मंडियों में MSP से कम मिल रहा है दाल का भाव? परेशान न हों, यहां बेचें अपनी फसल; जानें रजिस्ट्रेशन का पूरा ऑनलाइन प्रोसेस

अगर आप दलहन या तिलहन के किसान हैं और मंडियों में आपको एमएसपी से कम दाम मिल रहे हैं, तो तुरंत e-Samridhi पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं.
मंडियों में MSP से कम मिल रहा है दाल का भाव? परेशान न हों, यहां बेचें अपनी फसल; जानें रजिस्ट्रेशन का पूरा ऑनलाइन प्रोसेस

दलहन और तिलहन की कीमतें MSP से नीचे आने पर केंद्र सरकार ने NAFED और NCCF को खरीद तेज करने का निर्देश दिया है. (फोटो सोर्स: esamridhi)

देशभर में दलहन और तिलहन की कीमतों में गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद तेज करने का निर्देश दिया है. सरकार चाहती है कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले और बाजार में कम कीमतों की वजह से उन्हें नुकसान न उठाना पड़े.

क्या है सरकार का नया निर्देश?

कृषि मंत्री ने साफ कहा कि MSP पर खरीद को सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अभियान की तरह चलाया जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर खरीद लक्ष्य तय किए जाएं और जहां भी खरीद में दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें तुरंत दूर किया जाए.

सरकार खासतौर पर इन फसलों की खरीद पर जोर दे रही है-

  • चना
  • मसूर
  • उड़द
  • सरसों
  • तुअर (अरहर)

इन फसलों की मंडी कीमतें कई जगह MSP से नीचे चल रही हैं, जिससे किसानों की आय प्रभावित हो रही है.

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MSP खरीद कैसे काम करती है?

प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत जब किसी फसल की बाजार कीमत MSP से नीचे चली जाती है, तब सरकार नाफेड और NCCF जैसी एजेंसियों के जरिए किसानों से सीधे खरीद करती है.

इसका मकसद है-

  • किसानों को न्यूनतम तय कीमत की गारंटी देना
  • बाजार में कीमतों को स्थिर रखना
  • किसानों को नुकसान से बचाना

उदाहरण के तौर पर, अगर मंडी में तुअर दाल की कीमत MSP से कम मिल रही है, तो किसान अपनी उपज नाफेड को MSP रेट पर बेच सकते हैं.

किसानों को कैसे होगा फायदा?

1. MSP का पूरा फायदा मिलेगा- अगर बाजार में कीमतें गिर भी जाएं, तब भी किसान अपनी उपज MSP पर बेच सकेंगे.

2. आय में स्थिरता- दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को दाम गिरने का डर कम होगा.

3. 72 घंटे में भुगतान- सरकार ने निर्देश दिया है कि किसानों को खरीद के 72 घंटे के भीतर भुगतान हो.

4. बिचौलियों से राहत- सरकारी खरीद एजेंसियों को सीधे बेचने से किसानों को दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

5. उत्पादन बढ़ाने को मिलेगा प्रोत्साहन- जब किसानों को सही दाम मिलेगा, तो वे दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे.

NAFED पर रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

अगर किसान अपनी तुअर दाल या दूसरी फसल नाफेड को बेचना चाहते हैं, तो उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा. यह प्रक्रिया मोबाइल से भी आसानी से की जा सकती है.

रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस

  • स्टेप 1: eSamridhi Portal पर जाएं.
  • स्टेप 2: होमपेज पर 'Farmer Registration' का विकल्प चुनें.
  • स्टेप 3: अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें.
  • स्टेप 4: स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा भरें.
  • स्टेप 5: OTP वेरिफिकेशन पूरा करें.
  • स्टेप 6: इसके बाद किसान अपनी जरूरी जानकारी भरें, जैसे- नाम, पता, बैंक खाता, आधार विवरण, फसल की जानकारी
  • स्टेप 7: रजिस्ट्रेशन सबमिट करें.

रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच सकते हैं.

कैसे होती है खरीद?

  • एक बार जब कोई किसान नए ई-समृद्धि प्लैटफॉर्म पर खुद को रजिस्टर करता है, तो प्लेटफॉर्म सभी खरीदे गए और रिजेक्टेड लॉट को रिकॉर्ड करता है, प्रत्येक लॉट के लिए एक यूनिक नंबर असाइन करता है, और इन्वेंट्री को अपडेट करता है.
  • यूजर खरीदे गए लॉट की सूची देख सकते हैं और जांचकर्ता प्रक्रिया के किसी भी चरण में जांच के डिटेल्स जोड़ सकते हैं.
  • सिस्टम प्रत्येक बैग को एक क्यूआर कोड के साथ टैग करता है, जिसे ई-समृद्धि खरीद पोर्टल के साथ मैप किया जाता है और इस प्रकार खरीद प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित किया जाता है, जिससे पारदर्शिता, सटीकता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है.

किन राज्यों में हैं दिक्कतें?

बैठक में कई राज्यों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई:

  • बिहार में DBT सिस्टम लागू नहीं
  • गुजरात में भुगतान में देरी
  • महाराष्ट्र में डेटा मिलान अधूरा
  • आंध्र प्रदेश से खरीद डेटा लंबित

केंद्र सरकार ने कहा है कि जहां भी राज्य स्तर पर रुकावटें आएंगी, वहां केंद्र सीधे हस्तक्षेप करेगा.

निष्कर्ष

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब कई किसानों को दलहन और तिलहन की कम कीमतों की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर MSP खरीद मजबूत होती है, तो किसानों का भरोसा बढ़ेगा और देश में दाल एवं तिलहन उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या तुअर दाल के अलावा अन्य फसलों का भी रजिस्ट्रेशन होता है?

हां, वर्तमान में पोर्टल पर तुअर और मक्का की बिक्री के लिए विशेष प्रावधान हैं.

Q2 अगर 72 घंटे में भुगतान न मिले तो क्या करें?

सरकार ने नई एसओपी लागू की है. देरी होने पर किसान संबंधित एजेंसी के स्थानीय कार्यालय या केंद्र के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

Q3 क्या रजिस्ट्रेशन के लिए मोबाइल से कर सकते हैं?

हां, किसान अपने स्मार्टफोन के माध्यम से भी esamridhi.in पर जाकर आसानी से रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं.

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