महंगी खाद का देसी इलाज! फेंकने के बजाय खेत में डालें चूल्हे की राख, बढ़ेगा उत्पादन, घटेगी लागत

खेती में सबसे ज्यादा खर्च खाद और दवाइयों पर होता है. आपके घर की साधारण लकड़ी या गोबर के कंडे की राख प्राकृतिक पोटाश का काम कर सकती है.
महंगी खाद का देसी इलाज! फेंकने के बजाय खेत में डालें चूल्हे की राख, बढ़ेगा उत्पादन, घटेगी लागत

घर की चूल्हे की राख बनेगी खेत की ताकत.  (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

रासायनिक खादों के बढ़ते दाम और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच, भारतीय किसानों के लिए एक पुराना देसी नुस्खा वरदान साबित हो रहा है. घर के चूल्हे से निकलने वाली लकड़ी या कंडे की राख दरअसल नेचुरल पोटाश (Potash) का भंडार है. यह न केवल फसल में दाने भरने और फल का वजन बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि कीटों से सुरक्षा का भी सबसे सस्ता और प्रभावी साधन है.

चूल्हे की राख को 'देसी पोटाश' क्यों कहा जाता है?

लकड़ी और गोबर के कंडे जलने के बाद जो अवशेष छोड़ते हैं, उसमें पोटेशियम की मात्रा सबसे ज्यादा होती है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.

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  • पोटाश का काम: पौधों में प्रकाश संश्लेषण बढ़ाना और फलों को ठोस बनाना.
  • राख का फायदा: यह बाजार में मिलने वाली महंगी एमओपी (MOP) खाद का एक मुफ्त और जैविक विकल्प है.

राख का इस्तेमाल किन फसलों में सबसे ज्यादा फायदेमंद है?

राख का उपयोग लगभग सभी फसलों में किया जा सकता है, लेकिन कुछ खास फसलों में इसके नतीजे बेहतर होते हैं-

  • सब्जियां: टमाटर, बैंगन, मिर्च और आलू
  • अनाज: गेहूं और धान के दाने में चमक लाने के लिए
  • फल: आम, नींबू और अमरूद के पेड़ों में पोटाश की कमी दूर करने के लिए
potash

खेती में राख क्यों जरूरी है?

आजकल मिट्टी का pH लेवल असंतुलित हो रहा है. रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी अम्लीय होती जा रही है. ऐसे में राख एक सॉयल कंडीशनर के रूप में काम करती है.

राख के 'सुपर' फायदे

  • पोटाश का भंडार: राख में प्रचुर मात्रा में पोटाश होता है, जो पौधों के दानों को चमकदार और फलों को वजनदार बनाता है.
  • कीटों से सुरक्षा: राख को पौधों पर छिड़कने से कई तरह के कीट और फफूंद मर जाते हैं.
  • मिट्टी का सुधार: यह मिट्टी के पीएच (pH) लेवल को संतुलित करने में मदद करती है.
  • लागत में कमी: अगर आप राख का सही प्रबंधन करते हैं, तो पोटाश वाली खादों पर होने वाला आपका खर्च 15-20% तक कम हो सकता है.
कारकराख का उपयोग करने पररासायनिक पोटाश पर निर्भरता
किसान का बजटभारी बचतजेब पर बोझ
मिट्टी की सेहतसुधारगिरावट
उपज की गुणवत्ताप्राकृतिक स्वादऔसत गुणवत्ता

राख का इस्तेमाल कैसे करें?

  • छिड़काव: सुबह की ओस के समय राख को पत्तों पर छिड़कें, इससे कीट नहीं लगेंगे.
  • मिट्टी में मिलाना: बुवाई से पहले प्रति एकड़ 2-5 क्विंटल सूखी और छनी हुई राख मिट्टी में मिला दें.
  • लिक्विड खाद: राख को पानी में घोलकर 24 घंटे रखें और फिर उस पानी को सिंचाई के साथ दें.
  • सावधानी: बहुत ज्यादा राख न डालें, वरना मिट्टी बहुत ज्यादा क्षारीयहो सकती है.

आपके लिए इसका क्या मतलब है?

घर की बचत: अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं या किचन गार्डन रखते हैं, तो कूड़े में फेंकी जाने वाली राख अब आपकी मिट्टी के लिए 'काला सोना' है.
सुरक्षित भोजन: राख के इस्तेमाल से पैदा हुई सब्जियाँ रसायनों से मुक्त होती हैं, जो आपके परिवार की सेहत के लिए बेहतर हैं.
मिट्टी का उपचार: अगर आपकी मिट्टी अम्लीय है और फसल पीली पड़ रही है, तो राख एक तुरंत असर दिखाने वाला उपचार है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. चूल्हे की राख को ‘देसी पोटाश’ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसमें पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो पौधों की ग्रोथ और दाने/फलों के विकास में अहम भूमिका निभाता है.

Q2. क्या राख रासायनिक खाद का विकल्प बन सकती है?
हां, यह MOP जैसी महंगी खाद का सस्ता और जैविक विकल्प बन सकती है.

Q3. राख का इस्तेमाल कैसे करें?
मिट्टी में मिलाकर, पौधों के आसपास छिड़काव और कीट नियंत्रण के लिए पत्तियों पर हल्का छिड़काव.

Q4. क्या राख से कीट भी दूर होते हैं?
हां, राख का छिड़काव करने से कई कीट और फफूंद नियंत्रित होते हैं.

Q6. मिट्टी के लिए राख कैसे फायदेमंद है?
यह मिट्टी के pH स्तर को संतुलित करती है और उसे कम अम्लीय बनाती है.

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