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Wheat Procurement: गेहूं उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खबर है. अब फसल अवशेष जलाने वाले किसान गेहूं की खरीद के फायदे से वंचित होंगे. यानी ऐसे किसान सरकार को गेहूं नहीं बेच पाएंगे. बिहार सरकार (Bihar Government) ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंध करें. फसल अवशेष से जुड़े उपकरणों पर सरकार 70 से 80 फीसदी तक अनुदान दे रही है.
किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए. बिहार उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किसानों को चेतवानी देते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों को अभी डीबीटी (DBT) के माध्यम से अलग-अलग योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान से वंचित किया जा रहा है. अब उन्हें गेहूं की खरीद के फायदे से भी वंचित किया जाएगा. बार-बार फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर कानूनी कार्रवाई होगी.
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जिन क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने की शिकायतें थीं, वहां के किासन सलाहकारों और कृषि समन्वयकों को निर्देश दिया गया है कि वह गांवों में जाकर किसानों को जागरूक करें. सभी जिला पदाधिकारियों को लगातर अनुश्रवण का निर्देश है. सभी कृषि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विज्ञानियों को भी इस संबंध में किसानों को प्रशिक्षित करने और इसके कुप्रभाव के बारे में जानकारी देने को कहा गया है.
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कृषि यांत्रीकरण योजना के तहत हैप्पी सीडर, रोटरी मल्चर, स्ट्रॉ बेलर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटली सलेशर, जीरो टिलेज/सीड-कम-फर्टिलाइजर, पैडी स्टाचौपर आदि यंत्रों पर 75 से 80 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है.