सरकार ने वापस लिया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन का ड्राफ्ट, अब नए सिरे से होगी समीक्षा

सरकार ने 20 अप्रैल 2026 को Sugarcane (Control) Order, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया था और इस पर राज्यों, चीनी मिलों और अन्य हितधारकों से एक महीने के भीतर सुझाव और टिप्पणियां मांगी थीं. इसके लिए 20 मई तक का समय दिया गया था.
सरकार ने वापस लिया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन का ड्राफ्ट, अब नए सिरे से होगी समीक्षा

ज्यादातर कमेंट्स में कई तरह के विचारों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया. (फोटो सोर्स: Freepik)

केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए Sugarcane (Control) Order, 2026 के ड्राफ्ट को वापस ले लिया है. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने 29 मई को जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में बताया कि राज्यों और उद्योग से जुड़े हितधारकों से मिले सुझावों और आपत्तियों के बाद ड्राफ्ट पर दोबारा विचार करने का फैसला किया गया है.

20 मई तक मांगे गए थे सुझाव

सरकार ने 20 अप्रैल 2026 को Sugarcane (Control) Order, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया था और इस पर राज्यों, चीनी मिलों और अन्य हितधारकों से एक महीने के भीतर सुझाव और टिप्पणियां मांगी थीं. इसके लिए 20 मई तक का समय दिया गया था.

DFPD ने कहा कि मिली टिप्पणियों में कई तरह के विचार सामने आए हैं. इन्हें ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट को फिलहाल वापस लेने और नए सिरे से समीक्षा करने का फैसला लिया गया है.

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ड्राफ्ट में क्या-क्या बड़े बदलाव प्रस्तावित थे?

प्रस्तावित ड्राफ्ट में चीनी उद्योग से जुड़े कई अहम बदलाव शामिल थे, जिन पर उद्योग जगत में व्यापक चर्चा हुई थी.

चीनी मिलों के बीच दूरी बढ़ाने का प्रस्ताव

ड्राफ्ट में दो चीनी मिलों के बीच न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने का प्रस्ताव था.

FRP नियम का दायरा बढ़ाने की तैयारी

सरकार Fair and Remunerative Price (FRP) व्यवस्था को केवल चीनी मिलों तक सीमित रखने के बजाय खांडसारी इकाइयों और गन्ना क्रशर यूनिट्स पर भी लागू करना चाहती थी.

गन्ना खरीद और प्रोसेसिंग नियमों में बदलाव

गन्ना खरीद, सप्लाई और प्रोसेसिंग से जुड़े कई पुराने नियमों को मौजूदा उद्योग जरूरतों के अनुरूप अपडेट करने का भी प्रस्ताव था.

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अब क्या होगा?

ड्राफ्ट वापस लेने के बाद सरकार अब प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा करेगी. के बाद संशोधित प्रावधानों के साथ नया ड्राफ्ट जारी किया जा सकता है. हालांकि, सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि नया ड्राफ्ट कब तक लाया जाएगा.

चीनी कंपनियों पर रहेगी नजर

इस फैसले के बाद शुगर सेक्टर की कंपनियों और गन्ना उद्योग से जुड़े कारोबारों पर निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि नए ड्राफ्ट में आने वाले बदलाव उद्योग की प्रतिस्पर्धा, गन्ना मूल्य निर्धारण और नई मिलों की स्थापना पर असर डाल सकते हैं.

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