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Rabi Season: राजस्थान में रबी सीजन की बुवाई का काम तेजी से चल रहा है. इस वर्ष अच्छी वर्षा के चलते चने की फसल का रकबा लगभग 1.55 लाख हेक्टेयर रहने की संभावना है, जो अजमेर के कुल बुवाई क्षेत्र का लगभग 50% है. इसी को ध्यान में रखते हुए, कृषि विभाग ने किसानों को चने की फसल में होने वाले प्रमुख रोगों से बचाव के लिए विस्तृत उपाय बताए हैं.
राजस्थान कृषि विभाग के मुताबिक, मौसम की अनुकूलता बढ़ने से चने में मृदा और बीज जनित रोगों जैसे कि जड़ गलन, सूखा जड़ गलन और उखठा रोग (Wilt) का प्रकोप बढ़ सकता है.
रोग का कारण- यह रोग मुख्य रूप से हानिकारक फफूंद (फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम) द्वारा फैलता है.
लक्षण- रोग का प्रभाव खेत में छोटे-छोटे टुकड़ों में दिखाई देता है. शुरुआत में पौधे की ऊपरी पत्तियां मुरझा जाती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखकर मर जाता है. तने को चीर कर देखने पर वाहक ऊतकों में काले रंग की धागेनुमा कवक जाल संरचना दिखाई देती है.
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किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए, कृषि विभाग ने तीन-स्तरीय उपाय अपनाने की सलाह दी है.
1. कृषि प्रबंधन और फसल चक्रजल-
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2. बीज उपचार (Seed Treatment)
जड़ गलन और उखठा रोग की रोकथाम के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार करना सबसे महत्वपूर्ण है.
रासायनिक उपचार- प्रति किलो बीज की दर से कार्बन्डाजिम 1 ग्राम और थाईरम 2.5 ग्राम का मिश्रण, या 2 ग्राम कार्बोक्सीन 37.5% थाईरम 37.5% (75% WS) का इस्तेमाल करें.
जैविक उपचार- प्रति किलो बीज की दर से 10 ग्राम ट्राईकोडर्मा से बीज उपचार करें.
3. भूमि उपचार (Soil Treatment)
फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए भूमि उपचार भी जरूरी है.
विधि- 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा को 100 किलो गोबर की खाद में अच्छी तरह मिलाकर 10-15 दिन तक छाया में रखें.
प्रयोग- इस तैयार मिश्रण को बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर की दर से पलेवा (बुवाई से पहले सिंचाई) करते समय मिट्टी में मिला दें.
कृषि विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के संदेह या अधिक जानकारी के लिए अपने स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी या नजदीकी कृषि कार्यालय से तुरंत संपर्क करें और परामर्श के बाद ही प्रभावी उपाय अपनाएं.
Q1. कृषि विभाग ने यह एडवाइजरी किस फसल और किस मौसम के लिए जारी की है?
यह एडवाइजरी चनेकी फसल के लिए रबी सीजन में होने वाले रोगों से बचाव के लिए जारी की गई है.
Q2. इस सीजन में चने की बुवाई का अनुमानित क्षेत्रफल कितना है?
अजमेर जिले में इस बार चने का बुवाई क्षेत्रफल लगभग 1.55 लाख हेक्टेयर रहने की संभावना है, जो कुल बुवाई क्षेत्र का लगभग 50% है.
Q3. चने की फसल में मुख्य रूप से किन रोगों का प्रकोप होने की संभावना है?
मुख्य रूप से मृदा और बीज जनित रोगों जैसे कि जड़ गलन, सूखा जड़ गलन और उखठा रोग का प्रकोप होने की संभावना है।.
Q4. उखठा रोग किस कारण फैलता है?
यह रोग मुख्य रूप से हानिकारक फफूंद (फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम) द्वारा फैलता है.
Q5. बीज उपचार का जैविक विकल्प क्या है?
जैविक उपचार के लिए, प्रति किलो बीज की दर से 10 ग्राम ट्राईकोडर्मा से बीज का उपचार करें.
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