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Seed Treatment: खरीफ फसलों की कटाई के बाद किसानों ने रबी फसलों (Rabi Crops) की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है. रबी फसलों की बुवाई को लेकर बिहार सरकार कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. कृषि विभाग ने कहा कि फसल सुरक्षा के लिए किसान भाइयों और बहनों से अनुरोध है कि बीजोपचार (Seed Treatment) करके ही बीज की बुआई करें.
बता दें कि फसल में रोग के कारक फफूंज रहने पर फफूंदनाशी से जीवाणु रहने पर जीवाणुनाशक से, सूत्रकृमि रहने पर सौर उपचार या कीटनाशी से उपचार किया जाता है. मिट्टी में रहने वाले कीटों से बीज सुरक्षा के लिए कीटनाशी से बीज उपचार (Seed Treatment) किया जाता है. वैज्ञानिक तरीकों से बीजोपचार करने में 1 रुपये खर्च करते हैं तो फसल सुरक्षा में की जाने वाली खर्च में 10 रुपये की नेट बचत होती है. इससे किसान का मुनाफा बढ़ेगा. इसलिए किसान भाई बीजोपचार करके ही बीज की बुआई करें.
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दलहन फसल में फफूंदजनित रोग, मिट्टीजनत कीट के लिए और नाइट्रोजन फिक्सेशन बैक्टीरिया से बचाने के लिए बीजोपचार करना चाहिए. दलहन फसल में फफूंदजनित रोग के लिए ट्राइकोर्डमा का 5 मिली प्रति ग्राम या कार्बेन्डाजिम 50% के घोल का 2 ग्राम बीज में मिलाएं. मिट्टी जनित कीट के लिए क्लोरपायरीफास 20% ई.सी का 6 मिली से बीज का उपचार करें. साथ ही नाइट्रोजन फिक्सेशन बैक्टीरिया के लिए राइजोबियम कल्चर (प्रत्येक दलहन का अलग-अलग कल्चर होता है) का 5-6 ग्राम से बीजोपचार करें.
रबी सीजन में मक्का और सब्जी की खेती में रोग और कीट से बचाने के लिए किसान बीजोपचार करें. मक्का और सब्जी में फफूंदजनित रोग से बचाने के लिए ट्राइकोडर्मा का 5 मिली प्रति ग्राम या कार्बेन्डाजिम 50% घु.चू. का 2 ग्राम से बीज का उपचार करें. साथ ही मिट्टीजनित कीट के लिए क्लोरपायरीफॉस 20% ई.सी. का 6 मिली से बीजोपचार करें.
तिलहन फसलें तोरी/सरसों/सूरजमुखी फसलों में फफूंदजनित रोग से बचाने के लिए ट्राइकोडर्मा का 5 मिली प्रति ग्राम या कार्बेन्डाजिम 50% घु.चू. का 2 ग्राम से बीजोपचार करें. इसके अलावा, मिट्टीजनित कीट के लिए क्लोरपायरीफॉस 20% ई.सी. का 6 मिली से बीजोपचार करें.
रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं में फफूंदजनित रोग के लिए ट्राइकोडर्मा का 5 मिली प्रति ग्राम या कार्बेन्डाजिम 75% डब्ल्यू.जी का 2 ग्राम से बीज का उपचार करें. इसके साथ ही, सूत्रकृमि (नेमाटोड) के लिए10% नमक के घोल में बीज को डुबोए, फिर छानकर साफ पानी में 2-3 बार धोएं. वहीं, मिट्टीजनित कीट के लिए क्लोरपायरीफॉस 20% ई.सी. का 6 मिली से बीजोपचार करें.
इसके अलावा, सभी फसल में सूत्रकृमि (नेमाटोड) से बचाव के लिए नीम की निबोली का चूर्ण का 100 ग्राम से बीजोपचार करें.

आलू फसल में अगात और पिछात झुलसा रोग से बचान के लिए मैन्कोजेब 75% WP का 2 ग्राम प्रति लीटर पीनी की दर से बीज को लगभग आधे घंटे तक डूबाकर उपचारित करें, उसके बाद उपचारित बीज को छाया में सूखाकर 24 घंटे के अंदर बुआई कर देना चाहिए.
ऊपर बताई गई विधियों से अगर फसलों के बीज उपचार संभव न हो तो, किसान भाई घरेलू विधि में एक लीटर ताजा गौमूत्र 10 लीटर पानी में मिलाकर भी बीजोपचार कर सकते हैं.