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दलहन और तिलहन की कीमतें MSP से नीचे आने पर केंद्र सरकार ने NAFED और NCCF को खरीद तेज करने का निर्देश दिया है. (फोटो सोर्स: esamridhi)
देशभर में दलहन और तिलहन की कीमतों में गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद तेज करने का निर्देश दिया है. सरकार चाहती है कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले और बाजार में कम कीमतों की वजह से उन्हें नुकसान न उठाना पड़े.
कृषि मंत्री ने साफ कहा कि MSP पर खरीद को सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अभियान की तरह चलाया जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर खरीद लक्ष्य तय किए जाएं और जहां भी खरीद में दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें तुरंत दूर किया जाए.
सरकार खासतौर पर इन फसलों की खरीद पर जोर दे रही है-
इन फसलों की मंडी कीमतें कई जगह MSP से नीचे चल रही हैं, जिससे किसानों की आय प्रभावित हो रही है.
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प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत जब किसी फसल की बाजार कीमत MSP से नीचे चली जाती है, तब सरकार नाफेड और NCCF जैसी एजेंसियों के जरिए किसानों से सीधे खरीद करती है.
इसका मकसद है-
उदाहरण के तौर पर, अगर मंडी में तुअर दाल की कीमत MSP से कम मिल रही है, तो किसान अपनी उपज नाफेड को MSP रेट पर बेच सकते हैं.
1. MSP का पूरा फायदा मिलेगा- अगर बाजार में कीमतें गिर भी जाएं, तब भी किसान अपनी उपज MSP पर बेच सकेंगे.
2. आय में स्थिरता- दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को दाम गिरने का डर कम होगा.
3. 72 घंटे में भुगतान- सरकार ने निर्देश दिया है कि किसानों को खरीद के 72 घंटे के भीतर भुगतान हो.
4. बिचौलियों से राहत- सरकारी खरीद एजेंसियों को सीधे बेचने से किसानों को दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
5. उत्पादन बढ़ाने को मिलेगा प्रोत्साहन- जब किसानों को सही दाम मिलेगा, तो वे दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे.
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अगर किसान अपनी तुअर दाल या दूसरी फसल नाफेड को बेचना चाहते हैं, तो उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा. यह प्रक्रिया मोबाइल से भी आसानी से की जा सकती है.
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच सकते हैं.
बैठक में कई राज्यों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई:
केंद्र सरकार ने कहा है कि जहां भी राज्य स्तर पर रुकावटें आएंगी, वहां केंद्र सीधे हस्तक्षेप करेगा.
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सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब कई किसानों को दलहन और तिलहन की कम कीमतों की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर MSP खरीद मजबूत होती है, तो किसानों का भरोसा बढ़ेगा और देश में दाल एवं तिलहन उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या तुअर दाल के अलावा अन्य फसलों का भी रजिस्ट्रेशन होता है?
हां, वर्तमान में पोर्टल पर तुअर और मक्का की बिक्री के लिए विशेष प्रावधान हैं.
Q2 अगर 72 घंटे में भुगतान न मिले तो क्या करें?
सरकार ने नई एसओपी लागू की है. देरी होने पर किसान संबंधित एजेंसी के स्थानीय कार्यालय या केंद्र के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
Q3 क्या रजिस्ट्रेशन के लिए मोबाइल से कर सकते हैं?
हां, किसान अपने स्मार्टफोन के माध्यम से भी esamridhi.in पर जाकर आसानी से रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं.