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(Image- PIB)
Carbon Credit: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कृषि क्षेत्र में वॉलेंट्री कार्बन मार्केट (Voluntary Carbon Market) के फ्रेमवर्क और कृषि वानिकी नर्सरी के एक्रीडेशन प्रोटोकॉल की शुरुआत की. मुंडा ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने छोटे और मध्यम किसानों को कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) का फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से देश के कृषि क्षेत्र में वॉलेंट्री कार्बन मार्केट (VCM) को बढ़ावा देने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार की है. किसानों को कार्बन मार्केट से परिचित कराने से न केवल उन्हें फायदा होगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने में भी तेजी आएगी.
उन्होंने किसानों के हित में कार्बन मार्केट (Carbon Market) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्यों के संबंधित मंत्रालयों और अन्य संबंधित संगठनों से पूर्ण सहयोग का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि दक्षिणी क्षेत्र के किसानों के साथ मिलकर, उनके लिए सुविधाजनक तरीके से और समाधान के साथ इस दिशा में काम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसका लाभ हमारे किसानों पर केंद्रित करने की जरूरत है. यह पहला कदम है जिसमें हम सभी की भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं.
मुंडा ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियां हम सभी के सामने हैं और ऐसे में हमें सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा. उन्होंने आईसीएआर (ICAR) से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने और सही तरीके से अच्छा काम करने को कहा है.
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मुंडा ने कहा कि देश में एग्री सेक्टर इकोनॉमी और करोड़ों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने बताया कि देश का 54.6% वर्कफोर्स कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े कामकाज में लगा हुआ है. सकल घरेलू उत्पाद में Agri Sector की हिस्सेदारी 18.6% है, जबकि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से कुल 139.3 मिलियन हेक्टेयर बुआई क्षेत्र है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में मंत्रालय ने सतत विकास के लिए कई कदम उठाए हैं.
मुंडा ने कहा कि कृषि वानिकी नर्सरी (Agroforestry Nurseries) के मान्यता प्रोटोकॉल से देश में कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर रोपण सामग्री के उत्पादन और प्रमाणीकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत होगी. उन्होंने सभी हितधारकों से इसे अपनाने के लिए कहा ताकि गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री सुनिश्चित रिटर्न प्रदान कर सके और इस तरह राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति (National Agroforestry Policy) के उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके. उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग का भी आग्रह किया. मुंडा ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी कृषि क्षेत्र के विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति काफी गंभीर हैं और उनके नेतृत्व में हम समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.
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इस अवसर पर सचिव मनोज आहूजा, डीएआईरई के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों के साथ ही कृषि से संबंधित अलग-अलग संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.