे कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है. हरी खाद के रूप मे भी उड़द की फसल का उपयोग किया जा सकता है.
उर्वरकों का प्रयोग- 15-20 किलोग्राम नत्रजन, 40 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किग्रा पोटाश और 20 किग्रा गंधक प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें. फॉस्फोरस प्रयोग से दाने की उपज में विशेष बढ़ोतरी होती है. उर्वरकों की सम्पूर्ण मात्रा बुवाई के समय कूड़ों में बीज से 2-3 सेमी नीचे देनी चाहिए.2 क्विंटल जिप्सम का प्रयोग बुवाई के समय किया जाए.
सिंचाई- पहली सिंचाई 30-35 दिन बाद करनी चाहिए. पहली सिंचाई जल्दी करने से जड़ों तथा ग्रन्थियों का विकास ठीक प्रकार से नहीं होता है. बाद में जरूरत के अनुसार 10-15 दिन बाद हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए.

पीला चित्रवर्ण: उर्द में प्रायः पीला चित्रवर्ण (मोजैक) रोग का प्रकोप होता है. रोग के विषाणु सफेद मक्खी द्वारा फैलते हैं.
नियंत्रण: समय से बुवाई करें.
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थ्रिप्स: इस कीट के शिशु और प्रौढ़ दोनों पत्तियों एवं फूलों से रस चूसते हैं, जिससे उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
नियंत्रण: डाइमिथोयेट 30% ई.सी. 1 लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एस0एल0 250 मिली प्रति हेक्टेर की दर से 500-700 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए.
हरा फुदका: इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनों पत्तियों से रस चूसकर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं.
नियंत्रण: थ्रिप्स के लिये बताये गये कीटनाशियों के प्रयोग से हरे फुदके का नियंत्रण किया जा सकता है.
फली वेधक: इससे फसल को काफी हानि होती है.
नियंत्रण: फली वेधक के नियंत्रण के लिए इन्डोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. 500 मिली या किविनालफॉस 25 ईसी 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-800 ली० पानी में घोलकर छिड़काव करें.
1. उड़द की खेती किसानों के लिए क्यों फायदेमंद मानी जाती है?
उड़द एक अल्प अवधि में तैयार होने वाली दलहनी फसल है.
2. उड़द की फसल से मिट्टी को क्या लाभ होता है?
उड़द दलहनी फसल होने के कारण वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है.
3. उड़द का मुख्य उपयोग क्या है?
उड़द का उपयोग दाल के रूप में होता है.
4. उड़द की उन्नत किस्में कौन-सी हैं?
आजाद उड़द-1, आजाद उड़द-2, IPU 11-2, पंत उड़द-12.
5. उड़द की बुवाई का सही समय क्या है?
15 फरवरी से 15 मार्च तक बुवाई उपयुक्त रहती है.
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