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फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गठित समिति के सदस्य बिनोद आनंद ने खरीफ फसलों (Kharif Crops) का एमएसपी बढ़ाने की सराहना करते हुए कहा है कि भारत में कृषि अनुसंधान में कृषि जीडीपी (GDP) का एक फीसदी निवेश करने की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने सीधे किसानों से खरीद की व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार और मूल्य श्रृंखला के लोकतंत्रीकरण के लिए प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को साथ लेने की भी जोरदार वकालत की. आनंद ग्रामीण भारत में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों की शीर्ष संस्था सीएनआरआई (CNRI) के महासचिव भी हैं.
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मार्केटिंग सेशन 2023-24 के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी करने की घोषणा गत बुधवार को की थी. आनंद ने एक विज्ञप्ति में कहा कि सरकार ने ज्वार, बाजरा, रागी और तिल जैसी फसलों की एमएसपी 2014-15 की तुलना में दोगुनी कर दी है, जबकि अन्य फसलों की दरों में 70 से 90% बढ़ोतरी हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल आउटलुक को देखते हुए यह काफी उल्लेखनीय है.
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उन्होंने कहा कि कृषि निर्यात पहले के मुकाबले बढ़ा है और इसे आगे और बढ़ाने के लिए भारत को एक क्रियाशील व्यापार नीति की आवश्यकता है. आनंद ने कृषि क्षेत्र में रिसर्च एंड इनोवेशन पर कहा कि भारत में कृषि अनुसंधान में कृषि जीडीपी (Agri GDP) का कम-से-कम एक फीसदी सार्वजनिक निवेश करने की जरूरत है. इससे निजी निवेश आकर्षित करने और सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए सक्षम नीतिगत माहौल बनेगा.
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