ये है देश का सबसे सस्ता मुआवजा! लाखों की फसल बर्बाद और किसान के हाथ में आए केवल ₹2.30, जानिए क्‍या है चौंकाने वाला मामला

महाराष्ट्र के पालघर जिले के किसान माधुकर पाटिल को बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद होने पर मात्र ₹2.30 मुआवजा मिला. यह घटना सरकारी तंत्र की लापरवाही और किसानों की बदहाल स्थिति को उजागर करती है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराज़गी है.
ये है देश का सबसे सस्ता मुआवजा! लाखों की फसल बर्बाद और किसान के हाथ में आए केवल ₹2.30, जानिए क्‍या है चौंकाने वाला मामला

महाराष्ट्र के पालघर जिले से आई यह खबर न केवल चौंकाने वाली है बल्कि किसानों की हालत और गवर्मेंट सिस्टम की हकीकत को भी उजागर करती है. असल में यहां की सरकार ने सबसे सस्ता मुआवजा एक किसान को दिया है. असल में वाडा तालुका के शिलोत्तर गांव के किसान माधुकर बाबूराव पाटिल ने बताया कि उनकी धान की फसल बेमौसम बारिश से पूरी तरह खराब हो गई.किसान ने दावा किया है कि भारी नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने सरकारी मुआवजे के लिए आवेदन किया, लेकिन जब उनके बैंक खाते में केवल ₹2.30 आए, तो वे सन्न रह गए.

क्या है परेशान किसान का कहना

माधुकर पाटिल ने दावा करते हुए कहा है कि इस बार लगातार हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया था.फसल सड़ गई, धान का भूसा भी काला पड़ गया, जिससे पशुओं के लिए चारे की भारी कमी हो गई. उन्होंने कहा है कि हमने खेतों में मेहनत बोई थी, मज़ाक नहीं. इतनी मेहनत के बाद जब मुआवजे के नाम पर ₹2.30 मिले, तो यह हमारे साथ अन्याय है.

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किसाने का जमीन को लेकर दावा

पाटिल के पास उनकी पत्नी और बेटियों के नाम पर कुल 11 एकड़ जमीन है. उन्होंने कहा कि ऐसा मुआवजा किसानों की मेहनत का अपमान है और यह दिखाता है कि किसानों की समस्याएं सरकारी रिकॉर्ड्स तक सीमित रह गई हैं। गांव के कई अन्य किसानों ने भी फसलों के नुकसान की शिकायत की है, लेकिन मुआवजे की प्रक्रिया धीमी और त्रुटियों से भरी हुई बताई जा रही है.उनका दावा है कि इतना कम मुआवजा किसानों के साथ मज़ाक जैसा है और इससे ग्रामीण इलाकों में लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.

भारी बारिश से फसल हुई बर्बाद

इस साल महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है. मराठवाड़ा, विदर्भ, ठाणे और पालघर क्षेत्रों में हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं.किसानों का कहना है कि फसल बीमा योजना और सरकारी मुआवजा दोनों ही केवल कागज़ों पर प्रभावी हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि किसानों को या तो बहुत देर से भुगतान मिलता है या फिर नाममात्र की राशि भेज दी जाती है.

अब पालघर का ₹2.30 मुआवजा मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है.यह मामला यह दिखाता है कि सरकारी तंत्र में तकनीकी त्रुटियां और लापरवाही किस हद तक बढ़ गई हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर इतने बड़े नुकसान के बाद भी इतनी छोटी रकम मिलती है, तो किसान आखिर कब तक उम्मीद लगाए बैठे रहेंगे?(Input: PTI)

5 FAQs:

Q1. पालघर के किसान माधुकर पाटिल को कितना मुआवजा मिला?
A1. किसान को बेमौसम बारिश से फसल खराब होने पर केवल ₹2.30 मुआवजा मिला.

Q2. किसान ने सरकार से मुआवजे के लिए कब आवेदन किया था?
A2. किसान ने फसल बर्बादी के बाद तुरंत सरकारी राहत के लिए आवेदन किया था.

Q3. किसान की फसल खराब होने की वजह क्या थी?
A3. लगातार और बेमौसम बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिससे धान की फसल सड़ गई.

Q4. किसान के पास कितनी जमीन है?
A4. माधुकर पाटिल के पास उनकी पत्नी और बेटियों के नाम पर कुल 11 एकड़ जमीन है.

Q5. इस घटना पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?
A5. ग्रामीणों ने इसे किसानों के साथ मज़ाक बताया और सरकार से पारदर्शी मुआवजा प्रणाली की मांग की है.

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