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घर की चूल्हे की राख बनेगी खेत की ताकत. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
रासायनिक खादों के बढ़ते दाम और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच, भारतीय किसानों के लिए एक पुराना देसी नुस्खा वरदान साबित हो रहा है. घर के चूल्हे से निकलने वाली लकड़ी या कंडे की राख दरअसल नेचुरल पोटाश (Potash) का भंडार है. यह न केवल फसल में दाने भरने और फल का वजन बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि कीटों से सुरक्षा का भी सबसे सस्ता और प्रभावी साधन है.
लकड़ी और गोबर के कंडे जलने के बाद जो अवशेष छोड़ते हैं, उसमें पोटेशियम की मात्रा सबसे ज्यादा होती है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.
राख का उपयोग लगभग सभी फसलों में किया जा सकता है, लेकिन कुछ खास फसलों में इसके नतीजे बेहतर होते हैं-
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आजकल मिट्टी का pH लेवल असंतुलित हो रहा है. रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी अम्लीय होती जा रही है. ऐसे में राख एक सॉयल कंडीशनर के रूप में काम करती है.
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| कारक | राख का उपयोग करने पर | रासायनिक पोटाश पर निर्भरता |
| किसान का बजट | भारी बचत | जेब पर बोझ |
| मिट्टी की सेहत | सुधार | गिरावट |
| उपज की गुणवत्ता | प्राकृतिक स्वाद | औसत गुणवत्ता |
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घर की बचत: अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं या किचन गार्डन रखते हैं, तो कूड़े में फेंकी जाने वाली राख अब आपकी मिट्टी के लिए 'काला सोना' है.
सुरक्षित भोजन: राख के इस्तेमाल से पैदा हुई सब्जियाँ रसायनों से मुक्त होती हैं, जो आपके परिवार की सेहत के लिए बेहतर हैं.
मिट्टी का उपचार: अगर आपकी मिट्टी अम्लीय है और फसल पीली पड़ रही है, तो राख एक तुरंत असर दिखाने वाला उपचार है.
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Q1. चूल्हे की राख को ‘देसी पोटाश’ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसमें पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो पौधों की ग्रोथ और दाने/फलों के विकास में अहम भूमिका निभाता है.
Q2. क्या राख रासायनिक खाद का विकल्प बन सकती है?
हां, यह MOP जैसी महंगी खाद का सस्ता और जैविक विकल्प बन सकती है.
Q3. राख का इस्तेमाल कैसे करें?
मिट्टी में मिलाकर, पौधों के आसपास छिड़काव और कीट नियंत्रण के लिए पत्तियों पर हल्का छिड़काव.
Q4. क्या राख से कीट भी दूर होते हैं?
हां, राख का छिड़काव करने से कई कीट और फफूंद नियंत्रित होते हैं.
Q6. मिट्टी के लिए राख कैसे फायदेमंद है?
यह मिट्टी के pH स्तर को संतुलित करती है और उसे कम अम्लीय बनाती है.
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