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Dragon Fruit Farming: परंपरागत फसलों की खेती करने वाले किसानों को नुकसान ज्यादा और मुनाफा कम होता है. ऐसे किसानों के लिए ड्रैगन फ्रूट या कमलम (Dragon Fruit) की खेती फायदेमंद साबित हो सकता है. ड्रैगन फ्रूट की खेती इसलिए खास है क्योंकि यह आमदनी का बेहतर जरिया है. इसमें बस एक बार पैसा लागकर आप 25 से 30 साल तक लगातार कमाई कर सकते हैं. यह बंजर जमीन पर भी आसानी उगाई जा सकती है. यह कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है.
भारत में कमलम (ड्रैगन फ्रूट) की खेती का क्षेत्र वर्तमान में 3,000 हेक्टेयर है, जिसे बढ़ाकर 50,000 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है. बिहार, यूपी, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में इसकी खेती होती है.
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बिहार सरकार ड्रैगन फ्रूट विकास योजना 2025-26 (Dragon Fruit Vikas Yojana) के तहत किसानों को इसकी खेती सब्सिडी दे रही है. इस योजना की लागत प्रति हेक्टेयर 6.75 लाख रुपये है. इस पर किसानों को 40% अनुदान दिया जाएगा. अनुदान की राशि 2.70 रुपये प्रति हेक्टेयर है. इस योजना के तहत प्रति हेक्टेयर ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए अनुदान की राशि पहले साल में 1,62,000 लाख रुपये और दूसरे साल 1,08,000 रुपये मिलेंगे.
ड्रैगन फ्रूट का क्षेत्र विस्तार राज्य के 23 जिलों- अररिया, औरंगाबाद, बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णियां, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा एवं सीवान में किया जाएगा.

योजना का फायदा लेने के लिए विभागीय वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in/ उपलब्ध 'ड्रैगन फ्रूट विकास योजना' के तहत आवेदन करें, लिंक पर जाएं और जरूरी डीटेल भरते हुआ आवेदन कर सकते हैं. विशेष जानकारी के लिए संबंधित जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है.
ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) की खेती पौधे और बीज दोनों से ही की जा सकती है. हालांकि, अगर आप बीज से खेती करेंगे तो फल आने में 4-5 साल लग सकते हैं. जबकि कलम से बनाए गए पौधे से खेती करने पर आपको 2 साल में ही फल मिलने शुरू हो जाते हैं. इसकी खेती कम पानी में भी हो सकती है. इसकी खेती से पहले खेत में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद जरूर डालें, ताकि पौधे को पोषक तत्व की कोई कमी ना हो.
शुष्क मौसम में, बढ़ते माध्यम को वैकल्पिक दिनों में ड्रिप सिस्टम (Drip Irrigation) के माध्यम से सिंचाई करके नम रखा जाता है. ड्रैगन फ्रूट की खेती में खरपतवार नियंत्रण एक महत्वपूर्ण काम है और खरपतवार चटाई के उपयोग से खरपतवारों की बढ़ोतरी को प्रभावी ढंग से कम किया जाता है और मिट्टी की नमी को संरक्षित करने में भी सहायता मिलती है. रोपण के लगभग 8 महीने बाद ड्रैगन फ्रूट, जाली के ऊपर बेलों का एक घना समूह बना लेता है, जो जमीन तक झुका रहता है. एक बार पौधा लगाने के बाद यह 25-30 साल तक फल देता है और अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है.
रोपण के 2 वर्षों के बाद औसत आर्थिक उपज 10 टन प्रति एकड़ है. वर्तमान में मार्केट रेट 200-250 रुपये प्रति किलो है, इसलिए सालाना फल बेचकर 10 लाख रुपये तक कमाई की जा सकती है.
'ड्रैगन फ्रूट विकास योजना' बिहार सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य पात्र रैयत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करके 23 जिलों में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देना है.
इस योजना के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती पर किसानों को 40% तक अनुदान मिलेगा. अनुदान दो किस्तों में दिया जाएगा.
इस योजना का फायदा सिर्फ रैयत कृषक जमीन के कागजात के आधार पर ले सकते है.
अनुदान राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी.
विशेष जानकारी के लिए संबंधित जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है.