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बिहार सरकार अब दलहन की बुवाई के लिए आधुनिक मशीनों पर जोर दे रही है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
Dalhan ki kheti: अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर स्मार्ट और वैज्ञानिक खेती की ओर कदम बढ़ाने की जरूरत है. इसी दिशा में दलहन (Pulses) की आधुनिक खेती किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. कम पानी, कम लागत और बेहतर उत्पादन के साथ यह खेती किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन रही है.
कृषि क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के बीच अब फोकस ‘कम संसाधन में अधिक उत्पादन’ पर आ गया है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दलहन फसलों की स्मार्ट खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. बिहार कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत बीजों, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी गई है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी हो सके.
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दलहन फसलें जैसे अरहर, चना, मूंग, उड़द आदि न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती हैं बल्कि कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं. जल संकट और बढ़ती लागत के दौर में यह फसलें किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही हैं.
दलहन फसलें नाइट्रोजन फिक्सेशन के जरिए मिट्टी को उपजाऊ बनाती हैं, जिससे रासायनिक खाद की जरूरत कम हो जाती है. इससे लागत घटती है और भूमि की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है.
इसके अलावा, बाजार में दालों की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना रहती है. सरकार भी दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिससे किसानों को बीज, तकनीक और प्रशिक्षण में सहायता मिलती है.
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आधुनिक खेती में ड्रिप इरिगेशन, उन्नत बीज, सटीक बुवाई तकनीक और कीट प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं. इन तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ता है और नुकसान कम होता है.
उन्नत किस्म के बीज तेजी से बढ़ते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है. इससे फसल खराब होने का खतरा कम होता है. वैज्ञानिक तकनीकों जैसे लाइन बुवाई, समय पर सिंचाई और संतुलित पोषण से उत्पादन में 20-30% तक बढ़ोतरी संभव है.
दलहन की खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैल्यू एडिशन के जरिए भी कमाई की जा सकती है. जैसे प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और सीधे बाजार में बिक्री से किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है. इसके अलावा, फसल विविधीकरण के तहत दलहन को शामिल करना जोखिम को भी कम करता है.
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सरकार देश में दालों के आयात को कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए दलहन उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जा रही है. आने वाले वर्षों में दलहन की खेती किसानों की आय दोगुनी करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
अगर किसान आधुनिक तकनीकों और उन्नत बीजों के साथ दलहन की स्मार्ट खेती अपनाते हैं, तो वे कम लागत में ज्यादा उत्पादन हासिल कर सकते हैं. यह न सिर्फ उनकी आय बढ़ाएगा बल्कि खेती को टिकाऊ और लाभकारी भी बनाएगा. 'दलहन अपनाएं, समृद्धि पाएं' अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक रणनीति बनता जा रहा है.
1. दलहन की खेती क्यों फायदेमंद है?
दलहन फसलें कम पानी और कम लागत में उगाई जा सकती हैं और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं, जिससे दीर्घकालीन लाभ मिलता है.
2. कौन-कौन सी दलहन फसलें सबसे ज्यादा लाभकारी हैं?
अरहर, चना, मूंग और उड़द प्रमुख लाभकारी दलहन फसलें हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है.
3. स्मार्ट खेती क्या होती है?
स्मार्ट खेती में आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन, उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई और कीट नियंत्रण का उपयोग किया जाता है.
4. क्या दलहन की खेती में ज्यादा पानी की जरूरत होती है?
नहीं, दलहन फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं, इसलिए यह जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प हैं.
5. उन्नत बीज से कितना फायदा हो सकता है?
उन्नत बीज और वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन में 20-30% तक बढ़ोतरी संभव है.
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